राष्ट्रवाद

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: ट्विटर/भाजपा)

पत्रकार रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए भाषण लिखा है, क्या वे इसे पढ़ सकते हैं?

भाजपा की सरकार ने उच्च शिक्षा पर उच्चतम पैसे बचाए हैं. हमारा युवा ख़ुद ही प्रोफेसर है. वो तो बड़े-बड़े को पढ़ा देता है जी, उसे कौन पढ़ाएगा. मध्य प्रदेश का पौने छह लाख युवा कॉलेजों में बिना प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक के ही पढ़ रहा है. हमारा युवा देश मांगता है, कॉलेज और कॉलेज में टीचर नहीं मांगता है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at a function to commemorate the 75th anniversary formation of the Azad Hind Government, at Red Fort, Delhi on October 21, 2018.

मोदी को प्रधान सेवक के साथ भारत का प्रधान इतिहासकार भी घोषित कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं क्योंकि वे इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक मनोहर पोथी लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम मोदी-मनोहर पोथी हो.

Mahatma Gandhi Photo Wikimedis commons

अभी गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी है?

आज हमारे सामने ऐसे नेता हैं जो केवल तीन काम करते हैं: वे भाषण देते हैं, उसके बाद भाषण देते हैं और फिर भाषण देते हैं. सार्वजनिक राजनीति से करनी और कथनी में केवल कथनी बची है. गांधी उस कथनी को करनी में तब्दील करने के लिए ज़रूरी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (रॉयटर्स)

केंद्र सरकार ने गांधीजी को ‘वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक’ बना दिया है: इतिहासकार इरफ़ान हबीब

इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने महात्मा गांधी पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि मोदी सरकार ने एक राष्ट्रपिता के रूप में गांधी की विरासत को भुलाते हुए उनके क़द को स्वच्छ भारत मिशन तक सीमित कर दिया है.

Mumbai: Shivsena Chief Uddhav Thackeray with Yuva Sena Chief Aditya Thackeray address a press conference, in Mumbai on Thursday, May 31, 2018. (PTI Photo)(PTI5_31_2018_000185B)

इस देश में गाय सुरक्षित हैं, महिलाएं नहीं: उद्धव ठाकरे

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ को दिए साक्षात्कार में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी सहयोगी दल भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि जिस प्रकार आज देश में हिंदुत्व का पालन किया जा रहा है, उसे शिवसेना स्वीकार नहीं करती.

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कांग्रेस के वंदे मातरम के टुकड़े करने के चलते हुआ देश का विभाजन: अमित शाह

कोलकाता में हुए एक कार्यक्रम में बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम को धार्मिक रंग दिया. उसने अगर ऐसा नहीं किया होता, तो देश नहीं बंटता.

Varanasi: A bike in flames during clashes between the students and police at Banaras Hindu University in Varanasi, late Saturday night. Female students at the prestigious University were protesting against the administration's alleged victim-shaming after one of them reported an incident of molestation on Thursday. PTI Photo (PTI9_24_2017_000080A)

पिछले तीन सालों में विभाजन बढ़ा, धार्मिक मतभेद और राष्ट्रवादी राजनीति बड़ा ख़तरा: सर्वे

एक सर्वे के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर नस्लभेद और अप्रवासियों का भय वैश्वीकरण के लिए बड़ा ख़तरा हैं, लेकिन भारत के युवाओं का मानना है कि धार्मिक मतभेद और राष्ट्रवादी राजनीति दूसरे ख़तरों से बड़े हैं.

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मैंने भाजपा से इस्तीफ़ा दिया क्योंकि…

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव की टीम का हिस्सा रहे शिवम शंकर सिंह कहते हैं, ‘मैं 2013 से भाजपा का समर्थक था क्योंकि नरेंद्र मोदी देश के लिए उम्मीद की किरण की तरह लगते थे और मुझे उनके विकास के नारे पर विश्वास था. अब वो नारा और उम्मीद दोनों जा चुके हैं.’

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‘भारत की राष्ट्रीयता किसी एक भाषा या एक धर्म पर आधारित नहीं है’

7 जून 2018 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पर हुए समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गया पूरा भाषण.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रवाद की गढ़ी जा रही अवधारणा का आज़ादी की लड़ाई के वक़्त की अवधारणा से मेल नहीं: इतिहासकार

इतिहासकार प्रोफेसर मृदुला मुखर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रवाद सर्वसमावेशी और बहुआयामी था, जिसमें हर क्षेत्र, धर्म, संप्रदाय, हर भाषा को बोलने वाले और सभी जनजातीय समूह के लोग शामिल थे.

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बॉलीवुड का नया ‘आदर्श’ भारतीय, राष्ट्रवादी और सरकार का पैरोकार है

अब फिल्मों में एक नया तत्व दिखाई दे रहा है. यह है उग्र राष्ट्रवादी तेवर, जो न सिर्फ सोशल मीडिया और समाज के एक ख़ास वर्ग में दिखाई देने वाली भावावेश भरी राष्ट्रीयता से मेल खाता है, बल्कि वर्तमान सरकार के एजेंडे के साथ भी अच्छे से कदम मिलाकर चलता है.

