मौत की सज़ा

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

अदालतों ने मौत की सज़ा के अधिकतर फ़ैसले ‘समाज के सामूहिक विवेक’ के आधार पर लिए: रिपोर्ट

अपराध सुधार के लिए काम करने वाले एक समूह के अध्ययन में सामने आया है कि दिल्ली की निचली अदालतों द्वारा साल 2000 से 2015 तक दिए गए मृत्युदंड के 72 फीसदी फ़ैसले समाज के सामूहिक विवेक को ध्यान में रखते हुए लिए गए थे.

A portrait of Wall Street Journal reporter Daniel Pearl stands at the altar of St. Bride's Church prior to a memorial service in London on March 5, 2002. A Pakistani court overturned the convictions of four men in Pearl's murder on April 2, 2020. (Reuters/Ian Waldie)

पाकिस्तान: अमेरिकी पत्रकार के माता-पिता आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

अमेरिकी अखबार ‘द वाल स्ट्रीट जर्नल’ के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख 38 वर्षीय डेनियल पर्ल का 2002 में अपहरण कर लिया गया था और उनकी हत्या कर दी गई थी. उस वक्त वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और अल कायदा के बीच कथित संबंधों के बारे में एक खबर के लिये छानबीन कर रहे थे.

A portrait of Wall Street Journal reporter Daniel Pearl stands at the altar of St. Bride's Church prior to a memorial service in London on March 5, 2002. A Pakistani court overturned the convictions of four men in Pearl's murder on April 2, 2020. (Reuters/Ian Waldie)

अमेरिका ने पत्रकार डेनियल पर्ल हत्याकांड के दोषी की मौत की सज़ा को क़ैद में बदलने की आलोचना की

अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख 38 वर्षीय डेनियल पर्ल को 2002 में कराची से अगवा कर लिया गया था और उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी.

डेनियल पर्ल. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

पाकिस्तान: अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के मुख्य आरोपी की मौत की सज़ा क़ैद में बदली

अमेरिकी नागरिक और वॉल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशियाई क्षेत्र के ब्यूरो प्रमुख डेनियल पर्ल का साल 2002 में पाकिस्तान के कराची शहर से अपहरण करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी.

(फोटो: रॉयटर्स)​​​

गुजरात दंगा: सरदारपुरा नरसंहार मामले में दोषी क़रार 14 लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत दी

गोधरा ट्रेन नरसंहार के अगले दिन 28 फरवरी 2002 की रात को सरदारपुरा गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के 33 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था, जिसमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे.

Students shout slogans during a protest against the alleged rape and murder of a 27-year-old woman, in Kolkata, India, December 2, 2019. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

देश में असुरक्षित महिलाएं और नेताओं के बिगड़े बोल

महिलाओं की सुरक्षा की चिंता और उनको हिंसा, बलात्कार आदि से बचाने को लेकर कड़े क़ानून बनाने का नेताओं का आश्वासन उनके दिए महिला-विरोधी बयानों के बरक्स बौना नज़र आता है.

Mumbai: Students display placards during a demonstration over rape incidents in the view of the recent rape and murder of Hyderabad veterinarian, at Labaug in Mumbai, Sunday, Dec. 1, 2019. (PTI Photo)  (PTI12_1_2019_000127B)

वे सात कारण, जो बताते हैं कि बलात्कार के मामले में मौत की सज़ा क्यों कारगर नहीं है

भारत जैसे देश में, जहां बलात्कार के मामलों में अदालत की सुनवाई आरोपी के बजाय पीड़ित के लिए ज्यादा मुश्किल भरी होती हैं, वहां कुछ चर्चित मामलों में सज़ा कड़ी कर देने से किसी और को ऐसा करने से रोकना मुश्किल है. ऐसे अधिकतर मामले या तो अदालतों की फाइलों में दबे पड़े हैं या सबूतों के अभाव में ख़ारिज कर दिए जाते हैं.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से जेल में बंद छह लोगों को 10 साल बाद ठहराया बेगुनाह

सुप्रीम कोर्ट ने एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या और महिला एवं उसकी बेटी से बलात्कार के मामले में अपने दस साल पुराने फैसले को पलटा. कोर्ट ने कहा कि जेल में बंद लोग घुमंतू समुदाय से थे और उनको गलत तरीफे से फंसाया गया था.

गोधरा स्टेशन. ​​(फोटो साभार: India Rail Info)

गुजरात सरकार ने गोधरा रेल नरसंहार के 17 साल बाद किया मुआवज़े का ऐलान

गोधरा रेलवे स्टेशन पर 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच को आग लगा दी गई थी. इसमें 59 लोगों की जान गई थी, जिनमें से सात लोगों की अब तक शिनाख्त नहीं हो पाई. इस घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगा भड़क उठा था.

Hansraj Ahir PTI

सरकार मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ मौत की सज़ा के प्रावधान वाला विधेयक लाएगी: हंसराज अहीर

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा, पीट-पीटकर हत्या करना एक बर्बर अपराध है. कोई भी सभ्य समाज इसे स्वीकार नहीं कर सकता. केंद्र सरकार इस मामले में मौत की सज़ा का प्रस्ताव वाला विधेयक शीघ्र पेश करेगी.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 131: नरेंद्र मोदी और मौत की सज़ा

जन गण मन की बात की 131वीं कड़ी में विनोद दुआ, नरेंद्र मोदी का वि​कल्प न होने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौत की सज़ा को लेकर सरकार से जवाब मांगने पर चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: रॉयटर्स

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा के तरीक़े पर सरकार से मांगा जवाब

याचिका में दी गई दलील, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि क़ैदी की सज़ा पर सम्मानजनक अमल हो ताकि मृत्यु कम पीड़ादायक हो.

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भारत में पिछले साल मौत की सज़ा के मामलों में 81 फीसदी की बढ़ोतरी: एमनेस्टी

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में एक भी शख़्स की सज़ा पर अमल नहीं हुआ. ऐसे 400 कैदी जेलों में बंद हैं जिनकी मौत की सज़ा पर इस साल के अंत तक अमल होना है.