वन विभाग

ओडिशा के कालाहांड़ी के आदिवासी परिवार जिनके घर प्रशासन द्वारा तोड़ दिए गए. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

ओडिशा: लॉकडाउन के बीच वन विभाग के अधिकारियों ने 32 आदिवासियों के घर तोड़ दिए

मामला ओडिशा के कालाहांडी जिले का है. लोकशक्ति अभियान संस्था के अध्यक्ष प्रफुल सामांत्रा ने बताया कि ये आदिवासी 2017 से वहां रह रहे थे. लेकिन प्रशासन कह रहा है कि वे लॉकडाउन के बाद वहां आए थे.

बीते 17 जुलाई को जमीन विवाद में सोनभद्र के उम्भा गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी. (फोटो साभार: वीडियोग्रैब)

कब तक भूख और गोली से मारे जाएंगे आदिवासी?

सोनभद्र में किसी ने उन आदिवासियों की भुखमरी के हालात की तह में जाने की कोशिश तक नहीं की, यह सवाल नहीं पूछा कि मौत का ख़तरा होते हुए भी वे इस अनउपजाऊ क्षेत्र में ज़मीन से क्यों चिपके हुए थे?

झारखंड के चतरा ज़िले के लावालौंग प्रखंड के इन किसानों की जमीन वन विभाग द्वारा छीन ली गई है. अपनी जमीन का कागजात दिखाते किसान. (सभी फोटो: मोहम्मद असगर ख़ान)

क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

ग्राउंड रिपोर्ट: सूखे की मार झेल रहे हैं झारखंड के चतरा ज़िले के किसानों पर वन विभाग की सख़्ती ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है. बीते एक साल में चतरा के हज़ारों किसानों की ज़मीन और खेत को वन विभाग ने वनभूमि बताकर उन्हें वहां से बेदख़ल कर दिया है.

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छत्तीसगढ़: हर चुनावी साल में तेंदूपत्ते की नीलामी दर और उत्पादन में ​गिरावट क्यों आ जाती है?

भाजपा ने जहां इसे बाज़ार की मांग और आपूर्ति से जुड़ा मामला बताया है. वहीं, कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार से जोड़ रहे हैं. वो तेंदूपत्ता व्यापार को चुनावी फंड तैयार करने का माध्यम बनाने का आरोप लगा रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों में ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होंगी गोसंरक्षण समितियां

गोसंरक्षण समितियां गोशालाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करेंगी और बायोगैस, कम्पोस्ट, पंचगव्य से बनाए जाने वाले पदार्थों आदि के उत्पादन-विक्रय में सहायता प्रदान करेंगी.

फोटो: द वायर/कृष्णकांत

वन अधिकार कानून ने आदिवासियों को अतिक्रमणकारी होने के कलंक से मुक्त किया

ग्यारह साल पहले इस क़ानून के पारित होने के बाद से आदिवासी समुदाय इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाते आ रहे हैं.

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छात्र राजनीति में उभरते आदिवासी नेतृत्व को सलाम

मध्य प्रदेश में लंबे संघर्ष के बाद हुए छात्रसंघ चुनावों में आदिवासी छात्र संगठन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है. 25 महाविद्यालयों में 162 छात्र प्रतिनिधियों ने परचम लहराया है, इनमें से पचास प्रतिशत लड़कियां हैं.

Tribal women carry bundles of twigs and leaves near Shantiniketan, 150 km (95 miles) northwest of Calcutta on March 18, 2004. REUTERS/Jayanta Shaw/Files

जनता की 90 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर सरकार का अवैध क़ब्ज़ा

2006 में लागू वन अधिकार क़ानून कहता है कि जो ज़मीनें आज़ादी के पहले सामुदायिक अधिकारों के लिए थीं, वो यथावत बनी रहेंगी. लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 90 लाख हेक्टेयर ऐसी ज़मीनों पर सरकार का क़ब्ज़ा है.