सिनेमा

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो:पीटीआई)

महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में दर्शक ले जा सकेंगे बाहर का खाना

सिनेमाघरों या मल्टीप्लेक्सों में बाहर से खाना ले जाने के संबंध में एक अगस्त से लागू हो सकता है नियम. नियम का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई. महाराष्ट्र के खाद्य आपूर्ति मंत्री ने राज्य सरकार के इस क़दम की पुष्टि की.

Faiyaz Interview Featured

‘दलित समाज में वंचित है तो सिनेमा में भी वंचित होगा’

दलित मुद्दों पर फिल्म बनाने में आने वाली चुनौतियों पर स्वतंत्र फिल्मकार पवन के श्रीवास्तव से बात कर रहे हैं द वायर के फैयाज़ अहमद वजीह.

फिल्म बाइस्कोपवाला का एक दृश्य. (फोटो साभार: यूट्यूब)

‘बाइस्कोपवाला के ज़रिये हमने टैगोर की काबुलीवाला की कहानी आज के दौर के हिसाब से कही है’

तकरीबन 150 विज्ञापन फिल्में बना चुके ऐड मेकर देब मेढ़ेकर से उनकी पहली फिल्म बाइस्कोपवाला को लेकर प्रशांत वर्मा की बातचीत.

Sunil Dutt You Tube

सुनील दत्त: एक फिल्मी सितारे से कहीं बड़ी थी उनकी शख़्सियत

जब मुंबई में दंगे भड़के, तब सुनील दत्त ने अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए संसद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनका मानना था कि कांग्रेस ने हालात को सही से नहीं संभाला है और एक सांसद की हैसियत से वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं.

(फोटो साभार: ​फॉक्स स्टार स्टूडियो)

फिल्म उद्योग में ‘एलियन’ की तरह हूं: डैनी

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी ‘काबुलीवाला’ पर आधारित फिल्म ‘बाइस्कोपवाला’ में अभिनेता डैनी डेनजोंग्पा मुख्य किरदार निभा रहे हैं. फिल्म 25 मई को रिलीज़ हो रही है.

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हनुमान की नई छवि के मायने

हनुमान की यह छवि रचने वाले कलाकार करण आचार्य का कहना है कि उनके हनुमान शक्तिशाली हैं न कि दमनकारी. लेकिन जो इसे गर्व के साथ जोड़कर देख रहे हैं, वे शायद बिल्कुल ऐसा नहीं सोचते.

सत्यजीत रे. (फोटो साभार: क्रियेटिव कॉमन्स)

सत्यजीत रे: जिन्होंने परदे पर हीरो नहीं, बल्कि आम आदमी को रचा 

सत्यजीत रे ने देश की वास्तविक तस्वीर और कड़वे सच को बिना किसी लाग-लपेट के ज्यों का त्यों अपनी फिल्मों में दर्शाया. 1943 में बंगाल में पड़े अकाल को उन्होंने ‘पाथेर पांचाली’ दिखाया तो वहीं ‘अशनि संकेत’ में अकाल की राजनीति और ‘घरे बाइरे’ में हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद पर चोट की.

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दादा साहब फाल्के: सिनेमा की शुरुआत करने वाले की पहचान सिर्फ़ एक अवॉर्ड तक सीमित

जयंती विशेष: 1944 में उनकी एक गुमनाम शख़्स की तरह मौत हो गई जबकि तब तक उनका शुरू किया हुआ कारवां काफी आगे निकल चुका था. फिल्मी दुनिया की बदौलत कुछ शख़्सियतों ने अपना बड़ा नाम और पैसा कमा लिया था. घुंडीराज गोविंद फाल्के को हम आम तौर […]

फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा. (फोटो साभार: ट्विटर/@bollywoodsamba)

मेरी फिल्म ‘दासदेव’ पर शरत बाबू का कम, शेक्सपीयर का असर ज़्यादा है: सुधीर मिश्रा

साक्षात्कार: ‘ये वो मंज़िल तो नहीं’, ‘धारावी’, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी’ जैसी फिल्में बनाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त निर्देशक सुधीर मिश्रा से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

New Delhi: Congress leaders Renuka Chowdhury and Kumari Selja during the budget session of Parliament in New Delhi on Friday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI2_9_2018_000061B)

‘कांस्टिंग काउच’ की संस्कृति से संसद भी अछूती नहीं है: रेणुका चौधरी

कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि ‘कास्टिंग काउच’ एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जो सिर्फ़ फिल्म उद्योग तक सीमित नहीं.

