संघ

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अयोध्या: इंसाफ के बजाय इंसाफ से फासला बढ़ाने वाला फ़ैसला

सुप्रीम कोर्ट भी विवादित भूमि रामलला को देते हुए यह नहीं सोचा कि उसका फ़ैसला न सिर्फ छह दिसंबर, 1992 के ध्वंस बल्कि 22-23 दिसंबर, 1949 की रात मस्जिद में मूर्तियां रखने वालों की भी जीत होगी. ऐसे में अदालत का इन दोनों कृत्यों को ग़ैर-क़ानूनी मानने का क्या हासिल है?

New Delhi: A group photo of the five-judge bench comprised of Chief Justice of India Ranjan Gogoi (C) flanked by (L-R) Justice Ashok Bhushan, Justice Sharad Arvind Bobde, Justice Dhananjaya Y Chandrachud, Justice S Abdul Nazeer after delivering the verdict on Ayodhya land case, at Supreme Court in New Delhi, Saturday, Nov. 9, 2019. (PTI Photo) (PTI11_9_2019_000298B)

क्या अयोध्या मामले में न्याय को तरजीह नहीं दी गई?

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि ज़मीन विवाद में ‘सार्वजनिक शांति और सौहार्द’ बनाए रखने के लिए विवादित ज़मीन को न बांटने का जजों का निर्णय बहुसंख्यक दबाव से प्रभावित लगता है, जिसमें मुस्लिम पक्षकारों के क़ानूनी दावे को नज़रअंदाज़ कर दिया गया.

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अयोध्या के फ़ैसले पर दोबारा विचार करे अदालत

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित ज़मीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा ख़ारिज करते हुए हिंदू पक्ष को ज़मीन देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से हिंदुस्तान की राजनीति और समाज में क्या बदलाव आएगा, इस पर चर्चा कर रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद.

Ayodhya: FILE - In this Oct. 29, 1990, file photo, Indian security officer guards the Babri Mosque in Ayodhya, closing off the disputed site claimed by Muslims and Hindus. India’s top court is expected to pronounce its verdict on Saturday, Nov. 9, 2019, in the decades-old land title dispute between Muslims and Hindus over plans to build a Hindu temple on a site in northern India. In 1992, Hindu hard-liners demolished a 16th century mosque in Ayodhya, sparking deadly religious riots in which about 2,000 people, most of them Muslims, were killed across India. AP/PTI(AP11_9_2019_000012B)

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला विचित्र तर्क पर आधारित है

यह सोचना मूर्खतापूर्ण है कि अयोध्या पर आया फ़ैसला सांप्रदायिक सद्भाव लाएगा. 1938 के म्यूनिख समझौते की तरह तुष्टीकरण सिर्फ आक्रांताओं की भूख को और बढ़ाने का काम करता है.

फाइल फोटो: संदीप शंकर

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के भारत के भविष्य के लिए क्या मायने हैं?

शनिवार को शीर्ष अदालत ने उन लोगों के पक्ष में फ़ैसला दिया, जो सीधे तौर पर बाबरी मस्जिद गिराने के मुख्य आरोपियों से जुड़े हुए हैं. और यह देश के लिए ठीक नहीं है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi offers flower petals at Mahatma Gandhi bust, at the Sabarmati Ashram, in Ahmedabad, Gujarat on June 29, 2017.

क्या प्रधानमंत्री मोदी गांधी के विचारों की हत्या कर रहे हैं?

गांधी के विचार उनकी मृत्यु के बाद भी संघ की कट्टरता की विचारधारा के आड़े आते रहे, इसलिए अपने पहले कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी के सारे मूल्यों को ताक में रखकर उनके चश्मे को स्वच्छता अभियान का प्रतीक बनाकर उन्हें स्वच्छता तक सीमित करने का अभियान शुरू कर दिया था.

