सरकारी विज्ञापन

2019-20 में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर प्रतिदिन क़रीब 1.95 करोड़ रुपये ख़र्चे: आरटीआई

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से आरटीआई के तहत प्राप्त सूचना के मुताबिक़ पिछले वर्ष मोदी सरकार ने अख़बार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, होर्डिंग इत्यादि के माध्यम से प्रचार के लिए कुल 713 करोड़ रुपये ख़र्च किए हैं.

विज्ञापन के ज़रिये पांच सालों में सोशल मीडिया पर सिर्फ़ एक जागरूकता अभियान चलाया: सरकार

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि लोक संपर्क और संचार ब्यूरो (बीओसी) सोशल मीडिया मंचों सहित विभिन्न मीडिया मंचों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाती है. पांच साल में सिर्फ केवल एक अभियान चलाया, जिस पर 21.66 लाख रुपये ख़र्च हुआ.

अब जम्मू कश्मीर प्रशासन तय करेगा फेक न्यूज़ और राष्ट्र विरोधी पत्रकारों की परिभाषा

दो जून को जारी जम्मू कश्मीर की नई मीडिया नीति के अनुसार, सरकार अख़बारों और अन्य मीडिया चैनलों पर आने वाली सामग्री की निगरानी कर यह तय करेगी कि कौन-सी ख़बर ‘फेक, एंटी सोशल या एंटी-नेशनल’ है. ऐसा पाए जाने पर संबंधित संस्थान को सरकारी विज्ञापन नहीं दिए जाएंगे, साथ ही उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

मीडिया बोल: अरबों के सरकारी विज्ञापन में फंसी मीडिया की जान

मीडिया बोल की इस कड़ी में कुछ मीडिया संस्थानों को सरकारी विज्ञापन न देने के मोदी सरकार के फैसले पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन नाग, सत्य हिंदी वेबसाइट के संपादक आशुतोष और द वायर के सह-संस्थापक एमके वेणु से चर्चा कर रहे हैं उर्मिलेश.

पांच साल में बिहार की नीतीश सरकार ने विज्ञापन पर ख़र्च किए तक़रीबन पांच अरब रुपये

विशेष रिपोर्ट: सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार बिहार में राबड़ी देवी सरकार ने साल 2000 से 2005 के दौरान 23 करोड़ 48 लाख रुपये विज्ञापन पर ख़र्च किए थे. वहीं ​नीतीश कुमार सरकार ने पिछले पांच साल में विज्ञापन पर 4.98 अरब रुपये ख़र्च किए हैं.

प्रेस काउंसिल ने अख़बारों को सरकारी विज्ञापन न देने पर जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस भेजा

जम्मू कश्मीर के कई बड़े अख़बारों ने सरकार द्वारा ग्रेटर कश्मीर और कश्मीर रीडर अख़बारों को बिना कोई स्पष्ट कारण बताए विज्ञापन नहीं देने के फ़ैसले के विरोध में 10 मार्च को अपने पहले पन्ने ख़ाली छोड़ दिए थे.

असम: आर्थिक संकट से गुज़र रहे अख़बारों ने तीन दिन के लिए सरकारी विज्ञापनों का बहिष्कार किया

नॉर्थईस्ट न्यूज़पेपर सोसाइटी ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर असम की सर्बानंद सोनोवाल सरकार द्वारा प्रायोजित किसी भी विज्ञापन, समाचार या तस्वीर का इस्तेमाल नहीं करने की घोषणा की. असम के अधिकतर समाचार पत्र इसी सोसाइटी का हिस्सा हैं.

क्या राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार अपने विज्ञापनों में फ़र्ज़ी दावे कर रही है?

विशेष रिपोर्ट: बीते 30 अगस्त को प्रदेश के अख़बारों में प्रकाशित एक विज्ञापन में राजस्थान सरकार ने भरतपुर ज़िले में स्थित एक स्कूल के कायाकल्प से जुड़े कई दावे किए थे, जिनकी ज़मीनी सच्चाई कुछ और है.

बिहार बालिका गृह: नीतीश ने समाज कल्याण मंत्री का इस्तीफ़ा लेने में इतनी देर क्यों कर दी?

समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा कुशवाहा समाज से आती हैं, जिसका बिहार में ओबीसी समुदाय के वोटबैंक में आठ प्रतिशत का योगदान है. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव नज़दीक होने की वजह से उन्हें हटाकर राजग अपने वोटबैंक का नुकसान नहीं करना चाह रहा था.

बिहार बालिका गृह: मुख्य आरोपी के अख़बार को केस दर्ज होने के बाद भी मिला सरकारी विज्ञापन

एक जून से 14 जून तक बिहार के सूचना व जनसंपर्क विभाग की ओर से मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के अख़बार ‘प्रातः कमल’ के नाम 14 विज्ञापन जारी किए गए. सूचना व जनसंपर्क विभाग ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संभालते हैं.

विज्ञापनों पर शिवराज सरकार द्वारा सरकारी खज़ाना लुटाना कोई नई बात नहीं

‘नई दुनिया’ अख़बार के 26 अप्रैल के मध्य प्रदेश संस्करण में 24 में से 23 पृष्ठों पर सरकारी विज्ञापन छपे थे. शेष बचे एक पृष्ठ पर अख़बार के संपादक का लेख ‘देश को गति देती मध्य प्रदेश की योजनाएं’ शीर्षक से छपा था.

2016-17 में मोदी सरकार ने प्रिंट विज्ञापनों पर 468.53 करोड़ रुपये ख़र्च किए

राज्यसभा में सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि सरकार ने 2016-17 टेलीविजन चैनलों पर जारी विज्ञापनों पर 315.04 करोड़ रुपये ख़र्च किए.