मुज़फ्फ़रपुर

प्रतीकात्मक फोटो, साभार: Domi/ Flickr (CC BY-NC 2.0)

बिहार: बलात्कार की कोशिश में असफल रहने पर पड़ोसी ने युवती को लगाई आग

एक अन्य घटना में बिहार के कैमूर जिले में एक विवाहिता के घर में घुसकर उसके मुंह पर रविवार की शाम तेजाब फेंक दिया गया, जिससे महिला गंभीर रूप से ​घायल हो गई.

Bettiah

मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह की पीड़ित के साथ चलती कार में सामूहिक बलात्कार

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह से बचाई गई पीड़िता बेतिया शहर में अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रही थी. पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया.

Muzaffarpur: People take part in a candle light march to protest against the death of children due to Acute Encephalitis Syndrome (AES), in Muzaffarpur, Sunday, June 23, 2019. (PTI Photo) (PTI6_23_2019_000113B)

बिहार: चमकी बुखार से मरने वालों में अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे, 62 फीसदी लड़कियां

बिहार में इस साल एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जिन बच्चों की मौत हुई उनमें से 85 फीसदी से अधिक परिवार दिहाड़ी मजदूर हैं. वहीं, इस साल मरने वाले 168 बच्चों में से 104 लड़कियां थीं.

Muzaffarpur: A woman carrying a child showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) arrives at Shri Krishna Medical College and hospital for treatment, in Muzaffarpur, Sunday, June 16, 2019. With one more death of a child on Sunday morning, the death toll in the district rose to 83 this month. (PTI Photo) (PTI6_16_2019_000043B)

बिहार में इस साल एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी: सरकार

राज्यसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि बिहार में 2018 में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 33 बच्चों की मौत हुई थी, जबकि 2019 में दो जुलाई तक 162 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

बिहार में डॉक्टरों के 57 फीसदी और नर्सों के 71 फीसदी पद खाली

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाख़िल कर ये जानकारी दी. हाल ही में चमकी बुखार के कारण राज्य में 150 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

A relative sits next to a child patient who is suffering from acute encephalitis syndrome at a hospital in Muzaffarpur (Photo: Reuters)

‘सरकार ईमानदारी से काम करे, तो अगले साल इंसेफलाइटिस से एक भी बच्चे की जान नहीं जाएगी’

साक्षात्कार: बिहार में इस साल अब तक एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते मुज़फ़्फ़रपुर व उसके आसपास के ज़िलों में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. यह बीमारी 1995 में सामने आई थी, तब से हर साल बच्चों की मौत हो रही है, कभी कम तो कभी ज़्यादा. इस बीमारी के तमाम पहलुओं को लेकर मुज़फ़्फ़रपुर में साढ़े तीन दशक से काम कर रहे प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण शाह से उमेश कुमार राय की बातचीत.

Relatives visit child patients who suffer from acute encephalitis syndrome at a hospital in Muzaffarpur, in the eastern state of Bihar, India, June 20, 2019. Picture taken on June 20, 2019. REUTERS/Alasdair Pal

बिहार में बच्चों की मौत के लिए प्रशासनिक विफलता व राज्य की उपेक्षा ज़िम्मेदार: डॉक्टरों की टीम

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 150 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. अकेले मुज़फ़्फ़रपुर में तकरीबन 132 बच्चे इस बीमारी से मारे जा चुके हैं.

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नीतीश सरकार ने चमकी बुखार पर शोध, जागरूकता, पुनर्वास के लिए कोई फंड नहीं मांगा

चमकी बुखार या एईएस से बिहार में अब तक क़रीब 150 बच्चों की मौत हो चुकी है. एईएस से निपटने के लिए बिहार सरकार की लापरवाही का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2019-20 के तहत इस पर शोध, पीड़ितों का पुनर्वास और लोगों को जागरूक करने के लिए किसी फंड की मांग नहीं की.

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मीडिया बोल: मुज़फ़्फ़रपुर की मौतें, सत्ता की बेफ़िक्री और मीडिया का मिजाज़

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में चमकी बुखार से हो रही बच्चों की मौतों पर सरकार की बेफ़िक्री और मेनस्ट्रीम मीडिया की स्तरहीन पत्रकारिता पर जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. विकास बाजपेयी और वरिष्ठ पत्रकार बिराज स्वैन से चर्चा कर रहें हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश.