मारे गए शिक्षक बंधु प्रकाश पाल, उनकी पत्नी और बेटा. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

बीमा पॉलिसी को लेकर मुर्शिदाबाद परिवार की हुई हत्या, 20 वर्षीय पड़ोसी गिरफ़्तार: पुलिस

पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय उत्पल बेहरा ने बंधु प्रकाश पाल और उनके परिवार की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि पाल ने उसे गाली दी थी और उसके बीमे की दूसरी किस्त की रसीद देने से इनकार कर दिया था.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi paying respects to Dr. Babasaheb Ambedkar, at Chaitya Bhoomi, in Mumbai on October 11, 2015. 
The Governor of Maharashtra, Shri C. Vidyasagar Rao, the Chief Minister of Maharashtra, Shri Devendra Fadnavis and the Union Minister for Road Transport & Highways and Shipping, Shri Nitin Gadkari and other dignitaries are also seen.

मोदी ख़ुद को आंबेडकर का ‘शिष्य’ बताते हैं, लेकिन मनु पर दोनों के नज़रिये में फ़र्क़ दिखता है

पुस्तक अंश: मोदीनामा किताब का पांचवां अध्याय ‘मनु का सम्मोहन’ बताता है कि भारत के संविधान के ऐलान को डाॅ. आंबेडकर ने मनु के शासन की समाप्ति कहा था, बावजूद इसके मनु की वापसी हो रही है.

मारे गए शिक्षक बंधु प्रकाश पाल, उनकी पत्नी और बेटा. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

पश्चिम बंगाल: मुर्शिदाबाद में मारे गए शिक्षक के परिवार ने कहा, किसी दल से कोई संबंध नहीं

मुर्शिदाबाद ज़िले में एक शिक्षक बंधु गोपाल पाल के परिवार की नृशंस हत्या के बाद भाजपा ने राज्य की टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि बंधु पार्टी के कार्यकर्ता थे. बंधु के परिजनों का कहना है कि दोनों दल इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं.

हरियाणा के कैथल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (फोटो: ट्विटर)

2024 से पहले सभी घुसपैठियों को चुन-चुन के देश से बाहर निकाल देंगे: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के कैथल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि सत्तर वर्षों से घुसपैठियों ने देश की सुरक्षा को चुनौती दी है. एनआरसी के जरिए भाजपा सरकार सभी घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है.

New Delhi: Home Minister Amit Shah looks on during the 'Hindi Divas Samaroh' in New Delhi, Saturday, Sept. 14, 2019. Hindi Divas is observed to mark the decision of the Constituent Assembly to extend official language status to Hindi on this day in 1949. Hindi Divas was first observed in 1953. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI9_14_2019_000073B)

अमित शाह की एनआरसी योजना का मक़सद सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है

भाजपा मतदाताओं का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने के लिए बेताब है. ऐसे में एनआरसी का इस्तेमाल भारत का ध्रुवीकरण करने के लिए इस तरह से किया जा सकता है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों की काट के लिए गुजरात के ‘खाम’ को दोहराना होगा

गुजरात का विकास मॉडल एक भ्रम था. गुजरात दंगों के बाद मुस्लिम को अलग-थलग करने का जो प्रयोग शुरू हुआ, मोदी-शाह उसी के सहारे केंद्र में सत्ता में आए. आज यही गुजरात मॉडल सारे देश में अपनाया जा रहा है. 370 का मुद्दा उसी प्रयोग की अगली कड़ी है, जिसे मोदी शाह महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में भुनाने जा रहे हैं.

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अभी गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी है?

आज हमारे सामने ऐसे नेता हैं जो केवल तीन काम करते हैं: वे भाषण देते हैं, उसके बाद भाषण देते हैं और फिर भाषण देते हैं. सार्वजनिक राजनीति से करनी और कथनी में केवल कथनी बची है. गांधी उस कथनी को करनी में तब्दील करने के लिए ज़रूरी हैं.

बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो : पीटीआई)

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोंसाल्विस से पूछा, ‘आपने घर पर ‘वार एंड पीस’ किताब क्यों रखी थी?’

