मुख्य सूचना आयुक्त

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु. (फोटो साभार: फेसबुक)

‘सूचना आयुक्तों के ख़िलाफ़ जांच के लिए प्रस्तावित समिति सूचना आयोग को ख़त्म करने का षड्यंत्र’

पूर्व सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि यह एक हास्यास्पद प्रस्ताव है, जिन अधिकारियों को सूचना आयुक्तों के निर्देशों का पालन करना होता है, उन्हें सीआईसी के ख़िलाफ़ शिकायतों की जांच करने वाला उच्च प्राधिकार बना दिया गया है. यह उस संस्था को खत्म करने का एक और षड्यंत्रकारी प्रयास है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सूचना आयुक्त की नियुक्ति में पारदर्शिता हो, सिर्फ रिटायर्ड नौकरशाह न भरे जाएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र एवं राज्य के सूचना आयोगों में खाली पदों पर छह महीने के भीतर भर्तियां की जानी चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो और केंद्रीय सूचना आयुक्त का दर्जा केंद्रीय चुनाव आयुक्त के बराबर होना चाहिए.

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, सूचना आयुक्त के पद पर सिर्फ नौकरशाहों की ही नियुक्ति क्यों हुई

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाई गई कमेटी ने 14 नामों को शॉर्टलिस्ट किया था जिसमें से 13 नौकरशाह थे. जिस पर जस्टिस सीकरी ने कहा कि हम नियुक्तियों को दोष नहीं दे रहे हैं. लेकिन गैर-नौकरशाह नाम भी थे, पर उनमें से किसी को भी नियुक्त नहीं किया गया.

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

क्यों मोदी सरकार सूचना आयुक्त पद के लिए नौकरशाहों को तरजीह दे रही है

केंद्रीय सूचना आयोग में हाल ही में नियुक्त चार सूचना आयुक्त पूर्व नौकरशाह हैं. हालांकि आरटीआई क़ानून की धारा 12 (5) बताती है कि सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, संचार मीडिया, प्रशासन या शासन के क्षेत्र से नियुक्त किए जाने चाहिए.

CIC1-1200x359

सीआईसी के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए पांच में से चार उम्मीदवारों ने नहीं किया था आवेदन

सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेज़ों से यह खुलासा हुआ है कि इस पद के लिए आवेदन करने वाले दो वरिष्ठ सूचना आयुक्तों को भी शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया था. हालांकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि आवेदन करने वालों में से ही सर्च कमेटी द्वारा शॉर्टलिस्ट किया जाएगा.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi departs for Tokyo for the Annual Summit with Japan, in New Delhi on November 10, 2016.

सीआईसी के आदेश पर भी विदेश मंत्रालय ने नहीं बताया प्रधानमंत्री के साथ विदेश जाने वालों के नाम

विशेष रिपोर्ट: विदेश मंत्रालय ने द वायर की ओर से दायर आरटीआई के जवाब में कहा कि मांगी गई जानकारी बेहद संवेदनशील है. इससे भारत की संप्रभुता और अखंडता के साथ देश की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों पर प्रभाव पड़ेगा.

Davos: Prime Minister Narendra Modi emplanes for India after attending the World Economic Forum Summit, in Davos on Wednesday. PTI Photo (PTI1_24_2018_000041B)

सीआईसी का आदेश, विदेश दौरों पर प्रधानमंत्री के साथ जाने वाले व्यक्तियों के नाम बताएं

पिछले साल अक्टूबर में कराबी दास नाम के एक शख़्स ने विदेश मंत्रालय से 2015-16 और 2016-17 में प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर हुए ख़र्च और उनके साथ यात्रा करने वालों की जानकारी मांगी थी.

Ministry of Finance PTI

जानबूझकर क़र्ज़ न लौटाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक करें: सीआईसी

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि छोटा-मोटा क़र्ज़ लेने वाले किसानों को बदनाम किया जाता है जबकि 50 करोड़ रुपये से अधिक क़र्ज़ लेकर उसे सही समय पर न लौटाने वालों को क़ाफी मौके दिए जाते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

आधार के लिए नहीं रोकी जाए पेंशन: ईपीएफओ

एक आरटीआई आवेदन पर सुनवाई करते हुए केंद्नीय सूचना आयोग ने भी कहा है कि आधार जोड़ने के नाम पर वरिष्ठ नागरिकों की पेंशन का भुगतान होने में देरी नहीं होनी चाहिए.

फोटो: पीटीआई

प्रधानमंत्री मोदी के आधार कार्ड और मतदाता पहचान-पत्र का ब्यौरा नहीं दिया जा सकता: सूचना आयोग

सूचना का अधिकार कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत निजी सूचना से जुड़ी ऐसी जानकारियां नहीं देने की छूट है जिनका व्यापक जनहित से कोई संबंध नहीं है या जिससे किसी व्यक्ति की निजता में अवांछित दखल होता हो.

Davos: Prime Minister Narendra Modi emplanes for India after attending the World Economic Forum Summit, in Davos on Wednesday. PTI Photo (PTI1_24_2018_000041B)

प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा से संबंधित एयर इंडिया के बिल सार्वजनिक किए जाएं: सीआईसी

मुख्य सूचना आयुक्त ने विदेश मंत्रालय को कहा है कि इन रिकॉर्डों को राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व का बताकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता.

indian-parliament

सूचना आयोग ने छह राजनीतिक दलों के ख़िलाफ़ सुनवाई के लिए बड़ी बेंच गठित की

पार्टियों ने सीआईसी के उस आदेश का पालन नहीं किया जिसमें कहा गया था कि सभी राष्ट्रीय पार्टियां आरटीआई कानून के दायरे में आएं.