मराठी

श्रीराम लागू. (फोटो साभार: ट्विटर)

प्रख्यात अभिनेता श्रीराम लागू का निधन

कलाकार होने के अलावा प्रशिक्षित ईएनटी सर्जन श्रीराम लागू ने विजय तेंदुलकर, विजय मेहता और अरविंद देशपांडे के साथ आज़ादी के बाद महाराष्ट्र में रंगमंच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

हिंदी सहित छह क्षेत्रीय भाषाओं में अपने फैसले का अनुवाद उपलब्ध कराएगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट हिंदी के अलावा जिन भाषाओं में अपने फैसलों का अनुवाद उपलब्ध कराएगा उनमें असमिया, कन्नड़, मराठी, उड़िया और तेलुगू शामिल हैं.

साहित्यकार नयनतारा सहगल (फाइल फोटो: Wikimedia Commons)

हमें आज़ादी और फासीवाद के बीच चुनाव करने की जरूरत है: नयनतारा सहगल

लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा कि आज हम एक ऐसी स्थिति में हैं जो कि संवैधानिक तौर पर एक लोकतंत्र है लेकिन उसमें तानाशाही के सभी गुण मौजूद हैं.

साहित्यकार नयनतारा सहगल (फाइल फोटो: Wikimedia Commons)

मराठी साहित्य सभा: आयोजकों ने साहित्यकार नयनतारा सहगल को कार्यक्रम में आने से मना किया

यवतमाल में 11 जनवरी से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन अंग्रेज़ी की प्रख्यात लेखिका नयनतारा सहगल को करना था. रविवार को आयोजकों ने ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देते हुए उनका आमंत्रण वापस ले लिया.

फिल्म ठाकरे में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी बाल ठाकरे के किरदार में नज़र आएंगे. (फोटो: यूट्यूब ग्रैब)

ठाकरे फिल्म के ट्रेलर में दक्षिण भारतीयों के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने का आरोप

फिल्म के ट्रेलर में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी द्वारा बोले गए एक संवाद पर दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ ने जताई आपत्ति. सेंसर बोर्ड भी दक्षिण भारतीय लोगों से जुड़े दो डायलॉग और बाबरी मस्जिद से जुड़े एक डायलॉग पर जता चुका है आपत्ति.

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चंद्रकांत देवताले की कविताएं इंसानी तमीज़ की कविताएं हैं

भक्तिकालीन कवियों के बारे में कहा जाता है कि उनकी कविताएं कालजयी इसीलिए हो पाईं क्योंकि वे जीवन के प्राथमिक सच प्यार और मौत के बारे में बात करती हैं. यह आप देवताले की भी कविताओं में देख सकते हैं.

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हिंदी के टूटने से देश की भाषिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी

हमें भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता को अक्षुण्ण रखना है तो हिंदी को टूटने से बचाना होगा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

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‘बोलियों को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग बिल्कुल जायज़ है’

भोजपुरी और हिंदी के प्रमुख भाषा वैज्ञानिक एवं आलोचक डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह बता रहे हैं कि क्यों बोलियों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए.