मध्य प्रदेश सरकार

औरंगाबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर हुई मजदूरों की मौत के बाद घटनास्थल की जांच करती पुलिस. (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: रेल हादसे में मारे गए मज़दूरों के परिजनों को 10 माह बाद भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र

पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान आठ मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में रेल की पटरियों पर सो रहे 16 प्रवासी मज़दूरों की एक मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी. इनमें से 11 मज़दूर शहडोल ज़िले के थे एवं बाकी उमरिया ज़िले के थे.

ग्वालियर में पीईबी के प्रमुख का पुतला जलाकर प्रदर्शन करते छात्र. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

‘सालों के संघर्ष के बाद भर्ती परीक्षा हो, जिसमें फ़र्ज़ीवाड़ा हो जाए तो बेरोज़गार युवा क्या करेगा’

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में बीते महीने कृषि विभाग के पदाधिकारियों के 863 पदों पर भर्ती की परीक्षा हुई थी. परिणाम आने के बाद टॉपर्स छात्रों के एक ही कॉलेज-क्षेत्र-समुदाय से होने से लेकर एक जैसे प्राप्तांक और ग़लतियों संबंधी कई सवाल उठे, जिसे लेकर ग्वालियर एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्र इसे दूसरा व्यापमं घोटाला कहते हुए क़रीब महीने भर से आंदोलनरत हैं.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: छात्रों ने लगाया एक और व्यापमं घोटाले का आरोप, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

आरोप है कि मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एक्ज़ामिनेशन बोर्ड द्वारा आयोजित कृषि पदाधिकारियों के लिए हुई भर्ती परीक्षा में एक ही क्षेत्र और समुदाय के 10 छात्रों ने टॉप किया है. सभी ने ग्वालियर के राजकीय कृषि कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की है. इन्हें परीक्षा में एक जैसे प्राप्तांक मिले हैं और सभी ने परीक्षा में ग़लतियां भी एक जैसी ही की हैं.

मृतक रामजी लाल राठौर का परिवार. (सभी फोटो: दीपक गोस्वामी)

मध्य प्रदेश: ‘ज़हरीली शराब से 24 मौतों के बाद सरकार जागी, पहले कार्रवाई करती तो कोई मरता नहीं’

ग्राउंड रिपोर्ट: मुरैना ज़िले के मानपुर, छैरा समेत आसपास के कुछ गांवों में बीते हफ़्ते ज़हरीली शराब से 24 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद ज़िले के ही तीन अन्य गांवों में पांच और लोगों की जान गई. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध शराब के धंधे के बारे में कई शिकायतें कीं, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया.

(फोटो सभार: इंडियन रेलवे वेबसाइट)

मध्य प्रदेश: नाबालिग को अगवा कर नौ लोगों ने बलात्कार किया, सात आरोपी गिरफ़्तार

मामला उमरिया ज़िले का है. आरोप है कि 13 वर्षीय लड़की का एक जान-पहचान के व्यक्ति द्वारा दो बार अपहरण किया गया, जिसके बाद नौ लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया. घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य सरकार महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध को लेकर जन-जागरूकता अभियान चला रही है.

दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में प्रदर्शऩ. (फोटो: ट्विटर @KaushikPms)

कामकाजी महिलाओं की निगरानी वाला प्रस्ताव सुरक्षा की आड़ में नियंत्रण की कोशिश: कार्यकर्ता

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिनों घोषणा की थी कि सरकार काम के लिए बाहर जाने वाली महिलाओं के लिए पंजीकरण सुविधा शुरू करेगी, जहां उन्हें स्थानीय थाने में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और सुरक्षा के लिए उन्हें ट्रैक किया जाएगा. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसकी आलोचना की है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शराब कांड को लेकर एक समीक्षा बैठक की. (फोटो सभार: ट्विटर/ChouhanShivraj)

मुरैना ज़हरीली शराब कांड: मरने वालों की संख्या 24 हुई, डीएम एवं एसपी को हटाने का निर्देश

मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िले के बागचीनी और सुमावली थाना क्षेत्र का मामला. राज्य सरकार ने इस घटना के सभी पहलुओं पर जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है. मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में सीधे तौर पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