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी वर्णन गोंसाल्विस और अन्य की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ‘वार एंड पीस’ जैसी किताबें राज्य के खिलाफ सामग्री की ओर इशारा करते हैं. ‘वार एंड पीस’ रूस के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्सटॉय का उपन्यास है.

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आरक्षण पर पक्ष और विपक्ष वालों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए बयान पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ग़रीबों के अधिकारों पर हमला, संविधान सम्मत अधिकारों को कुचलना, दलितों-पिछड़ों के अधिकार छीनना…यही असली भाजपाई एजेंडा है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 71st Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2017.

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जो झंडे गाड़े हैं, तिरंगा उनका रूप नहीं लगता

क्या भगवा झंडे के समर्थक संघ और संघ से जुड़े किसी भी व्यक्ति या दल की तिरंगे के प्रति ईमानदारी पर विश्वास किया जा सकता है?

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अगर तिरंगा फहराना ही देशभक्ति है तो संघ पंद्रह साल पहले ही देशभक्त हुआ है

आज़ादी के 72 साल: क्या 2002 के पहले तिरंगा भारतीय राष्ट्र का राष्ट्रध्वज नहीं था या फिर आरएसएस खुद अपनी आज की कसौटी पर कहें तो देशभक्त नहीं था?

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

न सॉफ्ट हिंदुत्व और न ही सॉफ्ट सेकुलरिज़्म कांग्रेस को उबार सकते हैं

आज कांग्रेस के सामने चुनौती पार्टी का कायाकल्प ऐसे दल के तौर पर करने की है, जो अपने पुराने वैभव और साम्राज्य के बिखर जाने की टीस से बाहर निकलकर यह कबूल करे कि अब उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है और बचाव की मुद्रा से बाहर निकलकर आक्रामक अंदाज़ में खेलना शुरू करे.

Varanasi: BJP workers celebrate party's lead in the Lok Sabha elections 2019, in Varanasi, Thursday, May 23, 2019. (PTI Photo) (PTI5_23_2019_000087B)

विपक्ष को विनम्रता से स्वीकारना चाहिए कि वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर विकल्प देने में असमर्थ रहे हैं

लोकसभा चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि तात्कालिक आर्थिक स्थितियां परिणामों को निर्धारित करनेवाला एकमात्र कारक नहीं होतीं, लोग अपने निर्णय उपलब्ध विकल्पों के आधार पर तय करते हैं.

माओवादियों से संबंध और प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश के आरोप में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन महेश राउत और रोना विल्सन (बाएं से दाएं)

भीमा कोरेगांव: सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के एक साल बाद…

कार्यकर्ताओं के वकीलों का कहना है कि पुलिस की ओर से गिरफ़्तारी के बाद से ही मामले को लटकाने और बचाव पक्ष के जानकारियों तक पहुंचने के हर प्रयास को विफल करने की कोशिश की जा रही है.

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती. (फोटो: पीटीआई)

राम मंदिर को लेकर जनता को मूर्ख बना रही है केंद्र सरकार: स्वामी स्वरूपानंद

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ के नारों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आक्रोशित प्रतिक्रिया पर द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इसे राम के ख़िलाफ़ उनके विरोध के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. ममता राम का विरोध नहीं कर रहीं बल्कि भाजपा का विरोध कर रही हैं.

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो साभार: ट्विटर)

कांग्रेस की पराजय के पीछे क्या कारण हैं?

लोकसभा चुनाव के नतीजे आ जाने के बाद देश में दिलचस्प बहस शुरू हो गई है कि कांग्रेस का क्या हो. कुछ लोग पार्टी की समाप्ति चाहते हैं. कई दूसरे लोग राहुल गांधी को उसके अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

कांग्रेस की मौत की कामना करना कितना उचित है?

