संस्मरण

गजानन माधव मुक्तिबोध (13 नवंबर 1917 – 11 सितंबर 1964)

मुक्तिबोध: उम्र भर जी के भी न जीने का अंदाज़ आया

हरिशंकर परसाई ने मुक्तिबोध को याद करते हुए लिखा कि जैसे ज़िंदगी में मुक्तिबोध ने किसी से लाभ के लिए समझौता नहीं किया, वैसे मृत्यु से भी कोई समझौता करने को तैयार नहीं थे.

Renu

रेणु नहीं हैं, मेरे लिए यह अब भी अख़बारी अफ़वाह है: निर्मल वर्मा

रेणु एथीस्ट नहीं थे. किन्तु वह हाय-हाय करते, छाती पीटते प्रगतिशील लोगों के आडंबर से बहुत दूर थे, जो मनुष्यों की यातना को उसके समूचे जीवन से अलग करके अपने सिद्धांतों की लैबोरेटरी में एक रसायन की तरह इस्तेमाल करते हैं.