समाज

Supporters of the Vishva Hindu Parishad (VHP), a Hindu nationalist organisation, arrive to attend "Dharma Sabha" or a religious congregation organised by the VHP in New Delhi, India, December 9, 2018. REUTERS/Adnan Abidi

राजनीतिक समाज का नया हथियार बनता जय श्री राम

क़ानून का राज होने के बाद भी भीड़ का राज क़ायम है. इस भीड़ को धर्म, जाति और परंपरा के नाम पर छूट मिली है. किसी औरत को डायन बताकर मार देती है, जाति तोड़कर शादी करने वालों की हत्या कर देती है. इसी कड़ी में अब यह शामिल हो गया है कि अपराध करने वाला या झगड़े की ज़द में आ जाने वाले मुसलमान को जय श्री राम के नाम पर मार दिया जाएगा.

(फोटो: पीटीआई)

भारत में हिंसक हिंदू चरमपंथी समूहों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हमले जारी हैं: अमेरिकी रिपोर्ट

भारत ने अमेरिका की इस रिपोर्ट को खारिज किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि एक विदेशी संस्था द्वारा हमारे नागरिकों के संविधान संरक्षित अधिकारों की स्थिति पर टिप्पणी करने का कोई औचित्य नहीं है.

**FILE** New Delhi: In this file photo dated October 01, 2011, shows suspended IPS officer Sanjiv Bhatt being produced in the court, in Ahmadabad. According to the officials, Bhatt was arrested on Wednesday, Sept 05, 2018, by the Gujarat CID in connection with a 22-year-old case of alleged planting of drugs to arrest a man. (PTI Photo) (PTI9_5_2018_000267B)

गुजरात: 16 साल में हिरासत में मौत के 180 मामले सामने आए लेकिन किसी पुलिसकर्मी को सज़ा नहीं हुई

हिरासत में हिंसा और मौत के मामलों में गुजरात सरकार का अपनी पुलिस के साथ खड़े रहने का एक अनकहा-सा रिवाज़ रहा है, लेकिन संजीव भट्ट के मामले में ऐसा नहीं दिखता.

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कैंप जलने के एक साल बाद दिल्ली में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों का क्या है हाल?

वीडियो: दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में बसे रोहिंग्या मुसलमानों के कैंप में पिछले साल 15 अप्रैल को आग लग गई थी. इस घटना के एक साल बाद भी वे अमानवीय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं. अभी भी सरकार की ओर से उनके लिए स्थायी तौर पर रहने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है.

Girish karnad Photo Oxford Uni Press

गिरीश कर्नाड: पड़ोसी से मार्गदर्शक और मार्गदर्शक से सहकर्मी तक…

गिरीश कर्नाड हमारे बीच से उतनी ही शांतिपूर्ण गरिमा और ईमानदारी के साथ विदा हो गए, जिस तरह से उन्होंने अपना जीवन जिया.

Court Hammer (2)

महज़ जिहाद शब्द के इस्तेमाल के आधार पर किसी को आतंकी नहीं ठहरा सकते: कोर्ट

महाराष्ट्र के अकोला की एक विशेष अदालत ने तीन लोगों को आतंकवाद के आरोपों से बरी करते हुए कहा कि केवल ‘जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल करने पर किसी को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता.

Not In My Name PTI Photo

क्या हिंदुत्ववादियों का भारतीय मुसलमानों को लेकर फैलाया गया झूठ हक़ीक़त में बदल सकता है

2014 के बाद से बिना किसी प्रमाण के देश के मुसलमानों को हिंदू-विरोधी और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी बताया जा रहा है. लेकिन डर है कि अगले पांच सालों में उनमें से कुछ ऐसे चुनाव कर सकते हैं, जो उनके समुदाय के बारे में गढ़े गए झूठ को वास्तविकता में बदल देंगे.

Mahatma Gandhi Dandi NaMo Twitter

बदहवास भारत में भाषा का भसान

जो गांधी के विचारों के समर्थक और शांति के पैरोकार हैं, ख़ुद एक दिमाग़ी बुखार में गिरफ़्तार हैं. हिंसा हमारा स्वभाव हो गई है. हम हमला करने का पहला मौका छोड़ना नहीं चाहते. पढ़ने-सुनने के लिए जो समय और धीरज चाहिए, हमने वह जानबूझकर गंवा दिया है.