बिहार के हरिवंशपुर गांव में गिरफ्तार किए गए लोगों के रिश्तेदार. (फोटो साभार: एएनआई)

बिहार: चमकी बुखार से बच्चों की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले 39 लोगों पर केस दर्ज

बीते 18 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुज़फ्फ़रपुर दौरे पर जाने के दौरान हरिवंशपुर गांव के लोगों ने चमकी बुखार से बच्चों की मौत और पानी की कमी को लेकर सड़क का घेराव किया था, जिसके चलते पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. नामजदों में क़रीब आधे दर्जन वे लोग हैं जिनके बच्चों की मौत चमकी बुखार से हुई है.

Muzaffarpur: People take part in a candle light march to protest against the death of children due to Acute Encephalitis Syndrome (AES), in Muzaffarpur, Sunday, June 23, 2019. (PTI Photo) (PTI6_23_2019_000113B)

चमकी बुखार: अगर नीतीश सरकार ने समय रहते तैयारी की होती, तो बच्चों की जानें बच सकती थीं

ग्राउंड रिपोर्ट: मुज़फ़्फ़रपुर और आस-पास के जिलों में चमकी बुखार का प्रकोप अप्रैल से शुरू होता है और जून के महीने तक मानसून आने तक बना रहता है. इस लिहाज़ से लोगों को जागरूक करने के लिए और अन्य आवश्यक तैयारियां जनवरी माह से शुरू हो जानी चाहिए थीं लेकिन गांवों में जाने पर जागरूकता अभियान के कोई चिह्न दिखाई नहीं देते.

एईएस बीमारी से अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है.

चमकी बुखार से प्रभावित करीब 75 फीसदी परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं: रिपोर्ट

बिहार सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में ये जानकारी सामने आई है. राज्य में एईएस या चमकी बुखार से अब तक 130 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बिहार सरकार को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सात दिन के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताएं कि उन्होंने इंसेफलाइटिस से हो रहे बच्चों की मौत को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) being treated at a hospital in Muzaffarpur, Saturday, June 15, 2019. Four more children died Friday in Bihar's Muzaffarpur district reeling under an outbreak of brain fever, taking the toll to 57 this month (PTI Photo)(PTI6_15_2019_000045B)

क्यों 25 साल बाद भी हमें नहीं पता कि बच्चों को चमकी बुखार से कैसे बचाया जाए?

वर्ष 1995 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में यह एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम का पहला मामला सामने आने के बाद 25 साल गुज़र गए, इसके बाद भी इस बीमारी के सही कारणों और निदान का पता नहीं चल पाया है.

बिहार के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पीछे पड़े कंकाल. (फोटो साभार: एएनआई)

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में अस्पताल के पीछे मिले मानव कंकाल

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित जिस अस्पताल के पीछे मानव कंकाल मिले हैं, वहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अभी तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है. बिहार में चमकी बुखार से अभी तक करीब 139 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Muzaffarpur: A view of an over-crowded ward with children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) as they undergo treatment at a hospital, in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. The death toll rose to 100 in Muzaffarpur and the adjoining districts in Bihar. (PTI Photo) (PTI6_17_2019_000139B)

बिहार: एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अब त​क 136 की मौत, 16 जिलों में फैला

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में सबसे अधिक अब तक 117 की मौत हुई है. इसके अलावा भागलपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सीतामढ़ी और समस्तीपुर से मौतों के मामले सामने आए हैं.

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बिहार में बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

वीडियो: बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत पर चर्चा कर रही हैं आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) undergoing treatment at Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH), in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. (PTI Photo)(PTI6_17_2019_000049B)

बिहार: इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 115 हुई, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और अश्विनी कुमार चौबे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ मुज़फ़्फ़रपुर की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है.

