लिंचिंग

Jharkhand lynching Jabir Ansari

झारखंड: चोरी के आरोप में भीड़ ने युवक को बेरहमी से पीटा, छह गिरफ़्तार

घटना हज़ारीबाग ज़िले में हुई, जहां रामगढ़ के पतरातू के रहने वाले 25 साल के जाबिर अंसारी को चोरी के इल्ज़ाम में उग्र भीड़ ने बेरहमी से पीटा. पीड़ित के परिजनों ने उनकी मुस्लिम पहचान के चलते पीटे जाने का आरोप लगाया है.

(फोटोः स्क्रीनग्रैब)

तमिलनाडुः भीड़ ने दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या की, सात गिरफ़्तार

यह घटना चेन्नई के पास विल्लुपुरम की है, जहां शौच जा रहे एक युवक को भीड़ द्वारा बुरी तरह पीटा गया. घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तीन महिलाओं और चार पुरूषों सहित सात लोगों को गिरफ़्तार किया है.

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मध्य प्रदेशः बच्चा चोरी के शक़ में भीड़ के हमले में एक की मौत, छह पुलिसकर्मी सस्पेंड

धार ज़िले के मनावर क्षेत्र में मज़दूरों से अपनी रकम वापस लेने आए इंदौर के सात किसानों पर भीड़ ने पत्थरों और लाठियों से हमला कर दिया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि छह गंभीर रूप से घायल हो गए. हमले का मुख्य आरोपी स्थानीय भाजपा नेता को बताया जा रहा है.

Alwar

राजस्थान: अलवर में सरपंच के पति की पीट-पीट कर हत्या

राजस्थान के अलवर ज़िले के मुंडावर थाना क्षेत्र की घटना. परिजनों ने हत्या के पीछे राजनीतिक रंज़िश होने की आशंका जताई है. पुलिस हत्या का केस दर्ज किया.

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बिहार: रंगदारी देने से इनकार करने पर मवेशी ले जा रहे व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या

घटना कटिहार ज़िले की है, जहां एक मवेशी व्यवसायी के कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर रंगदारी देने से मना करने पर मारपीट की गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

(फोटो: द वायर)

झारखंड: अफ़वाहों के चलते सात लोगों की लिंचिंग हुई, एनसीआरबी रिपोर्ट में कहा- कोई मामला नहीं

राज्य में बीते तीन साल में गोकशी, चोरी, बच्चा चोरी और अफ़वाहों के चलते 21 लोगों की मौत हुई है. जनवरी 2017 से लेकर अब तक राज्य में जादू-टोना करने के शक के आधार पर हुई भीड़ की हिंसा में 90 से अधिक लोगों की मौत हुई है.

Mau

उत्तर प्रदेश: मऊ ज़िले में मोबाइल देखने के झगड़े में युवक की पीट-पीटकर हत्‍या

उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले में भी एक युवक की कथित तौर पर नशे में धुत उसके साथियों ने सरिया से पीट-पीटकर हत्‍या कर दी.

2019 के विजयादशमी समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत. (फोटो साभार: फेसबुक/@RSSOrg)

मोहन भागवत का भाषण: क्या आरएसएस का क़द मोदी-शाह के सामने छोटा पड़ गया है?

माना जाता है कि जब भी एनडीए सत्ता में आती है, इसकी डोर आरएसएस के हाथों में होती है. लेकिन 2019 के विजयादशमी भाषण के अधिकांश हिस्से में संघ प्रमुख मोहन भागवत का मोदी सरकार के बचाव में बोलना उनके घटते महत्व की ओर इशारा करता है.

Nagpur: Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) chief Mohan Bhagwat addresses during the 'Vijayadashami Utsav 2019', at RSS headquarter in Nagpur, Tuesday, Oct. 8, 2019. (PTI Photo)(PTI10_8_2019_000080B)

लिंचिंग एक साज़िश है, भारत को बदनाम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि संघ का नाम लेकर, हिंदुओं का नाम लेकर एक षडयंत्र चल रहा है, यह सबको समझना चाहिए. लिंचिंग कभी हमारे देश में रहा नहीं, आज भी नहीं है.

A deserted road in Srinagar on Monday. Restrictions were in force across Kashmir and in several parts of Jammu. (REUTERS/Danish Ismail)

मोदी सरकार के सौ दिनों की सबसे बड़ी ‘उपलब्धि’ भारतीय संघीय ढांचे को कमज़ोर करना रहा है

भारतीय संविधान में स्पष्ट तौर पर भारत को राज्यों का संघ कहा गया है यानी एक संघ के रूप में सामने आने से पहले भी ये राज्य अस्तित्व में थे. इनमें से एक जम्मू कश्मीर का यह दर्जा ख़त्म करते हुए मोदी सरकार ने संघ की अवधारणा को ही चुनौती दी है.

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी (फोटो: यूट्यूब)

इला​हाबाद विश्वविद्यालय: कथित लिंचिंग के डर से दलित प्रोफेसर अनिश्चितकालीन छुट्टी पर गए

दलित प्रोफेसर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन और प्राचीन इतिहास विभाग से जुड़े हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि दो साल पहले दिए गए उनके भाषण से संबंधित वीडियो में छेड़छाड़ कर उसे प्रसारित किया जा रहा है.

Asansol

पश्चिम बंगाल: बच्चा चोरी के शक में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या, एक गिरफ़्तार

आसनसोल में बच्चा चोर होने के संदेह में भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहीं कूच बिहार में भीड़ ने एक मानसिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति की बच्चा चोरी के संदेह में पिटाई की, जिसे पुलिस द्वारा बचाया गया.

Bikaner: Muslim activists protest against the recent incidents of mob lynching, in Bikaner, Friday, June 28, 2019. (PTI Photo) (PTI6_28_2019_000160B)

क्यों जारी है मॉब लिंचिंग का सिलसिला?

अपराध जितना भी जघन्य हो आरोपी को सज़ा देना क़ानून का काम है न कि समाज और भीड़ का. उसमें चाहे जितना समय लगे या गलतियां भी हों, जनता द्वारा क़ानून हाथ में लेने को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.