समाज

(फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना संकट: जंग की ललकार की नहीं, दोस्ती की पुकार की घड़ी

युद्ध असाधारण परिस्थिति उत्पन्न करता है, जहां समाचार, विचार और सामाजिक आचार सिर्फ सरकारें तय कर सकती हैं. युद्ध में सरकार से सवाल जुर्म होता है और सैनिक से बलिदान की अपेक्षा की जाती है. ऐसे में अगर डॉक्टर ख़ुद को संक्रमण से बचाने की सामग्री की मांग करते हुए काम रोक दें तो वही जनता, जो इनके लिए करतल ध्वनि के कोलाहल का उत्सव मना रही थी, इनके लिए सज़ा की मांग करेगी.

फतेहगढ़ में घुमंतु समूह. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

राजस्थान: दर-बदर रहने वाले घूमंतु समुदाय भुगत रहे हैं लॉकडाउन का खामियाज़ा

कोरोना के चलते हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में घुमंतू समुदाय के कई समूह फंसे हुए हैं, न काम है न खाने पीने की कोई व्यवस्था. कुछ आम नागरिकों से मिली मदद के सहारे रह रहे इस समुदाय का कहना है कि सरकार द्वारा ग़रीबों के लिए हुई घोषणाओं में से उन्हें किसी का लाभ नहीं मिला है.

अपनी नवजात बच्ची सहित अपने चार बच्चों के साथ रेशमा. (फोटो: द वायर)

सात दिन के बच्चे की मां को लॉकडाउन में फंसे पति का इंतजार

वीडियो: बीते 24 मार्च को हुए देशव्यापी लॉकडाउन में गुड़गांव में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले नानबाबू फंस गए. इस दौरान कालिंदी कुंज में रहने वाले पड़ोसियों ने चंदा इकट्ठा कर उनकी पत्नी रेशमा की डिलीवरी कराई और खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं. विशाल जायसवाल की रिपोर्ट.

New Delhi : A group of migrant workers walk to their native places amid the nationwide complete lockdown, on the NH24 near Delhi-UP border in New Delhi, Friday, March 27, 2020. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI27-03-2020 000194B)

यह महामारी एक नई दुनिया में क़दम रखने का मौक़ा है

महामारियों ने हमेशा से ही इंसान को अतीत से नाता तोड़कर एक नए भविष्य की कल्पना करने के लिए मजबूर किया है. यह महामारी भी नए और पुराने के बीच एक दरवाज़ा है और यह हम पर है कि हम पूर्वाग्रह, नफ़रत, लोभ आदि के कंकाल ढोते हुए आगे बढ़ें या बिना ऐसे बोझों के एक नई और बेहतर दुनिया की कल्पना के साथ आगे निकलें.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई)

कोरोना: भोपाल में 85 संक्रमितों में से 40 स्वास्थ्यकर्मी, राज्य मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के 57 नए मामले सामने आने के बाद प्रदेश में इस बीमारी की चपेट में आने वालों की तादाद बढ़कर 313 पर पहुंच गई है. मध्य प्रदेश में अब तक 23 लोगों की मौत कोरोना वायरस के संक्रमण से हो चुकी है.

New Delhi: Former Congress president Sonia Gandhi speaks during a ceremony for the presentation of Rajiv Gandhi National Sadbhavana Award to former West Bengal governor Gopalkrishna Gandhi, in New Delhi on Monday, Aug 20, 2018. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI8_20_2018_000234B)

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में संयमित खर्च को लेकर सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पांच सुझाव दिए

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘पीएम केयर्स’ फंड की संपूर्ण राशि ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष’ में स्थानांतरित करने, सरकारी खर्च में 30 प्रतिशत की कटौती करने, ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना को स्थगित करने और सरकारी विज्ञापनों पर दो साल तक रोक लगाने का अनुरोध किया.

अपनी नवजात बच्ची सहित अपने चार बच्चों के साथ रेशमा. (फोटो: द वायर)

दिल्ली: लॉकडाउन में फंसे पति के इंतज़ार में एक मां का संघर्ष

दिल्ली के कालिंदी कुंज के श्रम विहार इलाके में बसे एक कैंप में रहने वाली 23 वर्षीय रेशमा के पति दिहाड़ी मज़दूर हैं, जो लॉकडाउन के चलते गुड़गांव में फंस गए हैं. रेशमा ने दस दिन पहले बेटी को जन्म दिया है. बिना पैसे और खाने के वह पड़ोसियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद के सहारे रह रही हैं.

