रंगमंच

Kader Khan Twitter

क़ादिर ख़ान: जिन्हें लेकर अपनी-अपनी ग़लतफ़हमियां हैं

क़ादिर ख़ान हिंदी सिनेमा में उस पीढ़ी के आख़िरी लेखक थे, जिन्हें आम लोगों की भाषा और साहित्य की अहमियत का एहसास था. उनकी लिखी फिल्मों को देखते हुए दर्शकों को यह पता भी नहीं चलता था कि इस सहज संवाद में उन्होंने ग़ालिब जैसे शायर की मदद ली और स्क्रीनप्ले में यथार्थ के साथ शायरी वाली कल्पना का भी ख़याल रखा.

कादर ख़ान. (फोटो साभार: ट्विटर)

परदे की भूमिकाओं से कहीं बड़ी थी कादर ख़ान की शख़्सियत

वे एक साहित्यिक व्यक्ति थे- जो विश्व साहित्य की क्लासिक रचनाओं के साथ सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते थे और उन पर पूरे उत्साह से चर्चा करते थे.

Habib Tanveer

जब बलराज साहनी ने हबीब तनवीर को तमाचा मारा था…

हबीब तनवीर की जितनी थियेटर पर पकड़ थी, उतनी ही मज़बूत पकड़ समाज, सत्ता और राजनीति पर थी. वे रंगमंच को एक पॉलिटिकल टूल मानते थे. उनका कहना था कि समाज और सत्ता से कटकर किसी क्षेत्र को नहीं देखा जा सकता.

madeeha-gauhar wikipedia

मदीहा गौहर: हैवानियत के दौर में इंसानियत की जीती-जागती मिसाल

मदीहा हिंदुस्तान-पाकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत के बीच रंगमंच के साझे दूत की तरह काम करती रहीं. रहती वे लाहौर में थीं लेकिन जब मौका मिलता अमृतसर आ जाया करती थीं. देह उनकी लाहौर में थी लेकिन दिल अमृतसर में बसता.

pankaj tripathi

हमें किसी ने ब्रेक नहीं दिया, हम एक-एक सीन टपकते-टपकते इकट्ठा हो गए: पंकज त्रिपाठी

पंकज त्रिपाठी जब बिहार के छोटे से गांव से पटना पहुंचे तो उन्हें डॉक्टर बनना था, लेकिन वह छात्र राजनीति में कूद पड़े. राजनीति से रंगमंच के रास्ते उनका सफर मुंबई तक पहुंच गया है.

Reema-Lagoo

अभिनेत्री रीमा लागू का निधन

फिल्मों में मां के रूप में निभाए गए उनके किरदारों के लिए जाना जाता है. फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान ख़ान और वास्तव में संजय दत्त की मां का किरदार निभा चुकी थीं.

17799386_1438053772903045_8077454966945859555_n

शिलान्यास से शिलान्यास तक: मेरा नाटक ख़त्म हुआ

गोरखपुर में एक अदद प्रेक्षागृह के लिए पिछले 24 वर्षों से अनूठे किस्म का रंग आंदोलन चलाया जा रहा था. 1258 नाटकों के बाद रंगाश्रम का यह रंग आंदोलन ख़त्म हो गया.