New Delhi: A Muslim woman looks on, near Jama Masjid in New Delhi, Wednesday, Sept 19, 2018. The Union Cabinet approved an ordinance to ban the practice of instant triple talaq. Under the proposed ordinance, giving instant triple talaq will be illegal and void and will attract a jail term of three years for the husband. (PTI Photo/Atul Yadav) (Story No. TAR20) (PTI9_19_2018_000096B)

मुस्लिम औरतों को धर्म के पिंजरे में सुरक्षित रहने की गारंटी कौन दे रहा है?

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इस्लामिक यूथ फेडरेशन ने एक तस्वीर जारी की है, जिसमें औरतों को इस्लाम के पिंजरे में क़ैद पंछी की शक्ल दी गई. बताया गया कि ये पिंजरा ही वो महफ़ूज़ जगह है, जहां औरतें न सिर्फ़ नेकियां कमा सकती हैं बल्कि तमाम ‘ज़हरीली’ विचारधाराओं से बची रह सकती हैं.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर और दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

प्रज्ञा ठाकुर के माध्यम से भाजपा किसकी आकांक्षा का प्रतिनिधित्व कर रही है

क्या वाकई देश का हिंदू अब इस अवस्था को प्राप्त कर चुका है जहां उसके इंसानी और नागरिक बोध का प्रतिनिधित्व प्रज्ञा ठाकुर जैसों के रूप में होगा?

Agartala: Women of Reang tribal community show their inked marked finger after casting vote, during the third phase of the 2019 Lok Sabha elections, at polling station in Agartala , Tuesday, April 23, 2019. (PTI Photo)(PTI4_23_2019_000067B)

नागरिक होने का अर्थ केवल ज़िंदा रहना और वोट डालना भर रह गया है

देश में चुनाव हो रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं. लोग बदहाल ज़िंदगियां जी रहे हैं, बीमारी, भूख, अत्याचार, दुर्घटना और हिंसक हमलों में मारे जा रहे हैं. अपमानित किए जा रहे हैं. उनके अधिकार दिन-ब-दिन कमज़ोर किए जा रहे हैं.

पेन को लेकर नृत्य करते एक ही गोत्र के वंशज. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

अपने धर्म का बाज़ार नहीं चलाते आदिवासी

आदिवासी अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने धर्म का बाज़ार कभी नहीं चलाते. संगठित धर्मों और आदिवासियों की आस्था के बीच यह बड़ा फर्क है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या हैं अंतरराष्ट्रीय श्रमजीवी महिला दिवस के सही मायने?

वीडियो: अंतरराष्ट्रीय श्रमजीवी महिला दिवस के अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय महिलाएं बता रहीं हैं कि उनके लिए इस दिन का क्या मतलब है. बीते साल आए विभिन्न कोर्ट के फ़ैसलों को और महिला आंदोलनों को नारीवाद की दृष्टि से कैसे देखा जा सकता है.

31 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ हुआ प्रदर्शन। (फोटो: पीटीआई)

13 पॉइंट रोस्टर संविधान में दी गई सामाजिक-आर्थिक न्याय की प्रस्तावना के ख़िलाफ़ है

13 पॉइंट रोस्टर लागू करने का फ़ैसला देश की अब तक प्राप्त सभी सामाजिक उपलब्धियों को ख़त्म कर देगा. इससे विश्वविद्यालय के स्टाफ रूम समरूप सामाजिक इकाई में बदल जाएंगे क्योंकि इसमें भारत की सामाजिक विविधता को सम्मान देने की कोई दृष्टि नहीं है.

Rasika Dugal Tigmanshu Dhulia Ratna Pathak Shah

आपको अपना राष्ट्र मुबारक़, मुझे तो अपना देश चाहिए…

राष्ट्रवाद के शोर के बीच कवि भगवत रावत की एक कविता जिसे अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह, निर्देशक तिग्मांशु धूलिया और अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने स्वरबद्ध किया है.

