रथयात्रा

(फाइल फोटो: पीटीआई)

विहिप ने अयोध्या को रणक्षेत्र बनाया तो ‘हिंदू’ हुई हिंदी पत्रकारिता

मुख्यधारा की पत्रकारिता तो शुरुआती दिनों से ही राम जन्मभूमि आंदोलन का अपने व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करती और ख़ुद भी इस्तेमाल होती रही. 1990-92 में इनकी परस्पर निर्भरता इतनी बढ़ गई कि लोग हिन्दी पत्रकारिता को हिंदू पत्रकारिता कहने लगे.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

पश्चिम बंगाल में रथयात्रा निकालने के लिए भाजपा को मंज़ूरी देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि रथयात्रा के लिए भाजपा अगर संशोधित योजना के साथ आती है तो उस पर विचार किया जा सकता है. भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई को रैली और सभाएं करने की अनुमति मिली.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट का बंगाल में रथयात्रा की अनुमति के लिए भाजपा की याचिका पर शीघ्र सुनवाई से इनकार

भाजपा पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र बचाओ रथयात्रा निकालना चाहती है. इन रथों को करीब डेढ़ महीने में राज्य के 42 संसदीय क्षेत्रों से गुज़रना था.

Meerut: BJP workers take part in the party's Kamal Sandesh bike rally, in Meerut, Saturday, Nov 17, 2018. (PTI Photo) (PTI11_17_2018_000083B)

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के लोकतंत्र बचाओ रथयात्रा कार्यक्रम को दी मंज़ूरी

भाजपा ने तीन रथयात्राएं निकालने की योजना बनाई थी, जिन्हें पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा की आशंका के मद्देनज़र अनुमति नहीं दी थी. अदालत ने कहा कि किसी भी नुकसान के लिए भाजपा ज़िम्मेदार होगी.

Jaipur: BJP President Amit Shah addresses a press conference, in Jaipur, Wednesday, Dec. 05, 2018. (PTI Photo)(PTI12_5_2018_000035B)

भाजपा को पश्चिम बंगाल में ‘यात्रा’ निकालने से कोई नहीं रोक सकता: अमित शाह

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भाजपा को कूच बिहार में ‘रथयात्रा’ निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. भाजपा ने आदेश के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ में शुक्रवार को अपील दाख़िल की.

फोटो: रॉयटर्स

भाजपा गठबंधन के रहते नीतीश कुमार को दुश्मनों की ज़रूरत नहीं है

नीतीश कुमार ने समझने में भूल कर दी कि इस बार उनका सामना पहले की तुलना में शक्तिशाली भाजपा से हुआ है. भाजपा बिहार के हालात का भरपूर फ़ायदा उठा रही है और नीतीश महज़ एक तमाशबीन बनकर रह गए हैं.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

संप्रदायवादियों की दिलचस्पी धर्म में नहीं, उसके राजनीतिक इस्तेमाल में है: बिपन चंद्र

अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद वास्तविक मुद्दा नहीं हैं, क्योंकि जनता इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण रह रही है. वास्तविक मुद्दा सांप्रदायिकता का विकास और सांप्रदायिक संगठनों द्वारा सांप्रदायिक तनाव को हवा देना है.

अयोध्या. (फोटो साभार: ​टूरिज़्म आॅफ इंडिया)

अयोध्या एक शहर का नाम है जिसमें इंसान रहते हैं

यह वह अयोध्या नहीं है जिसको सार्वजनिक कल्पना में विहिप और भाजपा या दिल्ली के तथाकथित लिबरल्स व मार्क्सवादी बुद्धिजीवियों ने स्थापित किया है. यह एक सामान्य शहर है.

अयोध्या. (फोटो साभार: विकिमीडिया)

अयोध्या विवाद: इस देश की राजनीति धर्मनिरपेक्ष विरासत और संकल्प भूल चुकी है

देश के वामपंथी और समाजवादी बौद्धिकों ने धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का पूरा दारोमदार मंडलवादी और आंबेडकरवादी आंदोलनों पर डाल दिया लेकिन इन आंदोलनों ने देश को इतने भ्रष्ट नेता दिए कि उनके पास धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का नैतिक बल ही नहीं बचा.

अयोध्या के नया घाट स्थि​त सरयूतट. (फोटो: कृष्णकांत)

छह दिसंबर हिंदुओं के लिए पश्चाताप, क्षमायाचना और आत्मचिंतन का दिन होना चाहिए

26 साल पहले आज ही के दिन स्वयं को रामभक्तों की सेना कहने वालों ने एक ऐसा जघन्य कृत्य किया था जिसके कारण पूरी दुनिया के सामने हिंदू धर्म का सिर हमेशा के लिए कुछ नीचे हो गया.