श्रम एवं रोजगार मंत्रालय

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कोविड-19 लॉकडाउन में 1.14 करोड़ प्रवासी कामगार अपने गृह राज्यों को लौटे: सरकार

इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि पिछले साल कोविड-19 पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों की मौत के बारे में सरकार को कोई जानकारी नहीं है.

Prayagraj: Employees of GPO shout slogans during the nationwide strike by ten central trade unions against various policies of the NDA government, in Prayagraj, Thursday, Nov. 26, 2020. (PTI Photo)(PTI26-11-2020 000108B)

आर्थिक नीतियों के विरोध में श्रमिक संगठनों की हड़ताल, श्रम क़ानूनों को वापस लेने की मांग

केंद्र सरकार की आर्थिक और मजदूर विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ मज़दूर संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का विभिन्न हिस्सों में व्यापक असर देखने को मिला. इससे अलग वितरण कंपनियों के निजीकरण के ख़िलाफ़ बिजली कर्मचारियों ने भी देशभर में प्रदर्शन किया. आरएसएस से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ विरोध में शामिल नहीं रहा.

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श्रम मंत्रालय ने काम के अधिकतम घंटे 10.5 से बढ़ाकर 12 घंटे करने का प्रस्ताव रखा

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतम कार्यदिवस को बढ़ाने से कामगारों पर विपरित प्रभाव पड़ सकता है. आशंका है कि अगर यह प्रस्ताव नियोक्ताओं को तीन पालियों के स्थान पर दो पालियों में काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा तो रोजगार की संख्या में भी गिरावट हो सकती है.

Migrant workers, who work in textile looms, are seen outside a loom after it was shut due to the 21-day nationwide lockdown to slow the spread of the coronavirus disease, in Bhiwandi on the outskirts of Mumbai, India, April 1, 2020. Photo: Reuters/Francis Mascarenhas/Files

300 कर्मचारियों वाली फर्म बिना सरकारी मंज़ूरी के कर्मचारियों को रख-निकाल सकेंगी, विधेयक पेश

बीते हफ़्ते लोकसभा में श्रम सुधारों को लेकर तीन विधेयक पेश किए गए हैं, जिसमें कर्मचारियों के आचरण, उन्हें मिलने वाली सुविधाओं, हड़ताल पर जाने, अप्रवासी श्रमिकों और नियोक्ता के अधिकारों जैसे कई बदलाव प्रस्तावित हैं. विपक्ष द्वारा इन्हें लेकर सवाल उठाए गए हैं.

Workers walk in front of the construction site of a commercial complex on the outskirts of the western Indian city of Ahmedabad, in this April 22, 2013 file picture. While India has long suffered from a dearth of workers with vocational skills like plumbers and electricians, efforts to alleviate poverty in poor, rural areas have helped stifle what was once a flood of cheap, unskilled labour from India's poorest states. Struggling to cope with soaring food prices, this dwindling supply of migrant workers are demanding - and increasingly getting - rapid increases in pay and benefits. To match story INDIA-ECONOMY/INFLATION REUTERS/Amit Dave/Files (INDIA - Tags: BUSINESS CONSTRUCTION EMPLOYMENT TPX IMAGES OF THE DAY)

श्रम मंत्रालय ने मज़दूरी संहिता नियमों का मसौदा जारी किया, सितंबर तक लागू होने की उम्मीद

मज़दूरी संहिता विधेयक, 2019 में मज़दूरी, बोनस और उससे जुड़े मामलों से जुड़े क़ानून को संशोधित और एकीकृत किया गया है. राज्यसभा ने इसे दो अगस्त 2019 और लोकसभा ने 30 जुलाई, 2019 को पारित कर दिया था.

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साल 2014 से 2019 के बीच 114 कंपनियां बंद, करीब 16,000 लोग प्रभावित

बसपा सांसद दानिश अली के सवाल पर श्रम और रोजगार राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने बीते 25 नवंबर 2019 को लोकसभा में ये जानकारी दी.

भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल. (फोटो: साभार: फेसबुक)

बड़ी संख्या में सरकारी नौकरी पैदा करना मुश्किल: भाजपा प्रवक्ता

भाजपा के आर्थिक मामलों के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि भारत में नए रोज़गार चाहने वालों की संख्या बहुत अधिक है. इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को नई सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती. इसीलिए हमारा ज़ोर उद्यमिता और स्व-रोज़गार पर है.

Labour The Wire

मालिकों के हित में श्रम कानून बदलना चाहती है केंद्र सरकार: मज़दूर संगठन

संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड के ज़रिये सरकार मज़दूरों के हड़ताल और विरोध करने के बुनियादी अधिकारों को छीनना चाहती है.