मिजोरम

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा. (फोटो साभार: एएनआई)

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने कहा, म्यांमार शरणार्थियों के लिए विदेश नीति में बदलाव करे केंद्र

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा का कहना है कि भारत को म्यांमार से आने वाले लोगों के प्रति उदार रवैया रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे अपने एक प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली भेजकर केंद्र सरकार से म्यांमार के शरणार्थियों को वापस न भेजने को लेकर विदेश नीति में बदलाव करने का निवेदन करेंगे.

27 मार्च 2021 को म्यांमार के मांडले में सैन्य तख्तापलट के दौरान विरोध प्रदर्शन में जलते टायर. (फोटो: रॉयटर्स)

म्यांमार में जिस दिन सबसे अधिक लोग मारे गए, उस दिन भारत ने वहां सैन्य परेड में हिस्सा लिया

तख़्तापलट के बाद सैन्य शासन के ख़िलाफ़ म्यांमार में चल रहे प्रदर्शन के दौरान हुए संघर्ष में बीते 27 मार्च को तकरीबन 90 लोगों की मौत हो गई थी. लोकतंत्र समर्थक समूहों ने पूछा है कि दुनिया के सबसे महान लोकतंत्रों में से एक भारत ने क्यों जनरलों से हाथ मिलाने के लिए एक प्रतिनिधि क्यों भेजा, जिनके हाथ हमारे खून से लथपथ हैं.

यंगून में तख्तापलट के खिलाफ नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी का झंडा लेकर प्रदर्शन करते हुए एक प्रदर्शनकारी. (फोटो: रॉयटर्स)

मणिपुर: आलोचना के बाद राज्य सरकार ने वापस लिया म्यांमार शरणार्थियों को रोकने संबंधी आदेश

मणिपुर सरकार द्वारा म्यांमार की सीमा से सटे ज़िलों के उपायुक्तों को 26 मार्च को जारी एक आदेश में सैन्य तख़्तापलट के बाद म्यांमार से भागकर आ रहे शरणार्थियों को आश्रय और खाना देने से इनकार और उन्हें ‘शांतिपूर्वक’ लौटाने की बात कही गई थी. कड़ी आलोचना के बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया.

म्यांमार से भागकर भारत आने वाले वहां के एक पुलिसकर्मी. (फोटो: रॉयटर्स)

मिज़ोरम जातीय समूह ने केंद्र से म्यांमार से आने वालों को शरणार्थी का दर्जा देने की मांग की

भारत, म्यांमार और बांग्लादेश में मौजूद जातीय समूह का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने गृह मंत्रालय से यह भी आग्रह किया कि वह म्यांमार की सीमा से लगे चार पूर्वोत्तर राज्यों- मिज़ोरम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश को उस देश से आने वाले लोगों को रोकने का अपना आदेश वापस ले.

मिजोरम के सीमाई जिले चम्पाई के एक गांव में टीओ नदी पार करते लोग. (फोटो: रॉयटर्स)

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से म्यांमार के नागरिकों को शरण देने की अपील की

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के चलते राज्य में आ रहे वहां के नागरिकों को मानवीय आधार पर शरण देने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है.

(फोटो साभार: ट्विटर/@kushaldebroy)

असम-मिज़ोरम सीमा पर फ़िर हुई हिंसा, असम के हैलाकांडी ज़िले में निषेधाज्ञा लागू

मिज़ोरम के कोलासिब और असम के हैलाकांडी ज़िले में बीते नौ फरवरी की रात हुई झड़प में कई लोग घायल हो गए. पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में भी असम के कछार ज़िले और मिज़ोरम के कोलासिब ज़िले के लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसके बाद सीमा पर तब कई दिन तक तनाव रहा था.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल. (फोटो साभार: फेसबुक/Sarbananda Sonowal)

असम ने कहा, पड़ोसी राज्यों ने इस साल 56 बार उसकी ज़मीन पर अतिक्रमण किया

असम सरकार ने सोमवार को विधानसभा को सूचित किया कि 2020 में अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और मिज़ोरम राज्यों द्वारा भूमि अतिक्रमण की घटनाओं का सामना करना पड़ा. कछार ज़िले से सबसे ज़्यादा 17 मामले सामने आए, जिसमें असम और मिज़ोरम के लोगों के बीच हिंसक झड़पें हुईं और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

जोराम पीपल्स मूवमेंट के अध्यक्ष लालदुहोमा. (फोटो: फेसबुक/जेडपीएम)

मिज़ोरम: दल-बदल क़ानून के तहत अयोग्य होने वाले पहले लोकसभा सांसद विधायक के तौर पर भी अयोग्य हुए

मिज़ोरम की सरछिप सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी लालदुहोमा पर आरोप था कि उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जबकि वह ज़ोराम पीपुल्स मूवमेंट नाम के राजनीतिक दल के शीर्ष नेता थे. वह राज्य के पहले ऐसे विधायक बन गए हैं जिन्हें अयोग्य क़रार दिया गया है.

शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और जेएमसी के सदस्यों के बीच हुई झड़प. (फोटो: पीटीआई)

त्रिपुरा: ब्रू विस्थापन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पर पुलिस की गोलीबारी, दो की मौत

मिज़ोरम से आए ब्रू प्रवासियों को त्रिपुरा में बसाने के विरोध में संयुक्त आंदोलन समिति उत्तरी त्रिपुरा ज़िले के पानीसागर में असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर प्रदर्शन कर रही थी, जब पुलिस ने बल प्रयोग और फायरिंग की. पुलिस का कहना है कि उनकी तरफ से आत्मरक्षा में गोली चलाई गई थी.

New Delhi: Central Bureau of Investigation (CBI) logo at CBI HQ, in New Delhi, Thursday, June 20, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI6_20_2019_000058B)

राज्यों की सहमति के बिना सीबीआई का अधिकारक्षेत्र नहीं बढ़ा सकती केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में विपक्ष शासित आठ राज्य सरकारों द्वारा उनके राज्य में मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई ‘आम सहमति’ वापस ली गई है.

(फोटोः पीटीआई)

त्रिपुराः ब्रू शरणार्थियों ने अनुसूचित जाति और स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की

वर्ष 1997 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान ब्रू समुदाय के 30 हज़ार से अधिक लोग मिज़ोरम छोड़कर त्रिपुरा के कुछ ज़िलों में बस गए थे. वापस मिज़ोरम लौटने से इनके इनकार के बाद त्रिपुरा सरकार ने तकरीबन 33,000 ब्रू लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

असम-मिज़ोरम में सीमा पर गतिरोध बरक़रार, मिज़ोरम में कोई ट्रक प्रवेश नहीं कर पाया

बीते 17 अक्टूबर को असम के कछार ज़िले के लैलापुर गांव और मिज़ोरम के कोलासिब ज़िले के वैरेंगटे गांव के निवासियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसके बाद से दोनों राज्यों में तनाव जारी है. इसी दौरान असम के एक व्यक्ति की मिज़ोरम में कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हो गई.

(फोटो साभार: wikimapia.org)

त्रिपुरा-मिज़ोरम सीमा पर मंदिर निर्माण को लेकर विवाद, धारा 144 लागू

त्रिपुरा-मिज़ोरम सीमा पर जम्पुई हिल्स स्थित फुलडुंगसेई गांव में बन रहे शिव मंदिर को लेकर विवाद हुआ है. त्रिपुरा सरकार का दावा है कि यह गांव उत्तरी त्रिपुरा ज़िले में है, जबकि मिज़ोरम सरकार का कहना है कि यह गांव उसके मामित ज़िले की सीमा में है.

(फोटोः पीटीआई)

त्रिपुरा: ब्रू आदिवासी संगठनों ने कुछ पुनर्वास स्थलों को बदलने की मांग की

1997 में जातीय संघर्ष के बाद मिज़ोरम से 35,000 से अधिक ब्रू आदिवासियों को त्रिपुरा पलायन करना पड़ा था. इन्हें वापस भेजने के लिए जुलाई 2018 में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन यह क्रियान्वित नहीं हो सका, क्योंकि अधिकांश लोगों ने मिज़ोरम वापस जाने से इनकार कर दिया था. अब इन्हें त्रिपुरा में ही बसाए जाने का फैसला लिया गया है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

ब्रू आदिवासियों का पुनर्वास त्रिपुरा के सभी ज़िलों में हो, नहीं तो होगा आंदोलन: संयुक्त समिति

वर्ष 1997 में हुई मिज़ो समुदाय के साथ हुई जातीय हिंसा के बाद ब्रू समुदाय के 35 हज़ार से अधिक लोगों को मिज़ोरम छोड़कर त्रिपुरा पलायन करना पड़ा था. इन्हें वापस मिज़ोरम भेजने की प्रक्रिया लगातार विफल होने के बाद इस साल जनवरी में इन लोगों को त्रिपुरा में ही बसाए जाने का समझौता किया गया है.