संबित पात्रा

संबित पात्रा और राहुल गांधी. (फोटो साभार: फेसबुक)

राहुल गांधी और पार्टी ने कभी ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया: कांग्रेस

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भगवा आतंकवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं की बयानबाज़ी पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी को देश से माफ़ी मांगने को कहा है.

Modi-Rahul PTI

फेसबुक डेटा चोरी मामले में कांग्रेस और भाजपा जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से डेटा चोरी के आरोपों का सामना कर रही कैंब्रिज एनालिटिका से अपने-अपने चुनावी अभियान में मदद ले चुकी हैं.

Episode 40

मीडिया बोल, एपिसोड 40: किसान का दर्द और टीवी में पार्टी-एंकर

मीडिया बोल की 40वीं कड़ी में उर्मिलेश मुंबई में किसान रैली और समाचार चैनल आज तक पर एंकरिंग करने वाले भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा पर नेशनल हेराल्ड समूह की सीनियर एडिटर भाषा सिंह और आज तक के पूर्व एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर अमिताभ श्रीवास्तव से चर्चा कर रहे हैं.

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा. (फाइल साभार: ट्विटर)

ओएनजीसी में संबित पात्रा की नियुक्ति के ख़िलाफ़ याचिका पर केंद्र को सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी ओएनजीसी में भाजपा के प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा को स्वतंत्र निदेशक बनाने के मामले में दख़ल देने से इनकार कर दिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

आपने कहा था आप प्रधान सेवक हैं, संबित कह रहे आप देश के बाप हैं

मैं गुजरात चुनाव का नतीजा आने से पहले लिख रहा हूं. आप भले चाहें जितना चुनाव जीतें, लेकिन आप अपने भाषणों में हर दिन हार रहे हैं.

Gujarat Assembly Election (1)

गुजरात राज्य पेट्रोलियम कॉरपोरेशन में 30,651 करोड़ का घोटाला: कांग्रेस

सरकारी खजाने को 19,576 करोड़ का लगाया चूना. नजदीकी अधिकारियों को नवाजे गए ऊंचे पद. विदेशी मुद्रा के नाम पर 10,651 करोड़ बाहर ले जाया गया और गुम हो गया.

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फिर फर्ज़ी ख़बर फैलाते पाए गए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा

सोशल मीडिया पर भारतीय सैनिकों की फर्ज़ी तस्वीर और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का फर्ज़ी वीडियो साझा करने के बाद संबित पात्रा एक बार फिर झूठी ख़बर फैलाते हुए पाए गए हैं.

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हमारे न्यूज़ चैनल तू-तू, मैं-मैं पर क्यों उतर आए हैं?

न्यूज़ चैनल हर विषय पर दलीय प्रवक्ताओं की भीड़ क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं? क्या वे राजनीतिक दलों, ख़ासकर सत्ताधारी दल को हर मुद्दे पर अपना फोरम मुहैया कर खुश रखने की कोशिश करते हैं?