विपक्ष

19 जून को सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

सरकार कह रही है कि यह राजनीति का समय नहीं, लेकिन वह ख़ुद क्या कर रही है

मुख्य विपक्षी दल के सवाल करने को उसकी क्षुद्रता बताया जा रहा है. 20 सैनिकों के मारे जाने के बाद कहा गया कि बिहार रेजीमेंट के जवानों ने शहादत दी, यह बिहार के लोगों के लिए गर्व की बात है. अन्य राज्यों के जवान भी मारे गए, उनका नाम अलग से क्यों नहीं? सिर्फ बिहार का नाम क्यों? क्या यह क्षुद्रता नहीं?

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

मोदी 2.0 के पहले साल में लोकतंत्र को ही क्वारंटीन कर दिया गया है

लोकतंत्र के प्रति मोदी सरकार का निरादर भाव काफी गहरा और व्यापक है और यह हर उस संस्था तक फैल चुका है, जिसका काम कार्यपालिका की शक्ति पर अंकुश लगाकर उसे नियंत्रण में रखना है.

**EDS: VIDEO GRAB** New Delhi: Congress chief Sonia Gandhi chairs a meeting with leaders of opposition parties via video conferencing, in New Delhi, Friday, May 2020. Twenty-two opposition parties urged the Centre to immediately declare the devastation caused by Cyclone Amphan in Odisha and West Bengal as a national calamity and called for substantially helping the states in facing the impact of the disaster. (PTI Photo)

केंद्र सरकार ने लोकतांत्रिक होने का दिखावा करना भी छोड़ दिया है : सोनिया गांधी

कोविड-19 संकट के मद्देनज़र कांग्रेस द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मौजूदा सरकार के पास कोई समाधान नहीं होना चिंता की बात है, लेकिन उनके मन में ग़रीबों और कमज़ोर वर्गों के प्रति करुणा न होना हृदयविदारक है.

(फोटो साभार: ट्विटर/@AnjaliB_)

लॉकडाउन के दौरान 29 में से 21 सूचना आयोग आरटीआई मामलों की कोई सुनवाई नहीं कर रहे

सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 11 सूचना आयोगों की वेबसाइट पर लॉकडाउन में कामकाज के संबंध में कोई भी नोटिफिकेशन उपलब्ध नहीं था. बिहार, मध्य प्रदेश और नगालैंड राज्य सूचना आयोगों की वेबसाइट ही काम नहीं कर रही थी.

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कोरोना संकट के बीच बदले की राजनीति कर रही है सरकार: कन्हैया कुमार

वीडियो: कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच स्वास्थ्य आपातकाल के दौर में विपक्ष की भूमिका क्या होनी चाहिए, इस बारे में सीपीआई नेता कन्हैया कुमार से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

लॉकडाउन: देश भर के सूचना आयोगों की स्थिति बदहाल, कब शुरू होगी सुनवाई, कुछ पता नहीं

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के टेलिफोनिक सर्वे में ये जानकारी सामने आई है कि देश के अधिकतर सूचना आयोग एकाध स्टाफ के सहारे काम कर रहे हैं. अधिकतर आयोगों के ऑफिस नंबर या हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने पर किसी ने जवाब नहीं दिया.

केंद्रीय सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी. (फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रपति के सचिव संजय कोठारी केंद्रीय सतर्कता आयुक्त नियुक्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय चयन समिति ने फरवरी में राष्ट्रपति के सचिव संजय कोठारी के नाम की अनुशंसा की थी. उस समय कांग्रेस ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के लिए अपनाई प्रक्रिया को ‘गैरकानूनी और असंवैधानिक’ बताया था और फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की थी.

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मोदी सरकार ने नए सीवीसी और सीआईसी की नियुक्ति की, चयन प्रक्रिया पर उठ रहे कई सवाल

आलम ये है कि चयन समिति के एक सदस्य वित्त सचिव राजीव कुमार ने भी सीवीसी पद के लिए आवेदन किया था और उन्हें इसके लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था.

भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े. (फोटो साभार/फेसबुक)

गांधी का स्‍वतंत्रता संघर्ष ‘नाटक’ था, ऐसे लोग हमारे देश में महात्मा बन गए: भाजपा सांसद

आपत्तिजनक बयानों को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास पढ़ने पर मेरा खून खौलता है.

(फोटो: पीटीआई)

आरटीआई संशोधन क़ानून को चुनौती देने वाली जयराम रमेश की याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अपनी याचिका में कहा है कि आरटीआई क़ानून में संशोधन करने का मुख्य उद्देश्य आरटीआई के तहत बने संस्थानों को प्रभावित करना है ताकि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर काम न कर पाएं.

Chennai: Union Law and IT Minister Ravi Shankar Prasad addresses a press conference on CAA and NRC issue at state BJP office, in Chennai, Thursday, Jan. 9 ,2020. (PTI Photo/R Senthil Kumar)  (PTI1_9_2020_000233B)

तीन तलाक़ बिल के लिए क़ानून मंत्रालय ने किया नियमों का उल्लंघन: आरटीआई

वीडियो: द वायर द्वारा आरटीआई के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि कानून मंत्रालय ने तीन तलाक़ बिल पर किसी भी मंत्रालय या विभाग से विचार-विमर्श नहीं किया था. इसके लिए मंत्रालय ने दलील दी थी कि तीन तलाक़ की अनुचित प्रथा को रोकने की जल्द ज़रूरत है, इसलिए संबंधित मंत्रालयों से परामर्श नहीं लिया गया.

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क़ानून मंत्रालय ने तीन तलाक़ बिल पर किसी भी मंत्रालय या विभाग से नहीं किया था विचार-विमर्श

विशेष रिपोर्ट: आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों से पता चलता है कि मंत्रालय ने दलील दी थी कि तीन तलाक़ की अनुचित प्रथा को रोकने की अति-आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संबंधित मंत्रालयों से परामर्श नहीं लिया गया.

फोटो: रॉयटर्स

हिंसा अदालत को सोचने से रोक रही है, लेकिन हिंसा हो कैसे रही है?

हिंसा के सबसे ज्यादा, सबसे ताकतवर और कारगर हथियार किसके पास हैं? किसके पास एक संगठित शक्ति है जो हिंसा कर सकती है? उत्तर प्रदेश में किसने आम शहरियों के घर-घर घुसकर तबाही की? किसने कैमरे तोड़कर चेहरे ढंककर लोगों को मारा? गोलियां कहां से चलीं? अदालत से यह कौन पूछे और कैसे? जब उसके पास ये सवाल लेकर जाते हैं तो वह हिंसा से रूठ जाती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

‘राष्ट्रविरोधी’ व्यवहार बढ़ाने वाली सामग्री को लेकर टीवी चैनलों को सरकार की दूसरी चेतावनी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 11 दिसंबर को जारी पहले परामर्श की निंदा करते हुए एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से इसे वापस लेने का अनुरोध किया था. दूसरा परामर्श जारी होने बाद तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह सूचना पहुंचाने वाले को ही सजा देना है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

चैनलों को ‘राष्ट्रविरोधी’ सामग्री के प्रसारण संबंधी दिया परामर्श वापस ले सरकार: एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड का कहना है कि देश में हो रही घटनाओं की ज़िम्मेदार कवरेज के लिए मीडिया की प्रतिबद्धता पर इस तरह के परामर्श से सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए. सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी टीवी चैनलों से कहा था कि वे ऐसी सामग्री दिखाने से परहेज करें जो ‘राष्ट्र विरोधी रवैये’ को बढ़ावा दे सकती है.