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अपराधियों को मारना राम राज्य की शुरुआत: केशव प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद बढ़े एनकाउंटरों पर उपमुख्यमंत्री का कहना है कि यूपी अकेला ऐसा राज्य है जहां क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर क़दम उठाए जा रहे हैं.

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‘देश में राष्ट्रवाद के नाम पर नशा बांटा जा रहा है’

वीडियो: देश में बढ़ती सांप्रदायिक घटनाओं और बयानबाज़ी पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद से द वायर के कार्यकारी संपादक बृजेश सिंह की बातचीत.

Darbhanga: RSS Chief Mohan Bhagwat attends Nagar Ekatrikaran Conference in Darbhanga district on Wednesday. PTI Photo(PTI1_24_2018_000064B)

जातिगत राजनीति इसलिए होती है, क्योंकि लोग जाति के नाम पर वोट देते हैं: भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नेता एक निश्चित सीमा तक चीज़ों में सुधार कर सकते हैं और चीज़ों में सुधार के लिए अपने हितों के त्याग करने की ज़रूरत होती है.

पुस्तक मेले में आसाराम का स्टॉल, फोटो: Special Arrangement

क्या नेशनल बुक ट्रस्ट ने पुस्तक मेले के बहाने धर्म के प्रचार-प्रसार का ठेका ले लिया है?

विश्व पुस्तक मेला अब महज़ किताबों की ख़रीद-बिक्री, लेखकों एवं पाठकों का मिलन स्थल ही नहीं रहा बल्कि धर्म के प्रचार का केंद्र भी बन गया है.

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अन्य संस्कृतियों के प्रति अज्ञानता कट्टर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है: नोबेल पुरस्कार विजेता

भारत आए नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डेविड जोनाथन ग्रॉस ने कहा कि कट्टर राष्ट्रवाद के माहौल में ज्ञान की ज्योति जलाने की ज़िम्मेदारी युवाओं पर है.

(फोटो: पीटीआई)

फिल्म शुरू होने से पहले सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना स्वैच्छिक: सुप्रीम कोर्ट

साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले बिना किसी नाटकीयता के राष्ट्रगान अनिवार्य रूप से बजाया जाना चाहिए.

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क्या भारत की राजनीति ने अपना धर्म चुन लिया है?

कभी हाशिये पर रही हिंदुत्व की राजनीति आज मुख्यधारा की राजनीति बन चुकी है. संघ के लिए इससे बड़ी सफलता भला और क्या हो सकती है कि देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां नरम/गरम हिंदुत्व के नाम पर प्रतिस्पर्धा करने लगें.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

साल 2018 में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द संविधान से हटाए बिना ही चलन से बाहर कर दिया जाएगा

नरेंद्र मोदी सरकार कई अहम मोर्चों, मसलन रोज़गार और निवेश पर नाकाम रही है. जैसा कि हमने उत्तर प्रदेश और अब गुजरात में देखा, जब बाकी सारी चीज़ें चुक जाती हैं, तब हिंदुत्व काम आता है.

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप. (फोटो साभार यू-ट्यूब)

कुछ लोग ख़बरों में बने रहने के लिए राष्ट्रवाद का बिल्ला दिखाते फिरते हैं: अनुराग कश्यप

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने कहा कि आज के समय में राष्ट्रवाद के बिना खेल आधारित बायोपिक फिल्में बनाना असंभव है.

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सरदार पटेल ने ‘हिंदू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था

मोदी अगर सरदार पटेल को अपना नेता मानते हैं तो फिर उन्हें पटेल की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता पर अमल करते हुए हिंदू राष्ट्र के लिए हथियार उठाने का आह्वान करने वाले सिरफिरे पर कार्रवाई करनी चाहिए.

अभिनेता प्रकाश राज. (फोटो साभार: फेसबुक/प्रकाश राज)

विरोध के स्वर दबाने की कोशिशों का कलाकारों को प्रतिकार करना चाहिए: प्रकाश राज

पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि अगर एक आवाज़ दबाई जाएगी तो और ज़्यादा मज़बूत आवाज़ें सामने आएंगी.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा. (फोटो साभार: फेसबुक)

इतिहासकारों का राजनीतिक विचारधारा या धर्म के प्रति झुकाव नहीं होना चाहिए: गुहा

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, इतिहास सामाजिक विज्ञान और साहित्य का मिश्रण है और वह कभी एक आयामी नहीं हो सकता.

अभिनेता प्रकाश राज. (फोटो साभार: प्रकाश राज/फेसबुक)

आप राष्ट्रवाद में धर्म को क्यों लाते हैं फिर उन लोगों का क्या जो हिंदू नहीं हैं: प्रकाश राज

अभिनेता प्रकाश राज ने भाजपा नेता अनंत कुमार हेगड़े को आड़े हाथों लेते हुए उनकी राजनीति पर सवाल उठाए.