पिछले पांच साल से देश को कांग्रेसमुक्त करने का आह्वान भाजपा नेताओं के द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन न सिर्फ यह कि वह अप्रासंगिक नहीं हुई, बल्कि इस चुनाव में भी भाजपा के लिए वही संदर्भ बिंदु बनी रही. जनतंत्र की सबसे अधिक दुहाई देनेवाले समाजवादियों को जनसंघ या भाजपा के साथ कभी वैचारिक या नैतिक संकट हुआ हो, इसका प्रमाण नहीं मिलता.

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)

‘यह गांधी कौन था?’ ‘वही, जिसे गोडसे ने मारा था’

जब गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जाएगा कि उस वीर ने गांधी को मार डाला था. गांधी गोडसे के बहाने याद किए जाएंगे. अभी तक गोडसे को गांधी के बहाने याद किया जाता था. एक महान पुरुष के हाथों मरने का कितना फायदा मिलेगा गांधी को.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर और दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

प्रज्ञा ठाकुर के माध्यम से भाजपा किसकी आकांक्षा का प्रतिनिधित्व कर रही है

क्या वाकई देश का हिंदू अब इस अवस्था को प्राप्त कर चुका है जहां उसके इंसानी और नागरिक बोध का प्रतिनिधित्व प्रज्ञा ठाकुर जैसों के रूप में होगा?

रामदास अठावले. (फोटो साभार: ट्विटर)

मालेगांव धमाके में एटीएस के पास प्रज्ञा के ख़िलाफ़ सबूत थे, टिकट दिया जाना गलत: रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि लोगों को बचाने के लिए आतंकियों से लड़ते हुए करकरे शहीद हो गए थे. मैं करकरे को लेकर साध्वी के बयान से सहमत नहीं हूं. हम इसकी आलोचना करते हैं. यह फैसला करना अदालत का काम है कि क्या सही है और क्या गलत. अगर हमारी पार्टी की बात होती तो हम उन्हें नहीं खड़ा करते.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

दूरदर्शन ने सीपीआई के चुनावी भाषण से ‘आरएसएस’ शब्द हटाने को कहा, पार्टी ने किया इनकार

सीपीआई की ओर से कहा गया है कि दूरदर्शन ने भाषण से ‘आरएसएस’ एवं ‘फासीवादी विचारधारा’ जैसे शब्दों को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए हटाने के लिए कहा है. पार्टी ने कहा कि मोदी सरकार के इशारे पर ऐसी पक्षपातपूर्ण कार्रवाई हो रही है.

(फोटो: पीटीआई)

लोकतंत्र और संविधान से संघ-भाजपा का प्रयोग

लोकसभा चुनावों के बाद अगर मोदी सरकार वापस सत्ता में नहीं भी आती है तो भी राजनीति के मानदंड इतने बिगड़ चुके हैं कि समाज में स्थिरता और शांति आने में लंबा वक़्त लग सकता है.

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के गेट पर एक विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो: पीटीआई)

एएमयू को लेकर विवाद ज़रूर नया है पर षड्यंत्र वही पुराना है

इस समय इरादा मुसलमानों से जुड़ी हर जगह को संदिग्ध बनाने का है. उसका तरीक़ा है उन्हें विवादित बनाना. एक बार कुछ भी विवादित हो जाए तो उसमें दूसरा पक्ष जायज़ हो जाता है, जैसे बाबरी मस्जिद को विवादित बनाकर अब संघ के संगठन एक जायज़ पक्षकार बन बैठे हैं.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अपूर्वानंद की मास्टरक्लास: बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर राजनीतिक पाप है

आज की मास्टरक्लास में अपूर्वानंद द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के साथ बाबरी मस्जिद और इसके विवादित स्थल पर मंदिर बनाए जाने के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती. (फोटो: पीटीआई)

राम मंदिर के लिए हिंदुओं को गोली खाने के लिए तैयार रहना चाहिए: शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने तीन दिवसीय ‘परम धर्म संसद’ में राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के लिए 21 फरवरी की तारीख की घोषणा करते हुए कहा कि अंकोरवाट मंदिर की तरह अयोध्या में एक भव्य मंदिर बनेगा और बाद में उसे वेटिकन सिटी की तरह दर्जा दिया जाएगा.