इंद्रदेव महतो.

लॉकडाउन: झारखंड के डेयरी किसान परेशान, कहा- हमें और हमारे पशुओं को भुखमरी मार देगी

कोरोना वायरस के चलते देश में लागू लॉकडाउन झारखंड के डेयरी किसानों के लिए भारी पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि सरकार जिस तरह से ज़रूरतमंदों को राशन दे रही है, वैसे ही किसानों को भी पशु आहार मुफ्त में मिलना चाहिए.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with Union Ministers Nitin Gadkari, Rajnath Singh, Amit Shah, Nirmala Sitharaman and others during the first cabinet meeting, at the Prime Minister’s Office, in South Block, New Delhi, May 31, 2019. (PTI Photo)(PTI5_31_2019_000249B)

कोरोना लॉकडाउन: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती

केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित करने का फैसला किया है. सांसद निधि को निलंबित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि इससे नई दिल्ली की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जाएगा, न कि 543 सांसदों के स्थानीय मुद्दों को.

हमले में घायल कृष्णा मुसहर.

बिहार: भोजपुर में महादलितों के घरों पर हमला, छह लोगों को गोली मारी

घटना भोजपुर ज़िले के तरारी थाना क्षेत्र के सारा गांव की है. पुलिस के मुताबिक गांव के प्रभावशाली जातियों के कुछ लोग महिलाओं से छेड़छाड़ के इरादे से मुसहर टोली में घुसे थे. विरोध होने पर उन्होंने फायरिंग की, जिसमें एक साल की बच्ची समेत छह लोग घायल हो गए हैं.

New Delhi : A migrant family carry their belongings as they walk to their village, amid a nationwide lockdown in the wake of coronavirus pandemic, near Delhi-UP Border in New Delhi, Sunday, March 29, 2020. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI29-03-2020 000020B)

कोरोना: मोदी सरकार के पास न रणनीति है, न ही मानवता

बीते छह सालों में मोदी सरकार के कई फ़ैसले दिखाते हैं कि उसे जनता में डर और दहशत पैदा करने का विचार पसंद है. नोटबंदी में लंबी लाइनों में लगकर पुराने नोटों को बदलना हो, नागरिकता साबित करने के लिए कागज़ जुटाना या अचानक हुए लॉकडाउन में अनहोनी के डर पलायन, सरकार के फ़ैसलों की मार समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके पर ही पड़ी है.

Kozhikode: A man arranges earthen lamps at his shop during a nationwide lockdown in the wake of the coronavirus outbreak, in Kozhikode, Saturday, April 4, 2020. PM Modi urged people to switch off lights of their homes at 9 pm for nine minutes on April 5 and light up lamps, candles, mobile flashlights to display the nation's collective spirit to defeat coronavirus. (PTI Photo)
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प्रधानमंत्री जी, जनता को संकट की इस घड़ी में भरोसा दें, भरम नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से फैले अंधकार के बीच हमें निरंतर प्रकाश की ओर जाना है. जो इस कोरोना संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, हमारे ग़रीब भाई-बहन, उन्हें निराशा से आशा की तरफ ले जाना है. काश, वे यह समझते कि ये ग़रीब इस तरह निराश नहीं हुआ करते, वे तभी हारते हैं जब ढोंग और ढकोसलों में भरमा दिए जाते हैं.

New Delhi: Migrant workers walk to their native village during a nationwide lockdown, imposed in the wake of coronavirus pandemic , at NH 24 near Akshardham in East Delhi, Sunday, March 29, 2020. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI29-03-2020 000148B)

मज़दूरों का सामूहिक पलायन व्यवस्था और समाज के बारे में क्या बताता है

प्रवासी मज़दूरों का सामूहिक पलायन भुखमरी के तात्कालिक भय से कहीं ज़्यादा, ग़रीब हिंदुस्तानियों के सामूहिक अवचेतन में सदियों से बैठी इस धारणा का प्रमाण है कि उन्हें सत्ता, उसकी व्यवस्था और समाज के संपन्न वर्ग से कभी कोई आशा नहीं करनी चाहिए और यह कि ‘अंत में ग़रीब की कोई नहीं सुनेगा.’

