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(फाइल फोटो: ट्विटर)

2019-20 में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर प्रतिदिन क़रीब 1.95 करोड़ रुपये ख़र्चे: आरटीआई

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से आरटीआई के तहत प्राप्त सूचना के मुताबिक़ पिछले वर्ष मोदी सरकार ने अख़बार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, होर्डिंग इत्यादि के माध्यम से प्रचार के लिए कुल 713 करोड़ रुपये ख़र्च किए हैं.

(फोटो साभार: फेसबुक)

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के विज्ञापन पर 2014 से 393 करोड़ रुपये खर्च हुए: सरकार

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यसभा में बताया कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना से लिंगानुपात में सुधार लाने तथा लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता बदलने का उद्देश्य पूरा करने में मदद मिली है. महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने उच्च सदन […]

(प्रतीकात्मक फोटो: ट्विटर/@BOC_MIB)

विज्ञापन के ज़रिये पांच सालों में सोशल मीडिया पर सिर्फ़ एक जागरूकता अभियान चलाया: सरकार

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि लोक संपर्क और संचार ब्यूरो (बीओसी) सोशल मीडिया मंचों सहित विभिन्न मीडिया मंचों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाती है. पांच साल में सिर्फ केवल एक अभियान चलाया, जिस पर 21.66 लाख रुपये ख़र्च हुआ.

राम मंदिर भूमि पूजन के अवसर पर आया अमूल का विज्ञापन. (सभी फोटो साभार: ट्विटर/अमूल)

अमूल के विज्ञापन क्या सरकार को मक्खन लगा रहे हैं

अमूल मक्खन के लोकप्रिय विज्ञापन कश्मीर के दर्जे में परिवर्तन से लेकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार तक के मुद्दे पर सरकार के रवैये के साथ हामी भरते नज़र आते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

लॉकडाउन: समाचार पत्र संगठन ने कहा- केंद्र और राज्यों पर विज्ञापन के करोड़ों रुपये बकाया

पत्रकार संगठनों ने लॉकडाउन के दौरान सभी बर्ख़ास्तगी नोटिसों को निलंबित करने, वेतन कटौती वापस लेने, बिना वेतन छुट्टी पर भेजे जाने संबंधी नोटिस निलंबित रखने का निर्देश देने के लिए एक जनहित याचिका दाख़िल की है. इसके बचाव में इंडियन न्यूज़पेपर सोसायटी और न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने हफ़लनामा दायर किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

समाचार चैनलों के संगठन ने सरकार से पैकेज और सरकारी विज्ञापनों के बकाया भुगतान की मांग की

देश में तीन मई तक लागू लॉकडाउन की वजह से समाचार चैनलों के सामने आए भारी आर्थिक संकट का हवाला देते हुए न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखा है.

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मीडिया बोल: अरबों के सरकारी विज्ञापन में फंसी मीडिया की जान

मीडिया बोल की इस कड़ी में कुछ मीडिया संस्थानों को सरकारी विज्ञापन न देने के मोदी सरकार के फैसले पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन नाग, सत्य हिंदी वेबसाइट के संपादक आशुतोष और द वायर के सह-संस्थापक एमके वेणु से चर्चा कर रहे हैं उर्मिलेश.

बिहार के मुख्यमंत्री नी​तीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

पांच साल में बिहार की नीतीश सरकार ने विज्ञापन पर ख़र्च किए तक़रीबन पांच अरब रुपये

विशेष रिपोर्ट: सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार बिहार में राबड़ी देवी सरकार ने साल 2000 से 2005 के दौरान 23 करोड़ 48 लाख रुपये विज्ञापन पर ख़र्च किए थे. वहीं ​नीतीश कुमार सरकार ने पिछले पांच साल में विज्ञापन पर 4.98 अरब रुपये ख़र्च किए हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

गूगल के विज्ञापनों पर सबसे अधिक ख़र्च करने वाली राजनीतिक पार्टी है भाजपा

‘भारतीय पारदर्शिता रिपोर्ट’ के अनुसार राजनीतिक दलों ने फरवरी 2019 तक विज्ञापनों पर 3.76 करोड़ रुपये ख़र्च किए हैं. भाजपा विज्ञापनों पर 1.21 करोड़ रुपये ख़र्च करने के साथ ही इस सूची में शीर्ष पर है.

