यूपी सरकार

उत्तर प्रदेश: यूएपीए के तहत जेल में बंद पत्रकार सिद्दीक कप्पन की मां का निधन

यूपी पुलिस ने पिछले अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था, जिसके बाद उन पर शांतिभंग और यूएपीए के तहत मामले दर्ज किए गए थे. इसी हफ्ते मथुरा की स्थानीय अदालत ने इन सभी को शांतिभंग के आरोपों से मुक्त किया है.

हाथरस मामलाः पत्रकार कप्पन, तीन अन्य के ख़िलाफ़ शांति भंग के आरोप रद्द

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले साल पांच अक्टूबर को हाथरस जाने के रास्ते में केरल के एक पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था. उन पर आरोप लगाया था कि हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के मद्देनज़र सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे. यूपी सरकार ने दावा किया था कि कप्पन पत्रकार नहीं, बल्कि अतिवादी संगठन पीएफआई के सदस्य हैं.

गोरखपुर: गोरखनाथ मंदिर से सटे घरों को हस्तानांतरित करने की प्रक्रिया असाधारण

वीडियो: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर से लगे क़रीब एक दर्जन घरों को हटाकर वहां कथित तौर पर मंदिर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुलिस बलों की तैनाती को लेकर हंगामा मचा हुआ है. प्रभावित परिवारों का आरोप है कि दबाव में उनसे सहमति पत्र पर दस्तख़त करवाए गए, जबकि प्रशासन का दावा है कि सभी ने बिना दबाव के हस्ताक्षर किए हैं. इस मुद्दे पर गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक मनोज सिंह से मुकुल सिंह चौहान की बातचीत.

योगी सरकार का पूर्व आईपीएस अफ़सर की अनिवार्य सेवानिवृत्ति संबंधी दस्तावेज़ देने से इनकार

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को गृह मंत्रालय द्वारा बीते 23 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृति दी गई थी. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इससे संबंधित दस्तावेज़ देने से मना कर दिया है. ठाकुर ने कहा है कि सरकार द्वारा मनमाने ढंग से उन्हें सेवा से निकाला जाना और अब उनकी जीविका से संबंधित सूचना भी नहीं देना दुखद है तथा सरकार की ग़लत मंशा को दिखाता है.

गोरखपुर में मुस्लिम परिवारों पर घर ख़ाली करने का योगी सरकार का दबाव

वीडियो: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर के आसपास के एक दर्जन से अधिक घरों को हटाकर कथित तौर पर मंदिर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुलिस बलों की तैनाती को लेकर वहां हंगामा मचा हुआ है. प्रभावित परिवारों का आरोप है कि दबाव में उनसे सहमति पत्र पर दस्तख़त करवाए गए और पूरी जानकारी नहीं दी गई. वहीं, प्रशासन का दावा है कि सभी परिवारों ने बिना दबाव के हस्ताक्षर किए हैं. मुकुल सिंह चौहान और सेराज अली की रिपोर्ट.

उत्तर प्रदेश: क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोशल मीडिया टीम में फूट पड़ चुकी है?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में ट्वीट करने को लेकर हाल ही में एक कथित ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें ऐसा ट्वीट करने पर दो रुपये प्रति ट्वीट की दर से मिलने की बात की जा रही है. इस घटना के तुरंत बाद यूपी सरकार के सोशल मीडिया प्रमुख ने इस्तीफा दे दिया. इससे पहले इसी टीम के एक कर्मचारी ने मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी.

उत्तर प्रदेशः यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में रामदेव, योगी आदित्यनाथ की किताबें शामिल

मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के दर्शनशास्त्र पाठ्यक्रम में रामदेव की योग चिकित्सा रहस्य सहित चुनिंदा किताबों को शामिल किया गया है. यह किताब बीमारी से लड़ने में योग के महत्व पर है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किताब हठयोगः स्वरूप एवं साधना भी पाठ्यक्रम में शामिल की गई है.

कोविड-19: हाशिये पर रहने वालों की लड़ाई सिर्फ बीमारी से नहीं है…

कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के दौरान दवा, ऑक्सीजन आदि की कमी जानलेवा साबित हो रही है, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे अस्पताल की चौखट और इलाज तक सहज पहुंच भी मयस्सर नहीं है.

कोविड संकट: आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना

इस कठिन वक़्त में सरकारों की काहिली तो अपनी जगह पर है ही, लोगों का आदमियत से परे होते जाना भी पीड़ितों की तकलीफों में कई गुनी वृद्धि कर रहा है. इसके चलते एक और बड़ा सवाल विकट होकर सामने आ गया है कि क्या इस महामारी के जाते-जाते हम इंसान भी रह जाएंगे?

वैक्सीन नीति पर पुनर्विचार को लेकर केंद्र ने कहा- इसमें अदालत के हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं

बीते 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिस तरह से केंद्र सरकार की वर्तमान वैक्सीन नीति को बनाया गया है, इससे प्रथमदृष्टया जनता के स्वास्थ्य के अधिकार को क्षति पहुंचेगी, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न तत्व है. सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीन निर्माता कंपनियों द्वारा अलग-अलग कीमत तय करने के संबंध में केंद्र से जानकारी मांगी थी.

केंद्र की कोविड वैक्सीन नीति जैसी बनाई गई है, उससे स्वास्थ्य के अधिकार को क्षति पहुंचेगी: कोर्ट

शीर्ष अदालत ने कहा कि विभिन्न वर्गों के नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता है, जो समान हालात का सामना कर रहे हैं. केंद्र सरकार 45 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी के लिए मुफ़्ते कोविड टीके प्रदान करने का भार वहन करेगी, राज्य सरकारें 18 से 44 आयु वर्ग की ज़िम्मेदारी का निर्वहन करेंगी, ऐसी शर्तों पर बातचीत कर सकते हैं. केंद्र को अपनी मौजूदा टीका नीति पर फिर से ग़ौर करना चाहिए.

13 विपक्षी नेताओं ने केंद्र से बड़े पैमाने पर मुफ़्त टीकाकरण अभियान शुरू करने की मांग की

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 13 दलों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि केंद्र सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें.

कोविड: सुप्रीम कोर्ट ने चेताया, इंटरनेट पर मदद मांग रहे लोगों पर कोई रोक नहीं लगा सकते

कोविड-19 प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर लोगों से मदद के आह्वान सहित सूचना के स्वतंत्र प्रवाह को रोकने के किसी भी प्रयास को न्यायालय की अवमानना माना जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को आदेश, केरल के पत्रकार को इलाज के लिए बाहर भेजा जाए

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को यूएपीए के आरोपों के तहत गिरफ़्तार केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश देते हुए कहा कि एक विचाराधीन क़ैदी को भी जीने का अधिकार है.

राष्ट्रीय संकट पर मूकदर्शक बने नहीं रह सकते, हाईकोर्ट को दबाने का उद्देश्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

कोविड-19 मामलों में बेतहाशा वृद्धि को ‘राष्ट्रीय संकट’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर महामारी की स्थिति पर नज़र रखने के लिए बेहतर स्थिति में है और सुप्रीम कोर्ट पूरक भूमिका निभा रहा है तथा उसके ‘हस्तक्षेप को सही परिप्रेक्ष्य में समझना चाहिए’ क्योंकि कुछ मामले क्षेत्रीय सीमाओं से भी आगे हैं.