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अपूर्वानंद की मास्टरक्लास: गांधी हत्या या गांधी वध?

आज की मास्टर क्लास में अपूर्वानंद उन लोगों के बारे में चर्चा कर रहे हैं जिन्हें गांधी हत्या को गांधी वध कहने में संकोच नहीं होता.

फिल्म निर्देशक प्रियनंनद. (फोटो साभार: विकिपीडिया कॉमन्स)

फेसबुक पोस्ट को लेकर मलयालम फिल्म निर्देशक पर हमला, भाजपा-संघ कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता मलयाली निर्देशक प्रियनंदन ने फेसबुक पर केरल स्थित सबरीमला मंदिर को लेकर एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी. विवाद के बाद उन्होंने यह पोस्ट हटा दिया था.

Nagpur: RSS chief Mohan Bhagwat addresses the Vijay Dashmi function at RSS headquaters in Nagpur, Maharashtra, Thursday, Oct 18, 2018. (PTI Photo) (PTI10_18_2018_000036)

युद्ध नहीं हो रहे, तो जवान शहीद क्यों हो रहे हैं: मोहन भागवत

आरटीआई के जरिए गृह मंत्रालय से मिले आंकड़े बताते हैं कि मई, 2014 से मई, 2017 तक में सिर्फ जम्मू कश्मीर में 812 आतंकी घटनाएं हुईं. इन घटनाओं में 62 नागरिक मारे गए, जबकि 183 जवान शहीद हो गए.

नितिन गडकरी और नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

क्या संघ नरेंद्र मोदी के बाद नितिन गडकरी पर दांव लगाने की सोच रहा है?

मोदी और शाह की जोड़ी आसानी से मंच छोड़ने वाली नहीं है. भाजपा के भीतर और मतदताओं के बीच नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अभी भी बरक़रार है. नितिन गडकरी क्या कोई भी नेता लोकप्रियता या भाषण कला के मामले में उनके बराबर नहीं है. यह जोड़ी सुनिश्चित करेगी कि गडकरी अपनी हद में ही रहें, साथ ही उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की हर मुमकिन कोशिश करेगी.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi being felicitated by Bharatiya Janata Party leaders L K Advani, Party President Amit Shah, Rajnath Singh and Sushma Swaraj during BJP Parliamentary Party meeting, in New Delhi on Tuesday, July 31, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI7_31_2018_000025B)

2019 का चुनाव सिर्फ कांग्रेस ही नहीं संघ और भाजपा के बचे-खुचे नेताओं का भी अस्तित्व तय करेगा

संघ के लिए केंद्र में सत्ता मंज़िल की सीढ़ी है, अपने आप में मंज़िल नहीं. उसने भाजपा को दो से अस्सी सीट पर पहुंचाने वाले, राम मंदिर मुद्दे के पुरोधा लालकृष्ण आडवाणी को किनारे कर मोदी के लिए हामी भरने में कोई देरी नहीं की. वो कभी ऐसे किसी भी नेता को मंज़ूर नहीं करेगा जो उसकी विचारधारा और ताक़त से ज़्यादा कद्दावर दिखने लगे.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

लोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार अपने कार्यकाल में राम मंदिर निर्माण कराएगी: संघ

नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर पर अध्यादेश को लेकर दिए गए बयान पर विहिप ने कहा कि राम मंदिर पर फैसले के लिए अनंतकाल तक इंतज़ार नहीं कर सकते हिंदू. शिवसेना ने कहा कि क्या मोदी के लिए क़ानून भगवान राम से भी बड़ा है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए

‘अगर आप एक नेता हैं और आपकी नज़रों के सामने बड़ी संख्या में लोगों का क़त्ल किया जाता है, तब आप लोगों की ज़िंदगी बचा पाने में नाकाम रहने की जवाबदेही से मुकर नहीं सकते.’