फोटो: रॉयटर्स

कोरोना से निपटने के सरकार के कदम ग़रीब-विरोधी हैं

सरकार द्वारा ग़रीबों की मदद के नाम पर स्वास्थ्य संबंधी मामूली घोषणाएं की गई हैं. हमें नहीं पता अगर कोई ग़रीब कोरोना से संक्रमित हुआ तो उसे उचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी. अगर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आई तो बेड और वेंटिलिटर जैसी सुविधाएं मिलेंगी?

A sign is seen down a London street regarding self isolation as the spread of the coronavirus disease (COVID-19) continues. London, Britain March 21, 2020 REUTERS/Hannah Mckay

कोरोना: महामारी के दौर में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी ज़रूरी है

संक्रामक रोगों का सभी पर एक गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है, उन पर भी जो वायरस से प्रभावित नहीं हैं. इन बीमारियों को लेकर हमारी प्रतिक्रिया मेडिकल ज्ञान पर आधारित न होकर हमारी सामाजिक समझ से भी संचालित होती है.

Ghaziabad: Migrant labourers made to sit under a flyover on the Hapur Road at a safe social distance by the district administration, during complete lockdown in the view coronavirus pandemic, in Ghaziabad, Thursday, March 26, 2020. (PTI Photo/Arun Sharma)

कोरोना लॉकडाउन: ग़रीब और कमज़ोर तबके की मदद के लिए क्या उपाय किया जा सकते हैं

देशभर में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से उत्पन्न आर्थिक स्थितियां उन लोगों को बुरी तरह प्रभावित करेंगी, जो इस महामारी से तो शायद बच जाएंगे, लेकिन रोज़मर्रा की आवश्यक ज़रूरतों का पूरा न होना उनके लिए अलग मुश्किलें खड़ी करेगा.

New Delhi : A group of migrant workers walk to their native places amid the nationwide complete lockdown, on the NH24 near Delhi-UP border in New Delhi, Friday, March 27, 2020. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI27-03-2020 000194B)

कृतज्ञता का भाव ग़ैर-बराबरी और नाइंसाफी की स्थिति से जुड़ा हो, तो हिंसा पैदा होती है

कृतज्ञता के साथ जब अपनी लाचारी का एहसास जुड़ जाए तो मनुष्य उससे मुक्त होना चाहता है. एक समुदाय ही रहम, कृपा, राहत का पात्र बनता रहे यह वह कबूल नहीं कर सकता. वह बराबरी हासिल करना चाहता है.

People waiting to buy medicine during the 21-day nationwide lockdown, in Kolkata, on March 26, 2020. (Photo: Reuters)

60 से अधिक उम्र के केंद्रीय स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों के घर पर दवाएं पहुंचाने का आदेश

कोरोना वायरस के मद्देनज़र देश में लागू लॉकडाउन के चलते ज़रूरी दवाओं की भी घर पर आपूर्ति की अनुमति दी गई है. सरकारी आदेश के अनुसार, ऐसी दवाएं जिन्हें लोगों के घरों तक पहुंचाया जाएगा, उन्हें किसी योग्य डॉक्टर के पर्चे के बिना नहीं ख़रीदा जा सकेगा.

कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनज़र 22 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हुए जनता कर्फ्यू के दौरान सड़क पर निकले विभिन्न शहरों के लोग. (फोटो साभार: ट्विटर)

सामूहिकता के बिना मूर्खता का जीवित रहना संभव नहीं है

भारत एक सांस्कृतिक इकाई है. बावजूद भिन्न भाषाओं, पहनावों और खानपान के हम सब मूर्खता के एक सूत्र में बंधे हैं. राष्ट्रीय एकता का यह प्रदर्शन और प्रमाण दिल को तसल्ली देता है.