Muzaffarpur: A woman carrying a child showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) arrives at Shri Krishna Medical College and hospital for treatment, in Muzaffarpur, Sunday, June 16, 2019. With one more death of a child on Sunday morning, the death toll in the district rose to 83 this month. (PTI Photo) (PTI6_16_2019_000043B)

साल दर साल काल के गाल में समाते बच्चे और गाल बजाते नेता

सोमवार को मुज़फ़्फ़रपुर दौरे पर पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कई योजनाओं की घोषणा की, तो उन्हें 2014 में की गई घोषणाओं के बारे में ध्यान दिलाया गया, जिस पर वह असहज हो गए. दरअसल वे पांच साल पूर्व की गई अपनी ही घोषणाएं फिर से दोहरा रहे थे जो अब तक या तो अमल में ही नहीं आ सकी हैं या आधी-अधूरी हैं.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की मौत के बाद जायजा लेने गए सीएम नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी

इंसेफलाइटिस की चपेट में आकर बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के ख़िलाफ़ परिवाद दायर. बिहार में अब तक तकरीबन 120 बच्चों की मौत इंसेफलाइटिस से हो चुकी है.

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क्या है चमकी बुखार, जिसने बिहार में ली सैकड़ों बच्चों की जान

एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम या दिमागी बुख़ार का दायरा बहुत विस्तृत है, जिसमें अनेक संक्रमण शामिल होते हैं और यह बच्चों को प्रभावित करता है. बिहार में पिछले 20 दिनों में इसके 350 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें क़रीब 120 बच्चों की मौत हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

बिहार में बच्चों की मौत पर मानवाधिकार आयोग का स्वास्थ्य मंत्रालय, बिहार सरकार को नोटिस

आयोग ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जापानी इंसेफलाइटिस वायरस, एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम पर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को लागू करने की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है.

एईएस बीमारी से अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है.

बिहार में ‘अज्ञात बुखार’ से करीब 120 बच्चों की मौत, कटघरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 में इस बीमारी के कारण 86 बच्चों की मौत हुई थी. जबकि 2015 में 11, साल 2016 में चार, साल 2017 में चार और साल 2018 में 11 बच्चों की मौत हुई थी.

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुज़फ़्फ़रपुर: बच्चों की मौतों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री पूछते नजर आए कितने विकेट गिरे

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में बीते रविवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी मौजूद थे. इसी दिन भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट वर्ल्ड कप का मैच था.

Bihar AES Muzaffarpur Photo Umesh Ray (6)

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में दिमागी बुखार सहित अज्ञात बीमारी से अब तक 84 बच्चों की मौत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

Bihar Muzaffarpur Photo Umesh Featured

बिहार: बीते पंद्रह दिनों में हुई तक़रीबन 60 बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के मुज़फ्फरपुर में अब तक ‘अज्ञात बुखार’ के चलते करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है और सैंकड़ों बच्चे इससे पीड़ित हैं.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

मुज़फ़्फ़रपुर आश्रय गृह मामला: अदालत ने सीबीआई को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में 31 मई, 2018 को एक बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया था. कुछ बच्चियों के गर्भवती होने की भी पुष्टि हुई थी.

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बालिका गृह में बच्चों से बलात्कार मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/ट्विटर)

बिहार बालिका गृह: सीबीआई ने 11 लड़कियों की हत्या की आशंका जताई

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुज़फ़्फ़रपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसके सहयोगियों ने 11 लड़कियों की कथित रूप से हत्या की थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

बिहारः जेल में महिला कैदियों के यौन शोषण के आरोप के बाद जांच समिति का गठन

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के केंद्रीय कारावास में सज़ा काट चुकी एक महिला ने बीते दिनों प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि जेल में महिला बंदियों को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है और ऐसा न करने पर उनकी बेरहमी से पिटाई की जाती है.

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बालिका गृह में बच्चों से बलात्कार मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/ट्विटर)

बिहार बालिका गृह मामला: मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित 21 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप तय

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर शहर में सेवा संकल्प एवं विकास समिति नाम के एनजीओ द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों के साथ पिछले साल यौन शोषण का मामला सामने आया था. एनजीओ का संचालक ब्रजेश ठाकुर मुख्य आरोपी है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: Flickr/CC BY NC ND 2.0)

बिहारः पुलिस हिरासत में दो युवकों की मौत, पांच पुलिसकर्मी निलंबित

बिहार के सीतामढ़ी जिले का मामला. हत्या और लूट के मामले में गिरफ़्तार किए गए गुफ़रान आलम और तसलीम अंसारी नामक युवकों के शरीर पर कीलों से बने घाव के निशान मिले.