Kanyakumari: Workers place a huge portrait of Prime Minister Narendra Modi along a road ahead of his rally, in Kanyakumari, Thursday, Feb. 28, 2019. (PTI Photo)(PTI2_28_2019_000137B)

भाजपा समर्थक फेसबुक पेजों ने दो हफ्ते में प्रचार पर ख़र्च किए डेढ़ करोड़ रुपये- रिपोर्ट

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, दो सप्ताह के भीतर विज्ञापनों पर खर्च करने में शीर्ष 20 फेसबुक पेजों का योगदान 1.9 करोड़ रुपये से ज्यादा का है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi at the silver jubilee celebration of National Human Right Commission, in New Delhi, Friday, Oct 12, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI10_12_2018_100099B)

यूपीए के मुकाबले मोदी सरकार ने विज्ञापन पर जारी की दोगुनी राशि, अब तक 5246 करोड़ रुपये ख़र्च

यूपीए सरकार के दस साल में कुल मिलाकर 5,040 करोड़ रुपये की राशि विज्ञापन पर ख़र्च की गई थी. वहीं मोदी सरकार पांच साल से कम कार्यकाल में ही 5245.73 करोड़ रुपये ख़र्च कर चुकी है.

फाइल फोटो: साभार भाजपा

बड़े ब्रांड्स को पीछे छोड़ भाजपा बनी टीवी की सबसे बड़ी विज्ञापनदाता

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक 12 से 16 नवंबर के बीच टीवी चैनलों पर 22,099 बार भाजपा का विज्ञापन दिखाया गया. यह आंकड़ा देश के दूसरे सबसे बड़े टीवी विज्ञापनदाता नेटफ्लिक्स से 10,000 ज़्यादा है.

एलेक पदमसी. (फोटो साभार: फेसबुक/Team Pumpkin)

दिग्गज विज्ञापन निर्माता और निर्देशक एलेक पदमसी का निधन

एलेक पदमसी ने भारत के कुछ मशहूर विज्ञापन बनाए जिसमें सर्फ के लिए ‘ललिताजी’, आॅटो कंपनी बजाज के लिए ‘हमारा बजाज’, ‘चेरी ब्लॉसम’ शू पॉलिश के लिए ‘चेरी चार्ली’ और ‘लिरिल’ के लिए झरने के नीचे मॉडल वाला विज्ञापन शामिल है.

Modi Ad Reuters

मोदी सरकार ने साढ़े चार सालों में विज्ञापन पर ख़र्च किए 5,000 करोड़ रुपये

मोदी सरकार में विज्ञापन पर खर्च की गई राशि यूपीए सरकार के मुकाबले दोगुनी से भी ज़्यादा है. यूपीए ने अपने दस साल के कार्यकाल में विज्ञापन पर औसतन 504 करोड़ रुपये सालाना खर्च किया था, वहीं मोदी सरकार में हर साल औसतन 1202 करोड़ की राशि खर्च की गई है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

न्यूज़ चैनल अब जनता के नहीं, सरकार के हथियार हैं

2019 का चुनाव जनता के अस्तित्व का चुनाव है. उसे अपने अस्तित्व के लिए लड़ना है. जिस तरह से मीडिया ने इन पांच सालों में जनता को बेदख़ल किया है, उसकी आवाज़ को कुचला है, उसे देखकर कोई भी समझ जाएगा कि 2019 का चुनाव मीडिया से जनता की बेदख़ली का आख़िरी धक्का होगा.