राष्ट्रीयता

Pranab Mukherjee Rss Featured

‘भारत की राष्ट्रीयता किसी एक भाषा या एक धर्म पर आधारित नहीं है’

7 जून 2018 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पर हुए समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गया पूरा भाषण.

(जन्म 26 अक्टूबर 1890- अवसान: 25 मार्च 1931)

गोदी मीडिया के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता को याद किया जाना चाहिए

गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता के ज़रिये ब्रिटिश शासन के साथ-साथ देसी सामंतों को भी निशाने पर लेते थे. उनका दफ़्तर क्रांतिकारियों की शरणस्थली था तो युवाओं के लिए पत्रकारिता का प्रशिक्षण केंद्र.

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अंग्रेज़ों से माफ़ी मांगने वाले सावरकर ‘वीर’ कैसे हो गए?

सावरकर ने अंग्रेज़ों को सौंपे अपने माफ़ीनामे में लिखा था, ‘अगर सरकार अपनी असीम भलमनसाहत और दयालुता में मुझे रिहा करती है, मैं यक़ीन दिलाता हूं कि मैं संविधानवादी विकास का सबसे कट्टर समर्थक रहूंगा और अंग्रेज़ी सरकार के प्रति वफ़ादार रहूंगा.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिराई, देश से माफ़ी मांगें: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री ने पाक से सांठगांठ के आरोप पर किया फिर पलटवार, अमित शाह ने पूछा, मनमोहन सिंह का गुस्सा तब कहां था जब नज़रों के सामने लूट हो रही थी.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रगान विवाद: जो चीज़ें अहम होतीं हैं उन्हें आम नहीं बनाना चाहिए

सिनेमाघर न तो पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी का लाल किला है, न ही उन तमाम स्कूलों और कॉलेजों का मैदान, जहां इन दो दिनों पर राष्ट्रगान भी होता है और ‘रंगारंग कार्यक्रम’ भी.

गणेश शंकर विद्यार्थी. (जन्म: 26 अक्टूबर 1890 – मृत्यु 25 मार्च 1931)

हिंदू राष्‍ट्र-हिंदू राष्‍ट्र चिल्‍लाने वाले देश को हानि पहुंचा रहे हैं: गणेश शंकर विद्यार्थी

पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी आज़ादी की लड़ाई में न सिर्फ़ क्रांतिकारियों के साथ सक्रिय थे, ​बल्कि अपने अख़बार ‘प्रताप’ में आज़ादी की अलख जगा रहे थे.

The Vice President, Shri M. Hamid Ansari delivering the 25th Annual Convocation Address of National Law School of India University (NLSIU), in Bengaluru on August 06, 2017.

‘असहिष्णुता और अहंकारी देशभक्ति को बढ़ावा देता है सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा, धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांतों को पुनर्जीवित करना आज की चुनौती है. इनमें सहिष्णुता और धर्म की स्वतंत्रता शामिल हैं.

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हमारे समाज को आजकल इतना गुस्सा क्यों आ रहा है?

तकनीक के अधकचरे इस्तेमाल ने दरअसल एक अधकचरी पढ़ी-लिखी हिंसा को भी जन्म दिया है. इस हिंसा का शिकार हर वैसा वर्ग और व्यक्ति हो रहा है, जो एक मदमाती सत्ता से सवाल पूछता है.

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दस कहानियां: मैं देश से बहुत प्रेम करता हूं

देश के सबसे बड़े देशप्रेमी ने देशप्रेम नापने की एक मशीन बनवाई है . इस मशीन में आदमी बैठ जाता है और सुई घूमने लगती है. पता चल जाता है कि कौन देश से कितना प्रेम करता है.