महात्मा गांधी

वे गांधी की हत्या के इतिहास से डरते हैं, इसलिए इसके सबूतों को मिटाना चाहते हैं: तुषार गांधी

महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने दावा किया है कि नई दिल्ली के बिड़ला भवन स्थित गांधी स्मृति से एक फ्रेंच फोटोग्राफर द्वारा खींची गई महात्मा गांधी के अंतिम समय की तस्वीरों को हटा दिया गया है. गांधी स्मृति के निदेशक का कहना है कि ऐसा नहीं है, बस कुछ तस्वीरों को डिजिटलाइज़ किया गया है.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh (PTI7_16_2017_000260A)

सुप्रीम कोर्ट का महात्मा गांधी को भारत रत्न देने को लेकर दायर याचिका पर विचार करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील से सहमति जताते हुए कहा कि देश की जनता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को किसी औपचारिक सम्मान से परे उच्च सम्मान देती है. सुनवाई से इनकार करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रतिवेदन दे सकते हैं.

सीएए और एनआरसी देश के हर नागरिक के एहसास और आज़ादी का अपमान हैं

जिस नागरिकता क़ानून को गांधी जी और भारतीयों ने आज से 113 साल पहले विदेशी धरती पर नहीं माना, उस औपनिवेशिक सोच से निकले सीएए और एनआरसी को हम आज़ाद भारत में कैसे स्वीकार कर सकते हैं?

हम फूल उगाने वाले हैं, बाग उजाड़ने वाले नहीं…

यह हक़ की लड़ाई है. एक तरफ नफ़रत है और एक तरफ हम. मैं यक़ीन दिलाना चाहता हूं कि हम सही हैं. नफ़रती पूरी कोशिश कर रहे हैं पर हमने भी गांधी जी का दामन थाम रखा है. मैं ये भी यक़ीन दिलाता हूं कि हम जीतेंगे क्योंकि इसके अलावा कोई चारा नहीं है.

मोदी की आलोचना गुनाह है; मोदी के मंत्रियों का राहुल बजाज पर हमला

बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से कहा कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो हम किसी की भी आलोचना कर सकते थे. अब हम अगर आपकी खुले तौर पर आलोचना करें तो यह यकीन नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे. इस बारे में चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

राहुल बजाज ने अमित शाह से कहा- देश में डर का माहौल, लोग आलोचना करने से डरते हैं

बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने इकोनॉमिक टाइम्स के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से कहा कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो हम किसी की भी आलोचना कर सकते थे. अब हम अगर आपकी खुले तौर पर आलोचना करें तो इतना विश्वास नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे.

गांधी का सम्मान करती हूं, मेरी किसी टिप्पणी से ठेस लगी हो तो माफ़ी चाहती हूं: प्रज्ञा ठाकुर

लोकसभा में नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ कहने पर हुए विवाद के बाद भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि उनके बयान को ग़लत तरह से पेश किया गया. इस बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ठाकुर के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज करवाया है.

गोडसे को ‘देशभक्त’ बताने वाला बयान देने के बाद प्रज्ञा ठाकुर संसदीय समिति से बाहर

लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने को भाजपा ने निंदनीय बताते हुए उन्हें रक्षा मंत्रालय की परामर्श समिति से बाहर किए जाने की बात कही. साथ ही बताया कि उन्हें इस सत्र में पार्टी की संसदीय दल की बैठकों में हिस्सा लेने की अनुमति भी नहीं होगी.

लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर ने नाथूराम गोडसे को फिर बताया देशभक्त

एसपीजी संशोधन विधेयक पर हो रही बहस में द्रमुक सांसद ए. राजा नाथूराम गोडसे के एक बयान का संदर्भ दे रहे थे, जब भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि आप एक देशभक्त का उदाहरण नहीं दे सकते.

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

हमारे हित में है आईसीईपी, बाहर रहे तो नहीं आएगी कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी: अरविंद पनगढ़िया

अगस्त 2017 में नीति आयोग से इस्तीफा देने वाले अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि आप आरसीईपी बाहर नहीं रह सकते हैं क्योंकि इसका मतलब होगा कि हम जो भी उन 15 देशों के बाजारों में निर्यात करेंगे उन पर भारी शुल्क लगेगा. वहीं, वे बिना किसी रोक-टोक के अपना सामान निर्यात करेंगे. इससे हमारे निर्यातकों को बहुत नुकसान होगा.

महात्मा गांधी की ओट लेकर आरसीईपी से बाहर रहने का फ़ैसला बहानेबाज़ी जैसा है

दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति होने को लेकर भारत का दावा और शोर-शराबा ज़मीनी हक़ीक़त से मेल नहीं खाता.

क्या सरदार पटेल का सपना वही था, जो भाजपा बता रही है?

‘गांधी के रामराज्य के बारे में तुम क्या जानते हो? गांधी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? वैसे तुलसी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? सावरकर हो या गोलवलकर, उनके हिंदू राष्ट्र का हमारे रामराज्य से क्या लेना-देना?’

सावरकर को भारत रत्न देना आज़ादी के नायकों का अपमान है

क्या ऐसा शख़्स, जिसने अंग्रेज़ सरकार के पास माफ़ीनामे भेजे, जिन्ना से पहले धर्म के आधार पर राष्ट्र बांटने की बात कही, भारत छोड़ो आंदोलन के समय ब्रिटिश सेना में हिंदू युवाओं की भर्ती का अभियान चलाया, भारतीयों के दमन में अंग्रेज़ों का साथ दिया और देश की आज़ादी के अगुआ महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश का सूत्रसंचालन किया, वह किसी भी मायने में भारत रत्न का हक़दार होना चाहिए?

सावरकर ने आज़ादी की लड़ाई में भूमिका निभाई, देश के लिए जेल गए: अभिषेक मनु सिंघवी

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने सावरकर की याद में डाक टिकट जारी किया था.