पत्रकार और लेखक प्रियंका दुबे और उनकी पहली किताब नो नेशन फॉर वीमन का कवर. (फोटो साभार: फेसबुक)

सभ्यताएं भले ही चांद पर चली गईं हों, औरतों का कोई देश नहीं

पुस्तक समीक्षा: अपनी किताब ‘नो नेशन फॉर वीमेन’ में प्रियंका दुबे इस बात की पड़ताल करती हैं कि कैसे भारत में महामारी की तरह फैले बलात्कार का कारण हवस कम, पितृसत्ता ज़्यादा है. कैसे औरत को ‘उसकी जगह’ दिखाने के लिए बलात्कार का सहारा लिया जाता है.

गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख़्तर. (फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रवाद और देशभक्ति सिर्फ़ नारा नहीं: जावेद अख़्तर

पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख़्तर ने कहा कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति का मतलब सामाजिक रूप से जागरूक होना होता है. यह सिर्फ़ नारा नहीं बल्कि एक जीवनशैली है.

(फोटो: पीटीआई)

पत्नी का पति को थप्पड़ मारना ख़ुदकुशी के लिए उकसाना नहीं: अदालत

एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई कथित थप्पड़ मारने को उकसावा मानता है तो उसे ध्यान रखना चाहिए कि कथित आचरण ऐसा हो कि कोई सामान्य विवेक का व्यक्ति ऐसी स्थिति में आत्महत्या कर ले.

Savitribai Phule Wikipedia

सावित्री बाई फुले: जिन्होंने औरतों को ही नहीं, मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया

दुनिया में लगातार विकसित और मुखर हो रही नारीवादी सोच की ठोस बुनियाद सावित्रीबाई और उनके पति ज्योतिबा ने मिलकर डाली. दोनों ने समाज की कुप्रथाओं को पहचाना, विरोध किया और उनका समाधान पेश किया.

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

क्यों मुस्लिम लड़कियों को लड़कों से अलग शिक्षा दी जाती है?

वीडियो: आज भी मुस्लिम लड़कियों को किताबों में ‘अच्छी’ औरत बनने के तरीके, खाने-पकाने और शौहर को ख़ुश रखने के हुनर सिखाए जा रहे हैं.

अभिनेत्री मौसमी चटर्जी. (फोटो साभार: यूट्यूब वीडियो ग्रैब)

अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने कोमा में गई बेटी से मिलवाने के लिए अदालत से लगाई गुहार

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दाख़िल कर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने अपने दामाद पर आरोप लगाया है कि वह उनकी बेटी से मिलने नहीं देते इसलिए उचित देखभाल के लिए उन्हें बेटी का अभिभावक घोषित किया जाए.

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वीडियो: उर्दू साहित्य और समाज में समलैंगिकता का सवाल

विशेष: उर्दू साहित्य और समाज का समलैंगिकता को लेकर रवैया क्या हमेशा से ही तंग था? भारतीय समाज और इतिहास में समलैंगिकता को लेकर बनी वर्जनाओं (टैबू) के बारे में बता रही हैं यासमीन रशीदी.

New Delhi: Outgoing Chief Justice of India Justice Dipak Misra (R), CJI-designate Justice Ranjan Gogoi and Attorney General of India K. K. Venugopal during the former's farewell function on the Supreme Court lawns in New Delhi, Monday, Oct 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI10_1_2018_000181B)

शायद हम धर्म, जाति के आधार पर पहले से कहीं अधिक बंटे हुए हैं: जस्टिस गोगोई

देश के मनोनीत प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमें क्या पहनना चाहिए, क्या खाना चाहिए, क्या कहना चाहिए, क्या पढ़ना और सोचना चाहिए, ये सब अब हमारी निजी ज़िंदगी के छोटे और महत्वहीन सवाल नहीं रह गए है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा, मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने के आदेश पर अमल करें राज्य सरकारें

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा, लोगों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि ऐसी घटनाओं पर उन्हें कानून के कोप का सामना करना पड़ेगा.

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मीडिया बोल, एपिसोड 67: हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज

मीडिया बोल की 67वीं कड़ी में उर्मिलेश हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज पर पॉलिटिकल साइंटिस्ट सविता सिंह और जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार से चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: पीटीआई

क्या गाय के नाम पर मुस्लिमों के साथ हिंसा मोदी राज की देन है?

गोरक्षा के नाम पर देश भर में मुस्लिमों के साथ हिंसा की घटनाएं नई नहीं हैं. हाल के समय में बढ़ी लिंचिंग की घटनाओं और उनकी रिपोर्टिंग के पीछे ज़रूरी तौर पर भारतीय समाज में आया कोई बुनियादी बदलाव नहीं, बल्कि कुछ हद तक इसके लिए इंटरनेट के विस्तार की भूमिका है.

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मॉब लिंचिंग पर राज्यों द्वारा स्टेटस रिपोर्ट नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्टेटस रिपोर्ट जमा करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए एक सप्ताह का वक़्त दिया है.

Demonstrators from the Jat community sit on top of a truck as they block the Delhi-Haryana national highway during a protest at Sampla village in Haryana, India, February 22, 2016. REUTERS/Adnan Abidi

अब पराया लगता है यह देश

हम देश के एक छोटे से क़स्बे में पले-बढ़े लेकिन उस दौर में लोगों का दिलो-दिमाग राजनीति ने इतना छोटा नहीं था, जबकि देश का विभाजन हुए बहुत अरसा भी नहीं बीता था. नफ़रत की ऐसी आग नहीं लगी हुई थी, जैसी आज लगी है.

New Delhi: Home Minister Rajnath Singh at a book release, comprising the interviews of former prime minister Atal Bihari Vajpayee published in Rashtriya Swayamsevak Sangh’s Hindi publication the 'Panchjanya', in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI2_8_2018_000187B)

मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून: समिति ने राजनाथ की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह को रिपोर्ट सौंपी

पिछले एक साल में नौ राज्यों में करीब 40 लोगों की हत्या भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की जा चुकी है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने का निर्देश दिया था.

(फोटो: पीटीआई)

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 71 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

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यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए निराशाजनक दौर है

यह एक कठोर हक़ीक़त है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाए रखने वाले हर क़ानून के अपनी जगह पर होने के बावजूद समाचारपत्रों और टेलीविज़न चैनलों ने बिना प्रतिरोध के आत्मसमर्पण कर दिया है और ऊपर से आदेश लेना शुरू कर दिया है.

रामपद चौधरी. (फोटो साभार: द टेलीग्राफ)

राष्ट्रीय पुरस्कार से ​सम्मानित फिल्म ‘एक डॉक्टर की मौत’ के लेखक रामपद चौधरी का निधन

प्रख्यात बंगाली लेखक रामपद चौधरी फेफड़े और वृद्धावस्था से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे. उनकी रचना ‘बाड़ी बोदले जाए’ के लिए 1988 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

निर्देशक अ​नुभव सिन्हा (बाएं), फिल्म निर्देशक और अभिनेता रजत कपूर के साथ. (फोटो साभार: फेसबुक)

हिंदू-मुस्लिम 15 दिन न्यूज़ चैनल देखना छोड़ दें तो दोनों में प्यार हो जाएगा: अनुभव सिन्हा

रा वन, तुम बिन, गुलाब गैंग जैसी फिल्में बनाने वाले निर्देशक अनुभव सिन्हा ने कहा कि देश से हर हिंदुस्तानी प्यार करता है, उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए मजबूर न किया जाए.

(फोटो साभार: फेसबुक/Malankara Orthodox Syrian Church)

चर्च में कन्फेशन की प्रथा ख़त्म करने के राष्ट्रीय महिला आयोग के बयान पर विवाद

केरल स्थित एक चर्च के चार पादरियों पर लगा है बलात्कार का आरोप. राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि कन्फेशन की प्रथा की आड़ में महिलाओं को ब्लैकमेल किया जा सकता है. केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस और चर्चों ने इस बयान की निंदा की है.

नीतीश कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर/@thevoiceofbihar)

एक कैंपस के भीतर 29 बच्चियों के साथ बलात्कार होता रहा और बिहार सोता रहा

बिहार की नीतीश कुमार सरकार इस मामले में चुप रही. वहीं बिहार का मीडिया और मुज़फ़्फ़रपुर का नागरिक समाज भी 29 बच्चियों के साथ हुए बलात्कार के इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है.

KHANDAWA

मध्य प्रदेश: प्रेम विवाह करने जा रही बेटी को पिता और भाई ने ज़िंदा जलाया

खंडवा ज़िले में हुए घटनाक्रम में बेटी पड़ोस में रहने वाले एक युवक से प्रेम करती थी. पिता ने समझाया कि लड़का दूसरी जाति का है, लेकिन वह नहीं मानी तो उसे ज़िंदा जला दिया गया.