संयुक्त राष्ट्र

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

साल के मध्य तक आठ करोड़ से ज्यादा लोग हुए विस्थापित, कोविड-19 से स्थिति हुई गंभीर: यूएनएचसीआर

शरणार्थियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि पहले से चल रहे और हालिया संघर्ष की स्थिति तथा कोरोना महामारी के कारण 2020 में लोगों के जीवन पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ा. विस्थापन के लिए मजबूर हुए 7.95 करोड़ लोगों में 3.4 करोड़ बच्चे थे.

(फोटो: पीटीआई)

महामारी के कारण 2030 तक एक अरब से ज़्यादा लोग घोर ग़रीबी की ओर जा सकते हैं: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 के प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया काफी लंबे समय तक चलेगी. कोविड-19 एक अहम पड़ाव है और विश्व के नेता अभी जो निर्णय लेंगे, उससे विश्व की दिशा बदल सकता है.

New Delhi: Farmers at Singhu border during their ongoing protest march Delhi Chalo against Centres new farm laws, in New Delhi, Sunday, Nov. 29, 2020. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI29-11-2020 000032B)

किसान आंदोलन: यूएन प्रमुख और ब्रिटिश सांसदों ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार

केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में बीते 26 नवंबर से किसानों का प्रदर्शन जारी है. भारत ने किसान प्रदर्शनों के बारे में दुनियाभर के नेताओं और वैश्विक संस्थाओं की टिप्पणियों को ‘भ्रामक’ और ‘गैर जरूरी’ बताया है और कहा है कि यह एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से जुड़ा विषय है.

FILE PHOTO: Nobel Peace Prize laureate, Yazidi activist Nadia Murad gestures while talking to the people during her visit to Sinjar, Iraq December 14, 2018. REUTERS/Ari Jalal

महामारी के दौरान महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा और तस्करी की घटनाएं बढ़ीं: नोबेल पुरस्कार विजेता

मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित नादिया मुराद ने संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं. यहां तक कि कई महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी बाधित हो गई है.

फुमजिले म्लाम्बो नगकुका. (फोटो: रॉयटर्स)

शांति वार्ताओं में 20 साल बाद भी महिलाओं की समान भागीदारी नहीं: संयुक्त राष्ट्र एजेंसी

लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ‘यूएन वुमेन’ की प्रमुख फुमजिले म्लाम्बो नगकुका ने कहा कि महिलाओं को संघर्षों को समाप्त करने के लिए होने वाली वार्ताओं से अब भी सोच-समझकर बाहर रखा जाता है और इन वार्ताओं में पुरुष उनके जीवन को प्रभावित करने वाले फैसले लेते हैं.

Children sitting inside cement water pipes play on the Marina beach in the southern Indian city of Chennai October 10, 2013. REUTERS/Babu

दुनिया का हर छठा बच्चा घोर ग़रीबी में, महामारी से यह संख्या बढ़ने की आशंका: रिपोर्ट

विश्व बैंक और यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों को तुरंत बच्चों को इस संकट से उबारने की योजना बनाने की ज़रूरत है ताकि असंख्य बच्चों और उनके परिवारों को घोर ग़रीबी में जाने से रोका जा सके.

संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त मिशेल बैशलेट (फोटो: रॉयटर्स)

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने भारत में एनजीओ पर प्रतिबंध को लेकर चिंता जताई

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैशलेट ने भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की है. उनकी टिप्पणी पर भारत की ओर से कहा गया है कि मानवाधिकार के नाम पर क़ानून का उल्लंघन माफ़ नहीं किया जा सकता.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

दुनिया भर में दो करोड़ 90 लाख लड़कियां और महिलाएं आधुनिक दासता की शिकार: रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के एक संवाददाता सम्मेलन में दासता के ख़िलाफ़ काम करने वाले संगठन ‘वॉक फ्री’ की सह संस्थापक ग्रेस फ्रोरेस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के साथ किए गए सर्वे से यह निष्कर्ष निकला है कि 130 महिलाओं और लड़कियों में से एक आधुनिक दासता की शिकार है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

संयुक्त राष्ट्र ने हाथरस गैंगरेप पर जताई चिंता, भारत ने कहा- अनुचित और ग़ैरज़रूरी टिप्पणी

भारत में संयुक्त राष्ट्र की स्थायी समन्वयक रेनाटा डेसालिएन ने कहा कि भारत में महिलाओं और बच्चियों के ख़िलाफ़ लगातार हो रही यौन हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र दुखी और चिंतित है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

दुनिया में भ्रष्टाचार की सबसे अधिक मार ग़रीबों पर पड़ी है: संयुक्त राष्ट्र समिति

संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल व सामाजिक कल्याण सेवाओं की गति बढ़ाने के लिए सरकारों ने सख़्ती कम की है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

कोरोना महामारी ने 3.7 करोड़ लोगों को अत्यधिक ग़रीबी में धकेला: बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी की वजह से ग़रीबी कुछ ही महीनों में सात फीसदी बढ़ गई है. अत्याधिक ग़रीबी रेखा से ठीक ऊपर रहने वाले लोग तेज़ी से नीचे गिर रहे हैं. इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोविड-19 का बुरा असर पड़ा है.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोविड-19 से ग़रीबी, भुखमरी और संघर्ष बढ़ने की आशंका: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र के मानवतावादी मामलों के प्रमुख ने अगाह किया कि कमज़ोर देशों में कोविड-19 संकट की वजह से आर्थिक एवं स्वास्थ्य पर पड़ने वाले अप्रत्यक्ष प्रभावों के कारण ग़रीबी बढ़ेगी, औसत आयु कम होगी, भुखमरी बढ़ेगी, शिक्षा की स्थिति ख़राब होगी और अधिक बच्चों की मौत होगी.

Golden Statues at the Trocadero square near the Eiffel tower wear protective masks during the outbreak of the coronavirus disease (COVID-19) in Paris, France, May 2, 2020. REUTERS/Benoit Tessier/File Photo

महामारी से वैश्विक पर्यटन को पांच माह में 320 अरब डॉलर का नुकसान: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि पर्यटन वैश्विक अर्थव्यवस्था का ईंधन है. महामारी की वजह से इस क्षेत्र की आय बुरी तरह प्रभावित हुई है. पर्यटन उद्योग में 12 करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं.

माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता. (फोटो: रॉयटर्स)

सैन्य विद्रोहियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद माली के राष्ट्रपति ने इस्तीफ़ा दिया

पश्चिम अफ्रीकी देश माली में कई महीनों से राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता के इस्तीफ़े की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए विद्रोही सैनिकों ने अप्रत्याशित घटनाक्रम में उनके साथ प्रधानमंत्री बौबोऊ सिस्से को बंधक बना लिया था. इसके बाद कीता ने इस्तीफ़ा देने के साथ संसद को भंग कर दिया.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस. (फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना वायरस महामारी से नए संघर्षों का ख़तरा पैदा होता है: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

महामारी के दौरान शांति क़ायम रखने की चुनौती पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि महामारी से निपटने के लिए दुनिया ने लोगों को लॉकडाउन में रखा, अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद कर दीं, लेकिन वे सशस्त्र संघर्षों को रोक नहीं पाए.