(फोटो: एएनआई)

मध्य प्रदेश: ग्वालियर में गोडसे पर आधारित लाइब्रेरी शुरू होने के दो दिन बाद बंद

हिंदू महासभा ने बीते दस जनवरी को ग्वालियर में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के नाम पर ज्ञानशाला की शुरुआत की थी. महासभा की ओर से कहा गया था कि लाइब्रेरी को स्थापित करने का उद्देश्य आज के अज्ञानी युवाओं में सच्ची देशभक्ति को जगाना है, जिसके लिए गोडसे खड़े हुए थे.

Morena

मध्य प्रदेश: मुरैना में ज़हरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत, कई बीमार

घटना मुरैना ज़िले के बागचीनी और सुमावली थाना क्षेत्र की है. पुलिस के अनुसार कुछ ग्रामीणों ने सफ़ेद रंग की शराब का सेवन किया, जिसके बाद उनकी तबियत बिगड़ी. मामले में संबंधित थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया है.

(फोटो साभार: यूट्यूब वीडियोग्रैब)

एमपी: सांप्रदायिक झड़प के बाद सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रशासन ने 13 घर आंशिक तौर पर ढहाए

मध्य प्रदेश में इंदौर ज़िले के मुस्लिम बाहुल्य चंदन खेड़ी गांव की घटना. बीते 29 दिसंबर को अयोध्या में राम मंदिर के लिए धन जुटाने के लिए श्रीरामजन्मभूमि निर्माण समिति के बैनर तले रैली के दौरान यहां सांप्रदायिक झड़प हो गई थी. प्रशासन का कहना है कि ये घर सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर बनाए गए थे.

Chhatarpur

मध्य प्रदेश: बिजली बिल जमा न करने पर हुई कुर्की से क्षुब्ध किसान ने आत्महत्या की

छतरपुर ज़िले के 35 वर्षीय मुनेंद्र द्वारा बिजली का बिल भुगतान न करने पर विभाग ने उनकी आटा चक्की और मोटरसाइकिल ज़ब्त कर ली थी. मुनेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उनके मरने के बाद उनका शरीर शासन को दे दिया जाए ताकि उनके अंग बेचकर शासन का कर्ज़ चुक सके.

एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो (फोटो साभारः ट्विटर)

मध्य प्रदेशः एनसीपीसीआर ने सागर के डीएम पर धर्म परिवर्तन की जानकारी दबाने का आरोप लगाया

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक ईसाई संगठन द्वारा चलाए जा रहे बच्चों के छात्रावास में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के मामले पर जानकारी मांगी थी, जिसका जवाब न मिलने पर उसने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर सागर ज़िले के ज़िलाधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा है.

(फोटो सभार: भारतीय रेलवे वेबसाइड)

मध्य प्रदेश: माचिस को लेकर हुए विवाद में दलित व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या

मामला मध्य प्रदेश के गुना ज़िले का है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 50 वर्षीय दलित खेतिहर मज़दूर से दो युवकों ने सिगरेट जलाने के लिए माचिस मांगी थी. माचिस न होने की बात को लेकर कथित तौर पर मृतक का युवकों से विवाद हो गया था.

Betul

एमपी: जिसका घर दिखाकर हुई आवास योजना की वाहवाही, क़र्ज़ में डूबे उस किसान ने ज़हर खाया

मामला बैतूल ज़िले के उड़दन गांव का है. 12 सितंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवासों का वर्चुअल गृह प्रवेश कराया था, जिसमें किसान सुभाष विश्वकर्मा का भी घर शामिल था. अब पता चला है कि उन्होंने यह घर बनाने के लिए काफ़ी क़र्ज़ लिया था.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलें दायर करने में देरी को लेकर सरकारी अधिकारियों से नाख़ुशी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने उसके समक्ष अपीलें दायर करने में सरकारी अधिकारियों द्वारा ‘अत्यधिक देरी’ करने पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक वक़्त बर्बाद करने के लिए ख़ामियाज़ा भरना चाहिए और ये क़ीमत ज़िम्मेदार अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए.