समाज

पेन को लेकर नृत्य करते एक ही गोत्र के वंशज. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

अपने धर्म का बाज़ार नहीं चलाते आदिवासी

आदिवासी अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने धर्म का बाज़ार कभी नहीं चलाते. संगठित धर्मों और आदिवासियों की आस्था के बीच यह बड़ा फर्क है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या हैं अंतरराष्ट्रीय श्रमजीवी महिला दिवस के सही मायने?

वीडियो: अंतरराष्ट्रीय श्रमजीवी महिला दिवस के अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय महिलाएं बता रहीं हैं कि उनके लिए इस दिन का क्या मतलब है. बीते साल आए विभिन्न कोर्ट के फ़ैसलों को और महिला आंदोलनों को नारीवाद की दृष्टि से कैसे देखा जा सकता है.

31 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ हुआ प्रदर्शन। (फोटो: पीटीआई)

13 पॉइंट रोस्टर संविधान में दी गई सामाजिक-आर्थिक न्याय की प्रस्तावना के ख़िलाफ़ है

13 पॉइंट रोस्टर लागू करने का फ़ैसला देश की अब तक प्राप्त सभी सामाजिक उपलब्धियों को ख़त्म कर देगा. इससे विश्वविद्यालय के स्टाफ रूम समरूप सामाजिक इकाई में बदल जाएंगे क्योंकि इसमें भारत की सामाजिक विविधता को सम्मान देने की कोई दृष्टि नहीं है.

Rasika Dugal Tigmanshu Dhulia Ratna Pathak Shah

आपको अपना राष्ट्र मुबारक़, मुझे तो अपना देश चाहिए…

राष्ट्रवाद के शोर के बीच कवि भगवत रावत की एक कविता जिसे अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह, निर्देशक तिग्मांशु धूलिया और अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने स्वरबद्ध किया है.

पत्रकार और लेखक प्रियंका दुबे और उनकी पहली किताब नो नेशन फॉर वीमन का कवर. (फोटो साभार: फेसबुक)

सभ्यताएं भले ही चांद पर चली गईं हों, औरतों का कोई देश नहीं

पुस्तक समीक्षा: अपनी किताब ‘नो नेशन फॉर वीमेन’ में प्रियंका दुबे इस बात की पड़ताल करती हैं कि कैसे भारत में महामारी की तरह फैले बलात्कार का कारण हवस कम, पितृसत्ता ज़्यादा है. कैसे औरत को ‘उसकी जगह’ दिखाने के लिए बलात्कार का सहारा लिया जाता है.

गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख़्तर. (फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रवाद और देशभक्ति सिर्फ़ नारा नहीं: जावेद अख़्तर

पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख़्तर ने कहा कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति का मतलब सामाजिक रूप से जागरूक होना होता है. यह सिर्फ़ नारा नहीं बल्कि एक जीवनशैली है.

(फोटो: पीटीआई)

पत्नी का पति को थप्पड़ मारना ख़ुदकुशी के लिए उकसाना नहीं: अदालत

एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई कथित थप्पड़ मारने को उकसावा मानता है तो उसे ध्यान रखना चाहिए कि कथित आचरण ऐसा हो कि कोई सामान्य विवेक का व्यक्ति ऐसी स्थिति में आत्महत्या कर ले.

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सावित्री बाई फुले: जिन्होंने औरतों को ही नहीं, मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया

दुनिया में लगातार विकसित और मुखर हो रही नारीवादी सोच की ठोस बुनियाद सावित्रीबाई और उनके पति ज्योतिबा ने मिलकर डाली. दोनों ने समाज की कुप्रथाओं को पहचाना, विरोध किया और उनका समाधान पेश किया.

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

क्यों मुस्लिम लड़कियों को लड़कों से अलग शिक्षा दी जाती है?

वीडियो: आज भी मुस्लिम लड़कियों को किताबों में ‘अच्छी’ औरत बनने के तरीके, खाने-पकाने और शौहर को ख़ुश रखने के हुनर सिखाए जा रहे हैं.

अभिनेत्री मौसमी चटर्जी. (फोटो साभार: यूट्यूब वीडियो ग्रैब)

अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने कोमा में गई बेटी से मिलवाने के लिए अदालत से लगाई गुहार

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दाख़िल कर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने अपने दामाद पर आरोप लगाया है कि वह उनकी बेटी से मिलने नहीं देते इसलिए उचित देखभाल के लिए उन्हें बेटी का अभिभावक घोषित किया जाए.

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वीडियो: उर्दू साहित्य और समाज में समलैंगिकता का सवाल

विशेष: उर्दू साहित्य और समाज का समलैंगिकता को लेकर रवैया क्या हमेशा से ही तंग था? भारतीय समाज और इतिहास में समलैंगिकता को लेकर बनी वर्जनाओं (टैबू) के बारे में बता रही हैं यासमीन रशीदी.

New Delhi: Outgoing Chief Justice of India Justice Dipak Misra (R), CJI-designate Justice Ranjan Gogoi and Attorney General of India K. K. Venugopal during the former's farewell function on the Supreme Court lawns in New Delhi, Monday, Oct 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI10_1_2018_000181B)

शायद हम धर्म, जाति के आधार पर पहले से कहीं अधिक बंटे हुए हैं: जस्टिस गोगोई

देश के मनोनीत प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमें क्या पहनना चाहिए, क्या खाना चाहिए, क्या कहना चाहिए, क्या पढ़ना और सोचना चाहिए, ये सब अब हमारी निजी ज़िंदगी के छोटे और महत्वहीन सवाल नहीं रह गए है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा, मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने के आदेश पर अमल करें राज्य सरकारें

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा, लोगों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि ऐसी घटनाओं पर उन्हें कानून के कोप का सामना करना पड़ेगा.

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मीडिया बोल, एपिसोड 67: हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज

मीडिया बोल की 67वीं कड़ी में उर्मिलेश हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज पर पॉलिटिकल साइंटिस्ट सविता सिंह और जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार से चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: पीटीआई

क्या गाय के नाम पर मुस्लिमों के साथ हिंसा मोदी राज की देन है?

गोरक्षा के नाम पर देश भर में मुस्लिमों के साथ हिंसा की घटनाएं नई नहीं हैं. हाल के समय में बढ़ी लिंचिंग की घटनाओं और उनकी रिपोर्टिंग के पीछे ज़रूरी तौर पर भारतीय समाज में आया कोई बुनियादी बदलाव नहीं, बल्कि कुछ हद तक इसके लिए इंटरनेट के विस्तार की भूमिका है.

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मॉब लिंचिंग पर राज्यों द्वारा स्टेटस रिपोर्ट नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्टेटस रिपोर्ट जमा करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए एक सप्ताह का वक़्त दिया है.

Demonstrators from the Jat community sit on top of a truck as they block the Delhi-Haryana national highway during a protest at Sampla village in Haryana, India, February 22, 2016. REUTERS/Adnan Abidi

अब पराया लगता है यह देश

हम देश के एक छोटे से क़स्बे में पले-बढ़े लेकिन उस दौर में लोगों का दिलो-दिमाग राजनीति ने इतना छोटा नहीं था, जबकि देश का विभाजन हुए बहुत अरसा भी नहीं बीता था. नफ़रत की ऐसी आग नहीं लगी हुई थी, जैसी आज लगी है.

New Delhi: Home Minister Rajnath Singh at a book release, comprising the interviews of former prime minister Atal Bihari Vajpayee published in Rashtriya Swayamsevak Sangh’s Hindi publication the 'Panchjanya', in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI2_8_2018_000187B)

मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून: समिति ने राजनाथ की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह को रिपोर्ट सौंपी

पिछले एक साल में नौ राज्यों में करीब 40 लोगों की हत्या भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की जा चुकी है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने का निर्देश दिया था.

(फोटो: पीटीआई)

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 71 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

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यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए निराशाजनक दौर है

यह एक कठोर हक़ीक़त है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाए रखने वाले हर क़ानून के अपनी जगह पर होने के बावजूद समाचारपत्रों और टेलीविज़न चैनलों ने बिना प्रतिरोध के आत्मसमर्पण कर दिया है और ऊपर से आदेश लेना शुरू कर दिया है.

रामपद चौधरी. (फोटो साभार: द टेलीग्राफ)

राष्ट्रीय पुरस्कार से ​सम्मानित फिल्म ‘एक डॉक्टर की मौत’ के लेखक रामपद चौधरी का निधन

प्रख्यात बंगाली लेखक रामपद चौधरी फेफड़े और वृद्धावस्था से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे. उनकी रचना ‘बाड़ी बोदले जाए’ के लिए 1988 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

निर्देशक अ​नुभव सिन्हा (बाएं), फिल्म निर्देशक और अभिनेता रजत कपूर के साथ. (फोटो साभार: फेसबुक)

हिंदू-मुस्लिम 15 दिन न्यूज़ चैनल देखना छोड़ दें तो दोनों में प्यार हो जाएगा: अनुभव सिन्हा

रा वन, तुम बिन, गुलाब गैंग जैसी फिल्में बनाने वाले निर्देशक अनुभव सिन्हा ने कहा कि देश से हर हिंदुस्तानी प्यार करता है, उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए मजबूर न किया जाए.

(फोटो साभार: फेसबुक/Malankara Orthodox Syrian Church)

चर्च में कन्फेशन की प्रथा ख़त्म करने के राष्ट्रीय महिला आयोग के बयान पर विवाद

केरल स्थित एक चर्च के चार पादरियों पर लगा है बलात्कार का आरोप. राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि कन्फेशन की प्रथा की आड़ में महिलाओं को ब्लैकमेल किया जा सकता है. केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस और चर्चों ने इस बयान की निंदा की है.

नीतीश कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर/@thevoiceofbihar)

एक कैंपस के भीतर 29 बच्चियों के साथ बलात्कार होता रहा और बिहार सोता रहा

बिहार की नीतीश कुमार सरकार इस मामले में चुप रही. वहीं बिहार का मीडिया और मुज़फ़्फ़रपुर का नागरिक समाज भी 29 बच्चियों के साथ हुए बलात्कार के इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है.

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मध्य प्रदेश: प्रेम विवाह करने जा रही बेटी को पिता और भाई ने ज़िंदा जलाया

खंडवा ज़िले में हुए घटनाक्रम में बेटी पड़ोस में रहने वाले एक युवक से प्रेम करती थी. पिता ने समझाया कि लड़का दूसरी जाति का है, लेकिन वह नहीं मानी तो उसे ज़िंदा जला दिया गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

भीड़तंत्र नहीं चल सकता, लिंचिंग से निपटने के लिए क़ानून लाए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

कथित गोरक्षकों और भीड़ द्वारा हो रही हिंसा के ख़िलाफ़ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि डर और अराजकता के माहौल से निपटना सरकार की ज़िम्मेदारी. नागरिक अपने आप में क़ानून नहीं बन सकते.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

बलात्कार रोकने हैं तो पहले लड़कों के लैंगिक शोषण पर चुप्पी तोड़िए

पुरुषत्व और मर्दवाद की स्थापना के चलते लड़कों के लैंगिक शोषण को महत्वहीन विषय माना गया है. यदि कोई यह शिकायत करता है तो उसे अपमान झेलना पड़ता है और कमज़ोर माना जाता है.

**BEST QUALITY AVAILABLE** Ranchi: Union Minister of State for Civil Aviation Jayant Sinha with the lynching convicts at his residence after they were released on bail in Ramgarh, Jharkhand on Saturday, July 7, 2018. (PTI Photo)(PTI7_7_2018_000204B)

जब केंद्रीय मंत्री हत्याभियुक्तों को फूल-मालाएं पहनाएंगे तो उन पर लगाम कैसे लगाएंगे?

भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं की रोकथाम का केंद्र सरकार के पास कोई कार्यक्रम नहीं है, इसलिए वह सिर्फ़ राज्य सरकारों को सतर्क रहने को कहकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेना चाहती है.

फिल्मकार सईद अख़्तर मिर्ज़ा, सामाजिक कार्यकर्ता रितु ​दीवान और फिल्मकार महेश भट्ट. (फोटो साभार: यूट्यूब)

लोकतंत्र और देशभक्ति जैसे शब्द अपना अर्थ खो चुके हैं: सईद अख़्तर मिर्ज़ा

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मकार सईद अख़्तर मिर्ज़ा की किताब के लोकार्पण के मौके पर फिल्मकार महेश भट्ट ने कहा कि हमारे देश की आत्मा सरकार से बहुत बड़ी है. यह देश सरकार नहीं है.

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मंदसौर की घटना के बहाने चुप्पी पूछने का खेल खेलने वालों का इरादा क्या है?

मंदसौर जैसी भयावह घटना के आरोपी के समर्थन में चुप्पी की बात वही कर सकते हैं जो ख़ुद चुप रहते हैं और सांप्रदायिक माहौल बनाने के लिए दूसरे की चुप्पी का हिसाब करते हैं.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 266: मोदी की विदेश नीति और सत्ता का केंद्रीकरण

जन गण मन की बात की 266वीं कड़ी में विनोद दुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और मोदी सरकार में सत्ता के केंद्रीकरण पर चर्चा कर रहे हैं.

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय: जो धार्मिक पाठ ही नहीं है, उसको लेकर हंगामा है क्यों बरपा…

एएमयू को एक लड़की की गुस्ताख़ी पसंद नहीं आई, इसलिए एक ऐसा नारा जो इस्लामिक भी नहीं है उस पर हायतौबा मची है. ये देखना भी कम दिलचस्प नहीं है कि यूनिवर्सिटी किसी ज़िम्मेदार शैक्षणिक संस्थान की तरह व्यवहार करने की बजाय फ़तवे की किताब खोलकर बैठ गई है.

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‘भारत की राष्ट्रीयता किसी एक भाषा या एक धर्म पर आधारित नहीं है’

7 जून 2018 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पर हुए समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गया पूरा भाषण.

Habib Tanveer

जब बलराज साहनी ने हबीब तनवीर को तमाचा मारा था…

हबीब तनवीर की जितनी थियेटर पर पकड़ थी, उतनी ही मज़बूत पकड़ समाज, सत्ता और राजनीति पर थी. वे रंगमंच को एक पॉलिटिकल टूल मानते थे. उनका कहना था कि समाज और सत्ता से कटकर किसी क्षेत्र को नहीं देखा जा सकता.

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कुपोषण से लड़ने के हॉर्लिक्स के दावे का अमिताभ बच्चन द्वारा प्रचार आंख में धूल झोंकना है

सेहत के लिए हानिकारक होने के चलते अमिताभ बच्चन ने साल 2014 में पेप्सी के साथ अपना क़रार रद्द कर दिया था. स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि अमिताभ हॉर्लिक्स के साथ भी ऐसा ही करेंगे.