सऊदी अरब

Saudi dissident Jamal Khashoggi speaks at an event hosted by Middle East Monitor in London, Sept. 29, 2018. Reuters

सऊदी अरब: पत्रकार जमाल ख़शोगी हत्या मामले में पांच दोषियों को मौत की सजा

अक्टूबर 2018 में द वॉशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल ख़शोगी की तुर्की स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 11 आरोपियों में से पांच को फांसी और तीन को 24 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के पूर्व शीर्ष सलाहकार सहित तीन आरोपियों को दोषमुक्त क़रार दिया गया है.

सऊदी अरब के शहज़ादे मुहम्मद बिन सलमान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पत्रकार जमाल खशोगी. (फोटो: रॉयटर्स/विकिपीडिया)

पत्रकार जमाल ख़शोगी की हत्या के लिए संभवत: दुनिया ज़िम्मेदार: डोनाल्ड ट्रंप

तुर्की की ओर से कहा गया है कि जमाल ख़शोगी हत्याकांड के प्रति आंखें मूंदना चाह रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. जमाल ख़शोगी की बीते दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल शहर स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी.

सऊदी अरब के शहज़ादे मोहम्मद बिन सलमान और पत्रकार जमाल ख़शोगी. (फोटो रॉयटर्स/विकिपीडिया)

सीआईए ने जमाल ख़शोगी की हत्या के पीछे सऊदी अरब के शहज़ादे का हाथ बताया: रिपोर्ट

बीते दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में दाख़िल होने के बाद से जमाल ख़शोगी लापता हो गए थे. दूतावास में ही उनकी हत्या कर दी गई थी. द वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह तय है कि सऊदी अरब के शहज़ादे के बिना जानकारी या संलिप्तता के यह नहीं हुआ.

Saudi dissident Jamal Khashoggi speaks at an event hosted by Middle East Monitor in London, Sept. 29, 2018. Reuters

सऊदी अरब ने माना, तुर्की स्थित उसके दूतावास में पत्रकार जमाल ख़शोगी की मौत हो गई

पिछले दो अक्टूबर से लापता थे द वॉशिंगटन पोस्ट में कॉलम लिखने वाले पत्रकार जमाल ख़शोगी. आख़िरी बार तुर्की स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में देखा गया था. पत्रकार की मौत होने की आशंका से सऊदी अरब लगातार कर रहा था इनकार.

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लापता पत्रकार जमाल ख़शोगी की कोई सूचना नहीं, इस्तांबुल में सऊदी दूतावास की दोबारा तलाशी

द वॉशिंगटन पोस्ट सहित कई मीडिया इकाइयों के लिए लिखने वाले पत्रकार जमाल ख़शोगी की हत्या होने की आशंका. दो अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल शहर स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में दाख़िल होने के बाद से लापता हैं.

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क्या फिलिस्तीन को लेकर भारत अपनी ही बातों से पीछे हट गया है?

फिलिस्तान पर मोदी सरकार के बदले रुख़ का अर्थ यह है कि इज़रायल के फिलिस्तीनी ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़े को लेकर भारत का रवैया नरम हो गया है.

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शौर्य डोभाल की तरह हर भारतीय को पाकिस्तानियों के साथ काम करने की छूट दे भाजपा सरकार

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(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

क्या मोदी सरकार के मंत्री अजीत डोभाल के बेटे के संस्थान को फ़ायदा पहुंचा रहे हैं?

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‘सूफ़ी इस्लाम की लोकप्रियता से डरे हुए हैं आतंकी’

पाकिस्तान में सहवान शरीफ़ और अलग-अलग सूफ़ी दरगाहों पर हाल ही के सालों में हुए आतंकी हमले दिखाते हैं कि इस्लामी आतंकी लोगों में सूफ़ी इस्लाम की बढ़ती लोकप्रियता से डरा हुआ महसूस कर रहे हैं.