यौन हिंसा

भारतीय सुप्रीम कोर्ट (फोटो: रायटर्स)

निर्भया कोष से केवल 5 से 10 फीसद पीड़ितों को ही मुआवज़ा मिला: नालसा

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह चौंकाने वाला है कि आंध्र प्रदेश में 2017 में यौन हिंसा के 901 मामले दर्ज हुए परंतु सिर्फ एक ही पीड़ित को मुआवज़ा मिल सका.

A girl in Kochi, in the south-western state of Kerala, protests against the rape in Kathua, near Jammu, northern India. Photograph: Sivaram V/Reuters

बच्चे यौन हिंसा नहीं बल्कि यौनिक युद्ध का सामना कर रहे हैं, वे न घर में सुरक्षित हैं और न बाहर

विकास के दावों के बीच भारत के अनुभव और ज़मीनी सच्चाई बता रही है कि समाज और सरकारें बच्चों का संरक्षण सुनिश्चित कर पाने में तो नाकाम हैं ही आगे भी इनके नाकाम रहने की आशंका है.

फाइल फोटो: पीटीआई

पीड़िता के बयान दर्ज़ होने तक नहीं होगी आसाराम की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई

आसाराम की ज़मानत याचिका पर सुनवाई नौ हफ़्तों तक स्थगित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निचली अदालत में पीड़िताओं के बयान दर्ज़ होने बाद होगा इस पर विचार.

आसाराम. ​​(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और राजस्थान सरकार से आसाराम के ख़िलाफ़ केस की प्रगति रिपोर्ट मांगी

सूरत की रहने वाली दो बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साई पर बलात्कार करने और ग़ैरक़ानूनी तरीके से उन्हें बंधक बनाने के आरोप लगाए हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से मांगा निर्भया कोष के तहत जमा धन का विवरण

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 4 माह के अंदर कोष को मिले धन और उससे हुए वितरण की जानकारी देने का निर्देश दिया है.

Partners of law in development Rape survivors

‘बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच में दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाता’

बलात्कार के मामलों में 2013 के संशोधन के बाद होने वाली कार्यवाही में बहुत हद तक सुधार हुआ है लेकिन अब भी पीड़ित को उत्पीड़न सहना पड़ता है.

फोटो: रायटर्स

आसाराम के ख़िलाफ़ बलात्कार मामले की धीमी जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार पर उठाए सवाल

सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उनके पुत्र नारायण साई के ख़िलाफ़ बलात्कार और ग़ैरक़ानूनी तरीके से बंधक बनाने सहित कई आरोप लगाए थे.

तिहाड़ जेल दिल्ली (फोटो: रायटर्स)

‘जेल की स्थिति समाज से भी बदतर है इसलिए वहां से निकला हुआ व्यक्ति और बड़ा अपराधी बन जाता है’

हिरासत में होने वाली हिंसा और जेलों की स्थिति पर सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा और वर्णन गोंसाल्विस से बातचीत.