मैला ढोने की प्रथा

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्ली जल बोर्ड के सीवर की सफाई के दौरान एक व्यक्ति की मौत

पीड़ित की पहचान बिहार में कटिहार के निवासी डूमन राय के रूप में हुई है. जहांगीरपुरी इलाके में हुई घटना के संबंध में सुपरवाइज़र गिरफ़्तार.

(फोटो: जाह्नवी सेन/द वायर)

क्या सरकार मैला ढोने वालों की संख्या जानबूझकर कम बता रही है?

केंद्र के अधीन काम करने वाली संस्था नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने बताया कि 163 ज़िलों में कराए गए सर्वे में 20,000 लोगों की पहचान मैला ढोने वालों के तौर पर हुई है. हालांकि संस्था ने ये आंकड़ा नहीं बताया कि कितने लोगों ने दावा किया था कि वे मैला ढोने के काम में लगे हुए हैं.

Sewer Death

सीवर सफाई के दौरान मौत: ज़्यादातर मामलों में न तो एफआईआर दर्ज और न ही मुआवज़ा मिला

मैला ढोने की प्रथा खत्म करने के लिए काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था राष्ट्रीय ग्रामीण अभियान द्वारा 11 राज्यों में कराए गए सर्वेक्षण से ये जानकारी सामने आई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई/शमीम क़ुरैशी)

स्वच्छता अभियान: सरकार को नहीं पता सीवर सफाई के दौरान कितनों की गई जान, कितनों को मिला मुआवज़ा

विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के पास यह जानकारी भी नहीं है कि देश में कुल कितने सफाईकर्मी हैं. 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1993 से लेकर अब तक सीवर में दम घुटने की वजह हुई मौतों और मृतकों के परिवारों की पहचान कर उन्हें 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया था.

manual-scavenger Jahnavi The Wire2

मोदी सरकार ने चार साल में मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए एक रुपया भी जारी नहीं किया

विशेष रिपोर्ट: आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए कोई राशि जारी नहीं की गई है. इससे पहले आखिरी बार 2013-14 यानी यूपीए कार्यकाल में जारी 55 करोड़ रुपये में से 24 करोड़ रुपये अभी तक खर्च नहीं हुए हैं.

बेज़वाड़ा विल्सन. (फोटो साभार: Development Dialogue/Facebook)

सीवर में श्रमिकों की मौत असल में सरकार और ठेकेदारों द्वारा की गई हत्याएं हैं: बेज़वाड़ा विल्सन

देश में मैला ढोने वाले सफाई कर्मचारियों की स्थिति पर सफाई कर्मचारी आंदोलन के समन्वयक मैगसेसे पुरस्कार विजेता बेज़वाड़ा विल्सन का नज़रिया.

(फोटो: जाह्नवी सेन/द वायर)

‘जब तक जातिवाद का सफाया नहीं होगा तब तक स्वच्छ भारत की बात भी कैसे हो सकती है’

वीडियो: मैला ढोने के कार्य से जुड़े श्रमिकों की वर्तमान स्थिति और पुनर्वास पर सफाई कर्मचारी आंदोलन के समन्वयक और मैगसेसे पुरस्कार विजेता बेज़वाड़ा विल्सन से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

Manual Scavenging Reuters

मैला ढोने की प्रथा को गंभीरता से ले मंत्रालय: संसदीय समिति

संसद की एक समिति ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को फटकार लगाते हुए कहा है कि मैला ढोने के काम में लगे लोगों के पुनर्वास हेतु स्व-रोजगार योजना का बजट आवंटन बढ़ाया जाए.

scavenging1

क्यों कानून बनने के 24 साल बाद भी मैला ढोने की प्रथा समाप्त नहीं हुई?

मैला ढोने के कार्य से जुड़े श्रमिकों के पुनर्वास के लिए स्व-रोजगार योजना के पहले के वर्षों में 100 करोड़ रुपए के आसपास आवंटित किया गया था, जबकि 2014-15 और 2015-16 में इस योजना पर कोई भी व्यय नहीं हुआ.