मोदी सरकार

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या कोवैक्सीन को मिली मंज़ूरी पहले टीका लेने वालों के लिए इधर कुआं-उधर खाई वाली स्थिति है

कोवैक्सीन को लेकर जानकारियों/आंकड़ों पर गोपनीयता का पर्दा पड़ा हुआ है और हम एक ऐसी मुश्किल स्थिति में हैं, जिसमें कम से कम कुछ लोगों के पास वैक्सीन लेने के अलावा शायद और कोई विकल्प नहीं है, भले ही उनके मन में अपनी सलामती को लेकर कितना ही संदेह क्यों न हो.

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किसान आंदोलन का एक अहम पड़ाव ‘बस्ताड़ा’ टोल प्लाज़ा

वीडियो: पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को जोड़ने वाले राजमार्ग पर एक टोल प्लाज़ा अब एक नई विरोध स्थल और किसानों की यात्रा के लिए एक विश्राम स्थल में बदल गया है. इसे बस्ताड़ा टोल प्लाज़ा के नाम से जाना जाता है.

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मीडिया बोल: किसान आंदोलन के ख़िलाफ़ क्यों जुटे हैं टीवी चैनल

वीडियो: किसानों और उनके आंदोलन के ख़िलाफ़ सिर्फ सरकारी एजेंसियां ही अभियान नहीं चला रही हैं, टीवी चैनलों के ज़रिये उनकी छवि बिगाड़ने और देश विरोधी बताने के लिए झूठी कहानियां चलाई जा रही हैं. इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह और पंजाब के स्वतंत्र पत्रकार शिव इंदर सिंह से उर्मिलेश की बातचीत.

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कोरोना वैक्सीन से जुड़े अहम सवाल, जिन्हें पूछा जाना चाहिए

वीडियो: बीते दिनों भारत के औषध महानियंत्रक यानी डीसीजीआई ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके कोविशील्ड और भारत बायोटेक द्वारा विकसित टीके कोवैक्सीन को देश में सीमित आपात इस्तेमाल की मंज़ूरी दी है. हालांकि इनको लेकर उठे सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.

सुखबीर सिंह बादल. (फोटो: पीटीआई)

किसानों को डराने के लिए एनआईए का इस्तेमाल कर रही है केंद्र सरकार: विपक्ष

किसान आंदोलन में शामिल कई लोगों को एनआईए का समन मिलने के बाद कांग्रेस और अकाली दल ने केंद्र की आलोचना की है. सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जब खालसा एड ने गुजरात में सहायता की, तब सरकार को उसमें कुछ ग़लत नहीं लगा पर अब किसानों की मदद करने वालों के पीछे एनआईए लगा दिया गया.

भाजपा सांसद हेमा मालिनी. (फोटो: पीटीआई)

हेमा मालिनी पंजाब आकर कृषि क़ानून समझाएं, आने-जाने-रहने का ख़र्च हम उठाएंगे: किसान संगठन

मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के आंदोलन को लेकर कहा था कि किसानों को पता नहीं है कि वे क्या चाहते हैं क्योंकि उनके पास कोई एजेंडा नहीं है. उन्हें विपक्षी दलों द्वारा अपने हितों को साधने के लिए भड़काया जा रहा है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

ट्रैक्टर रैली रोकने की याचिका पर कोर्ट ने कहा- पुलिस अपनी शक्तियां प्रयोग करने को स्वतंत्र

किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली या गणतंत्र दिवस समारोहों को बाधित करने की कोशिश करने के अन्य प्रदर्शनों पर रोक लगाने की केंद्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह क़ानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और फ़ैसला लेने का पहला हक़ पुलिस को है कि राष्ट्रीय राजधानी में किसे प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए.

Amritsar: Farmers raise slogans during a protest in support of the nationwide strike, called by farmer unions to press for repeal of the Centres Agri laws, in Amritsar, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo)(PTI08-12-2020 000197B)

पंजाब: कृषि क़ानूनों के विरोध में भाजपा के दस वरिष्ठ नेता अकाली दल में शामिल

शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए नेताओं ने कहा कि उन्होंने पहले ही भाजपा को चेतावनी दी थी कि वे किसान विरोधी कृषि क़ानून वापस लें, लेकिन ऐसा करने के बजाय उल्टा क़ानूनों का समर्थन करने को कहा गया.

(फोटो: पीटीआई)

आवेदक की प्रामाणिकता के लिए आरटीआई के तहत मक़सद बताना ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी आरटीआई एक्ट के उस प्रावधान के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कहा गया है कि सूचना मांगने के लिए आवेदक को कोई कारण बताने की ज़रूरत नहीं है.

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन: किसान नेता के बाद कार्यकर्ता और टीवी पत्रकार को मिला एनआईए का समन

पिछले कुछ दिनों में एनआईए द्वारा कम से कम 13 लोगों को नोटिस भेजा गया है. इनमें किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, पंजाबी अभिनेता और कार्यकर्ता दीप सिंधू, पंजाब के एक टीवी पत्रकार जसबीर सिंह और कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह शामिल हैं.

कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे बलदेव सिंह सिरसा (पीली पगड़ी में). (फोटो: फेसबुक)

कृषि क़ानून: एनआईए ने प्रदर्शनकारी नेता को समन भेजा, नेता बोले- आंदोलन पटरी से उतारने की साज़िश

कृषि क़ानूनों को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक संगठन के प्रमुख बलदेव सिंह सिरसा को एनआईए ने प्रतिबंधित सिख्स फॉर जस्टिस के एक नेता के ख़िलाफ़ दर्ज मामले में समन भेजा है. सिरसा ने कहा कि पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ज़रिये आंदोलन पटरी से उतारने की कोशिश की, अब वह एनआईए का उपयोग कर रही है.

(फोटो: पीटीआई)

सरकार के साथ किसानों की नौवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा, अगली बैठक 19 जनवरी को

किसान संगठनों ने कहा कि वे गतिरोध को दूर करने के लिए सीधी वार्ता जारी रखने को प्रतिबद्ध हैं. दूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नौवें दौर की वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका. उन्होंने उम्मीद जताई कि 19 जनवरी को होने वाली बैठक में किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है.

बलबीर सिंह राजेवाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

आंदोलन को बदनाम करने के लिए फ़ैलाई जा रहीं अफ़वाहों पर विश्वास न करें किसान: बीकेयू नेता

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू राजेवाल) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों को खुला पत्र लिखकर कहा है कि किसानों की 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड के बारे में अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं. कुछ किसान विरोधी ताकतें उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को नाकाम करने में शिद्दत से जुटी हैं.

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‘हमें नए कृषि क़ानून की ज़रूरत नहीं, पहले बुंदेलखंड पैकेज से बनीं मंडियों को शुरू कराए सरकार’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी में बुंदेलखंड के सात ज़िलों में किसानों को कृषि बाज़ार मुहैया करवाने के उद्देश्य से 625.33 करोड़ रुपये ख़र्च कर ज़िला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कुल 138 मंडियां बनाई गई थीं. पर आज अधिकतर मंडियों में कोई ख़रीद-बिक्री नहीं होती, परिसरों में जंग लगे ताले लटक रहे हैं और स्थानीय किसान परेशान हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर किसान: क़ानून पर रोक नहीं, पूरा क़ानून वापस चाहिए

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए कृषि क़ानून पर रोक लगाए जाने के साथ चार सदस्यीय टीम गठित की गई है. इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारी किसानों से द वायर की बातचीत.