सरदार पटेल

कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन. (फोटो: द लीफलेट)

‘जम्मू कश्मीर की मीडिया को खुद नहीं पता कि राज्य में क्या हो रहा है’

साक्षात्कार: जम्मू कश्मीर में मीडिया की स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन से विशाल जायसवाल की बातचीत.

FILE PHOTO: An Indian police officer stands behind the concertina wire during restrictions on Eid-al-Adha after the scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 12, 2019. REUTERS/Danish Ismail

सरकार अब संवाद से परे हो चुकी है…

एक तरफ कहा जाता है कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है, उस लिहाज़ से कश्मीरी भी अभिन्न होने चाहिए थे. तो फिर इस बदलाव की प्रक्रिया में उनसे बात क्यों नहीं की गई? उनकी राय क्यों नहीं पूछी गई?

Indian policemen stand guard in a deserted street during restrictions in Jammu on August 6.	Photo : Reuters

कश्मीर का मन मरघट बन गया है…

कहा जा रहा है कि लोकतंत्र बहुमत से ही चलता है और बहुमत है, लेकिन ‘बहुमत’ मतलब बहु-मत हों, विभिन्न मत, लेकिन संसद में क्या मतों का आदान-प्रदान हुआ? एक आदमी चीख रहा था, तीन सौ से ज्यादा लोग मेजें पीट रहे थे. यह बहुमत नहीं, बहुसंख्या है. आपके पास मत नहीं, गिनने वाले सिर हैं.

View of a deserted road during restrictions in Srinagar, August 5, 2019. REUTERS/Danish Ismail

ताले में बंद कश्मीर की कोई ख़बर नहीं, पर जश्न में डूबे शेष भारत को इससे मतलब नहीं

सदन में अमित शाह ने कहा कि नेहरू कश्मीर हैंडल कर रहे थे, सरदार पटेल नहीं. यह इतिहास नहीं है मगर अब इतिहास हो जाएगा क्योंकि अमित शाह ने कहा है. उनसे बड़ा कोई इतिहासकार नहीं है.

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अनुच्छेद 370 हटाए जाने को भारतीय अख़बारों ने कैसे पेश किया

जम्मू कश्मीर में संचार व्यवस्थाएं पूरी तरह से ठप होने के कारण न कश्मीरी अख़बार छपे, न ही समाचार वेबसाइट अपडेट हुईं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

न सॉफ्ट हिंदुत्व और न ही सॉफ्ट सेकुलरिज़्म कांग्रेस को उबार सकते हैं

आज कांग्रेस के सामने चुनौती पार्टी का कायाकल्प ऐसे दल के तौर पर करने की है, जो अपने पुराने वैभव और साम्राज्य के बिखर जाने की टीस से बाहर निकलकर यह कबूल करे कि अब उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है और बचाव की मुद्रा से बाहर निकलकर आक्रामक अंदाज़ में खेलना शुरू करे.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi flashes the victory sign as he arrives at the party headquarters to celebrate the party's victory in the 2019 Lok Sabha elections, in New Delhi, Thursday, May 23, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI5_23_2019_000464B)

यह एक नया भारत है और नरेंद्र मोदी उसकी आवाज़ हैं

नरेंद्र मोदी को वोट देने वालों की सोच यह नहीं है कि वह अपने किए गए वादों को पूरा करेंगे या नहीं, बल्कि उन्होंने मोदी को इसलिए वोट किया क्योंकि उन्हें उनमें अपना ही अक्स दिखाई देता है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at a function to commemorate the 75th anniversary formation of the Azad Hind Government, at Red Fort, Delhi on October 21, 2018.

मोदी को प्रधान सेवक के साथ भारत का प्रधान इतिहासकार भी घोषित कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं क्योंकि वे इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक मनोहर पोथी लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम मोदी-मनोहर पोथी हो.