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भारत मां को सलाम नहीं करेंगे तो किसे करेंगे, अफ़ज़ल गुरु को: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने विहिप नेता अशोक सिंहल को सर्वकालिक लोकप्रिय संगठनकर्ता और निष्काम सेवा का प्रतीक बताया.

गिरिराज सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

बहुसंख्यकों की आबादी गिरेगी, उस दिन लोकतंत्र ख़तरे में होगा: केंद्रीय मंत्री

केंद्र सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, भारत में जम्हूरियत भी तभी तक है और लोकतंत्र तभी तक सुरक्षित है जब तक बहुसंख्यकों की आबादी है.

शायर और गीतकार जावेद अख़्तर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नेताओं को पता होना चाहिए कि उन्होंने देश नहीं बनाया, जनता ने बनाया है: जावेद अख़्तर

मशहूर शायर व गीतकार ने कहा, टीपू सुल्तान भारतीय नहीं थे और अगर मैं इससे सहमत नहीं, तो मैं राष्ट्रद्रोही बन जाऊंगा, तो मैं राष्ट्रद्रोही हूं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रगान विवाद: जो चीज़ें अहम होतीं हैं उन्हें आम नहीं बनाना चाहिए

सिनेमाघर न तो पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी का लाल किला है, न ही उन तमाम स्कूलों और कॉलेजों का मैदान, जहां इन दो दिनों पर राष्ट्रगान भी होता है और ‘रंगारंग कार्यक्रम’ भी.

Chidambaram Photo by The Wire

मोदी अब अच्छे दिन के बारे में बात नहीं करते, उन्हें पता है कि लोग हंसेंगे: पी.चिदंबरम

साक्षात्कार: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से नरेंद्र मोदी सरकार, जीएसटी, रॉबर्ट वाड्रा, कार्ति चिदंबरम, विपक्ष, गुजरात चुनाव समेत विविध विषयों पर विस्तृत बातचीत.

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राहुल की जेटली को नसीहत- कारोबारियों से पूछिए, समूचा देश चीखेगा कि आपने इसे बर्बाद किया है

गुजरात चुनाव राउंडअप: गुजरात चुनाव में राहुल गांधी का निशाना नोटबंदी और जीएसटी. अहमद पटेल ने कहा, राष्ट्रवाद पर केवल भाजपा का ही ठेका नहीं है.

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देशभक्ति साबित करने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान पर खड़ा होना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा, नागरिकों को अपनी आस्तीनों पर देशभक्ति लेकर चलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

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‘भारत में हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों के कारण मीडिया में सेल्फ सेंसरशिप की प्रवृत्ति बढ़ी’

अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि 2015 से अब तक सरकार की आलोचना करने वाले नौ पत्रकारों की हत्या कर दी गई.

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‘बीएचयू को जेएनयू नहीं बनने देंगे’ का क्या मतलब है?

बीते कई दशकों से एक साधन-संपन्न और बड़ा केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद बीएचयू पूर्वांचल में ज्ञान और स्वतंत्रता की संस्कृति का केंद्र क्यों नहीं बन सका!

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क्या ‘वंदे मातरम्’ गीत राष्ट्रवा​द की भेंट चढ़ गया?

राष्ट्रगीत के थोपे जाने का विरोध करते-करते लोग गीत में ही खोट ढूंढने लगे हैं. मानो भूल रहे हों कि ‘वंदे मातरम’ कविता पहले है, राष्ट्रगीत बाद में. लगता है कविता राष्ट्रवाद की बहस में भेंट चढ़ गई है.

TN Hindi

जन गण मन की बात, ​एपिसोड 98: संघ की देशभक्ति और जन आंदोलन  

जन गण मन की बात की 98वीं कड़ी में विनोद दुआ संघ की देशभक्ति और विभिन्न मुद्दों को लेकर देश में जारी जन आंदोलनों पर चर्चा कर रहे हैं.

Golwalker

‘राष्ट्रवाद पर गोलवरकर के विचारों को सही तरीके से समझा नहीं गया’

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित इंडियन काउंसिल फॉर फिलॉसफिकल रिसर्च का मानना है कि गोलवरकर के विचारों को सही परिप्रेक्ष्य में समझे जाने की ज़रूरत है.

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गांव वही था, लोग भी वही थे, मगर ईद वह नहीं थी

अपने हिंदू दोस्तों को ईद की दावत दी. सबने चिकन-मटन खाने से मना कर दिया. ये वही दोस्त थे जो इसके पहले सिर्फ़ इस शर्त पर आते थे कि चिकन-मटन खाने को मिलेगा.

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आंबेडकरवादी प्रतीकों के साथ संघ की सोशल इंजीनियरिंग

सेकुलर शक्तियों को याद रखना चाहिए कि 1974 के बाद से ही संघ परिवार बड़ी होशियारी के साथ दलित और पिछड़े प्रतीकों को हड़प के अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने के कौशल को विकसित करने में लगा हुआ है.