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‘शर्मिष्ठा सिर्फ़ सिंगल मदर का संघर्ष नहीं स्वाभिमानी औरत की कहानी भी है’

वीडियो: युवा कथाकार अणुशक्ति सिंह का पहला उपन्यास ‘शर्मिष्ठा’ बीते दिनों आया है. इस उपन्यास के मद्देनज़र उनसे मिथकीय और पौराणिक चरित्रों में स्त्री की मौजूदगी, सिंगल मांओं के संघर्ष, स्त्री-पुरुष के कथित वैध और अवैध प्रेम समेत विभिन्न विषयों पर फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

(फोटो: वामिका सिंह/द वायर)

अंधविश्वास के दौर में श्मशान की सैर

महाराष्ट्र के एक स्कूल द्वारा अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बच्चों को श्मशान भूमि की सैर पर ले जाया गया. इस सैर का मकसद समाज में श्मशान को लेकर फैली तमाम भ्रांतियों को मिटाते हुए बच्चों में वैज्ञानिक नज़रिया विकसित करना था.

Men remove debris in a riot affected area following clashes between people demonstrating for and against a new citizenship law in New Delhi, February 27, 2020. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

दिल्ली हिंसा के दौरान यौन उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं की आपबीती

दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान जान-माल के नुकसान के अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं हुई हैं, लेकिन ये ख़ौफ़ज़दा पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज कराना तो दूर इसके बारे में बात करने से भी कतरा रही हैं.

Srinagar: Security personnel stands guard at a blocked road on the 33rd day of strike and restrictions imposed after the abrogration of Article of 370 and bifurcation of state, in Srinagar, Friday, Sept. 6, 2019. (PTI Photo) (PTI9_6_2019_000063A)

कश्मीर में केवल इंटरनेट नहीं, कश्मीरियों की ज़िंदगी के कई दरवाज़े बंद थे

बीते 5 मार्च को सात महीने के बाद जम्मू कश्मीर में इंटरनेट से प्रतिबंध हटाया गया है. एक तबके का मानना था कि यह बैन शांति प्रक्रिया के लिए अहम था, हालांकि स्थानीयों के मुताबिक़ यह प्रतिबंध मनोरंजन या सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि आम जनता के जानने और बोलने पर था.

फोटो: पीटीआई

दिल्ली दंगा: हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सभी सरकारी अस्पतालों को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में दंगों के दौरान मरने वाले सभी लोगों के डीएनए नमूने संरक्षित करने और वीडियोग्राफी पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया. इन दंगों में करीब 53 लोगों की मौत हुई है.

(फोटो: पीटीआई)

दंगा प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ लगाए एमसीडी, समाज को उबरने में मदद मिलेगी: दिल्ली हाईकोर्ट

औद्योगिक विवाद से जुड़े एक मामला, जिसमें दिल्ली नगर निगम भी पक्ष है, को सुनते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस नजमी वज़ीरी ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम को पांच सौ पेड़ लगाने का आदेश देते हुए कहा है कि इससे दंगों से ज़ख़्मी समाज को उबरने में मदद मिलेगी.

Srishti Delhi Violence Sexual harassment pic

दिल्ली दंगा: शिव विहार की महिलाओं ने बताई यौन हिंसा की आपबीती

वीडियो: दिल्ली दंगों के दौरान हुई हिंसा के साथ महिलाओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं भी हुई हैं. शिव विहार में हिंसा के बाद ढेरों महिलाओं ने मुस्ताफाबाद में शरण ली है. इन महिलाओं ने द वायर को बताया कि दंगों के दौरान उनके साथ यौन हिंसा की भी घटनाएं हुई हैं.

जस्टिस दीपक गुप्ता. (फोटो: विकिपीडिया)

असहमति का अधिकार लोकतंत्र के लिए आवश्यक है: जस्टिस दीपक गुप्ता

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र और असहमति’ पर एक व्याख्यान देते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि अगर यह भी मान लिया जाए कि सत्ता में रहने वाले 50 फीसदी से अधिक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं तब क्या यह कहा जा सकता है कि बाकी की 49 फीसदी आबादी का देश चलाने में कोई योगदान नहीं है?

Mohammad Anas Qureshi, 20, who is a fruit vendor, poses for photo with the national flag of India in front of riot police during a protest against a new citizenship law in Delhi, India, December 19, 2019. Danish Siddiqui, Reuters

सीएए विरोधी जनांदोलन से पैदा हो रहे गीत और कविताएं प्रतिरोध की नई इबारत लिख रहे हैं

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन के मद्देनज़र लिखी गईं कविताएं युवाओं के बीच कविता की लोकप्रियता के प्रति उम्मीद तो जगाती ही हैं, साथ ही इन्होंने युवाओं को सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों के प्रति भी सचेत किया है.