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: करीब 75,000 आदिवासी मूर्ति के अनावरण का करेंगे विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण करने वाले हैं. अादिवासियों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट उनके लिए विनाशकारी है. इसके विरोध में 72 गांवों में खाना नहीं पकेगा.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

जिन्ना नहीं चाहते थे कि पाकिस्तान बने: फ़ारूक़ अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के लिए नेहरू, पटेल और मौलाना आज़ाद को ज़िम्मेदार ठहराया.

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सरदार पटेल ने ‘हिंदू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था

मोदी अगर सरदार पटेल को अपना नेता मानते हैं तो फिर उन्हें पटेल की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता पर अमल करते हुए हिंदू राष्ट्र के लिए हथियार उठाने का आह्वान करने वाले सिरफिरे पर कार्रवाई करनी चाहिए.

(फोटो साभार: फेसबुक)

जो लोग भारत से प्यार नहीं करते हैं, उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए: संघ नेता

संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि कांग्रेस ने नेहरू के नेतृत्व में आज़ादी नहीं विभाजन दिया. कांग्रेस ने देश को आज़ादी दिलाई इससे बड़ा कोई असत्य नहीं है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: ट्विटर/नरेंद्र मोदी)

‘नाना-परनाना की बजाय ये क्यों नहीं बताते कितने घर, रोज़गार, स्कूल-अस्पताल दिए?’

सोशल मीडिया: गुजरात चुनाव प्रचार में विकास की जगह राहुल के परनाना ने ले ली तो फेसबुक और ​ट्विटर पर लोगों ने प्रधानमंत्री की भाषा और ग़लतबयानियों पर जमकर चुटकी ली.

सम्राट अशोक का चित्र, बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, चन्द्रगुप्त मौर्या की मूर्ति बिहार

सम्राट अशोक नहीं, चंद्रगुप्त मौर्य महान थे: भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी

लखनऊ साहित्य महोत्सव में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, त्रिवेदी ने आगे कहा, ‘अशोक के तलवार छोड़ने के बाद से ही भारत में विदेशी आक्रमण शुरू हुआ, तो अशोक महान कैसे?’

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

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नेहरू के ख़िलाफ़ किए जा रहे दुष्प्रचार की वजह क्या है?

जवाहर लाल नेहरू की असफलताएं भी गिनाई जा सकती हैं, लेकिन उसके पहले आपको नेहरू का इस देश के निर्माण में महान योगदान भी स्वीकारना होगा.

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स्टैच्यू आॅफ यूनिटी: सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ते बच्चे और 121 करोड़ रुपये का चंदा

देश के वंचितों के स्वास्थ्य की बदतर स्थिति का एक तरह से मखौल उड़ाती सरदार पटेल की मूर्ति के लिए 121 करोड़ के चंदे की ख़बर पर चर्चा नहीं हो सकी.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 144: सरदार पटेल और सेना द्वारा पुल का निर्माण

जन गण मन की बात की 144वीं कड़ी में विनोद दुआ सरदार पटेल पर पीएम मोदी के भाषण और मुंबई में पुल बनाने के लिए सेना बुलाने के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं

Rahul Gandhi

‘भाजपा पटेल जैसे नेताओं को अपना रही क्योंकि आज़ादी आंदोलन में उसकी अपनी कोई भागीदारी नहीं थी’

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया इतिहास के पुनर्लेखन का आरोप, सोनिया गांधी ने कहा, हम पर थोपी जा रही एकपक्षीय, भेदभावकारी भारतीयता.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi being received by the Governor of Uttar Pradesh, Shri Ram Naik, the Union Home Minister, Shri Rajnath Singh and the Uttar Pradesh Chief Minister designate Yogi Adityanath, on his arrival, at Lucknow, Uttar Pradesh on March 19, 2017.

दीवार पर पहले ही लिखी जा चुकी थी यह इबारत

मोदी के हर क़दम ने हमें अचंभित किया है. यहां तक कि जब वे ज़हर उगलते रहे, तब भी हमारी प्रतिक्रिया ऐसी ही रही. योगी की ताजपोशी उनकी नयी पेशकश है. जो किया जा चुका है उसमें ख़ूबी तलाशना ही अब हमारा कर्तव्य रह गया है.