(फोटो साभार: ट्विटर)

बिहारः मोकामा शेल्टर होम से सात लड़कियां लापता, मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले की पीड़िताएं भी शामिल

एक पुलिस अधिकारी ने शेल्टर होम प्रबंधन पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने गुपचुप तरीके से काम किया है. उन्होंने कहा कि सरकार की महिला प्रतिनिधियों को भी लड़कियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही.

नीतीश कुमार (फाइल फोटो: पीटीआई)

बिहार बालिका गृह: नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ जांच के आदेश की ख़बर झूठी निकली

बीते शनिवार को एक न्यूज़ एजेंसी द्वारा ख़बर प्रसारित की गई थी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ मुज़फ़्फ़रपुर बालिका आश्रय गृह यौन शोषण मामले में सीबीआई को जांच का आदेश दिया गया है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar during a prayer meeting for former defence minister George Fernandes, in Patna, Friday, Feb 8, 2019. (PTI Photo) (PTI2_8_2019_000136B)

बिहार बालिका गृह: सीबीआई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ जांच करने का आदेश

नोट: ये ख़बर समाचार एजेंसी भाषा की ओर से गलती से जारी कर दी गई थी. पाठकों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है.

एम नागेश्वर राव, (फोटो साभार: फ़ेसबुक)

बिहार बालिका गृह: नागेश्वर राव अवमानना के दोषी, कार्यवाही पूरी होने तक कोर्ट में बैठने की सज़ा

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव का बचाव किए जाने पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि पिछले 20 सालों में मैंने अवमानना के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया और किसी को भी सज़ा नहीं दी. लेकिन यह तो हद है.

एम. नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार बालिका गृह: अधिकारी का तबादला करने पर नागेश्वर राव ने सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी मांगी

शीर्ष अदालत की फटकार के बाद सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने माफ़ी मांगते हुए कहा कि अदालत के आदेश का उल्लंघन करने की सोच भी नहीं सकता.

एम. नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार बालिका गृह: सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के लिए सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक को किया तलब

बिहार बालिका गृह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच करने वाली टीम का तबादला नहीं होना चाहिए. गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम अवमानना को बहुत ही गंभीरता से लेने जा रहे हैं. आपने देश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है. भगवान आपको बचाए.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

बिहार बालिका गृह: सुप्रीम कोर्ट की राज्य सरकार को फटकार, कहा- बहुत हुआ, बच्चों को बख़्श दें

सुप्रीम कोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर आश्रय गृह मामले की सुनवाई पटना से दिल्ली स्थानांतरित करने का आदेश दिया. सरकार से कहा, ‘हमें यह जानने का अधिकार है कि आप सरकार कैसे चला रहे हैं.’

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

नीतीश सरकार से नाराज़ सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी 16 आश्रयगृहों में यौन शोषण मामलों की जांच

सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने शीर्ष अदालत से मांग की कि मामला सीबीआई को न देते हुए उसे एक मौका और मिलना चाहिए, जिसे ठुकराते हुए अदालत ने कहा कि सरकार ने अपना काम ठीक से नहीं किया.

Patna: Former Bihar Social Welfare Minister Manju Verma addresses a press after resigning over allegations against her husband, who is accused of his links with the Muzaffarpur shelter rape case, in Patna on Wednesday, Aug 8, 2018. (PTI Photo) (PTI8_8_2018_000218B)

बिहार बालिका गृह मामला: पूर्व मंत्री मंजू वर्मा ने अदालत में आत्मसमर्पण किया

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बीते हफ्ते बिहार पुलिस ने मंजू वर्मा के बेगूसराय स्थित घर के बाहर संपत्ति जब्त करने का नोटिस लगाया था, जिसके बाद मंजू वर्मा ने मंगलवार को स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण किया.