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कास्टिंग काउच पर बोलीं सरोज ख़ान, फिल्म इंडस्ट्री रोटी तो देती है, रेप करके छोड़ नहीं देती

बॉलीवुड में कास्टिंग काउच के सवाल पर मशहूर कोरियोग्राफर ने दिया बयान, कहा हर क्षेत्र में होता है महिलाओं का शोषण, सिर्फ बॉलीवुड के पीछे क्यों पड़े हैं.

Padman

बॉलीवुड का नया ‘आदर्श’ भारतीय, राष्ट्रवादी और सरकार का पैरोकार है

अब फिल्मों में एक नया तत्व दिखाई दे रहा है. यह है उग्र राष्ट्रवादी तेवर, जो न सिर्फ सोशल मीडिया और समाज के एक ख़ास वर्ग में दिखाई देने वाली भावावेश भरी राष्ट्रीयता से मेल खाता है, बल्कि वर्तमान सरकार के एजेंडे के साथ भी अच्छे से कदम मिलाकर चलता है.

मुहम्मद अली, टॉमी स्मिथ, जॉन कॉर्लोस और कॉलिन केपरनिक. फोटो: रॉयटर्स)

हमारे ‘महान’ खिलाड़ी मुश्किल समय में जनता के साथ क्यों नहीं खड़े होते?

हमारे महान खिलाड़ियों को जनता सिर-आंखों पर बैठाती है, मगर जनता पर जब ऐसी कोई त्रासदी बरपा करती है- जिसके लिए सरकार या समाज का एक वर्ग ज़िम्मेदार हो तो वे ऐसे विलुप्त हो जाते हैं, गोया इस दुनिया में रहते न हों.

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‘आपकी भव्य फिल्म के अंत में मैंने ख़ुद को महज़ एक योनि में सिमटता हुआ महसूस किया’

निर्देशक संजय लीला भंसाली को लिखे एक ख़त में फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने पद्मावत फिल्म को सती और जौहर प्रथाओं का महिमामंडन बताते हुए सवाल उठाए हैं.

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हमारे सुपरस्टार सत्ता की ख़ुशामद क्यों करते हैं?

एक बार शोहरत या पैसा, या दोनों हासिल कर लेने के बाद भारतीय अभिनेता, कारोबारी और खिलाड़ी सामाजिक मुद्दों या सरकार के ख़िलाफ़ बोलकर इसे दांव पर लगाने का ख़तरा मोल नहीं लेना चाहते.

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अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ​विवाद: ज्यूरी के एक और सदस्य का इस्तीफा

मंत्रालय के फैसले से पैनोरमा में दिखायी जाने वाली फिल्मों के निर्देशक भी नाराज़. कहा महोत्सव का बहिष्कार करने की बजाए हिस्सा लेकर करेंगे फैसले का विरोध.

Hrishikesh Mukherji

हृषिकेश मुखर्जी: जिसने सिनेमा के साथ दर्शकों की भी नब्ज़ पढ़ ली थी

हृषिकेश सिनेमा के रास्ते पर आम परिवारों की कहानी की उंगली थामे निकले थे. ये समझाने कि हंसी या आंसुओं को अमीर-गरीब के खांचे में नहीं बांटा जा सकता.

Amar Akbar Anthony 1

सेकुलर भारत की याद दिलाती है अमर अकबर एंथनी

एक अलग भारत और उसके केंद्रीय मूल्यों को याद कराने के लिए फिल्म अमर अकबर एंथनी बुरा विचार नहीं है. यह आज के नौजवानों को यह बतलाएगा कि भारत हमेशा से वैसा नहीं था, जैसा कि आज है.

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गुरुदत्त एक अनसुलझा क्रॉसवर्ड है, जिसमें कोई न कोई शब्द पूरा होने से रह ही जाता है

जन्मदिन विशेष: गुरुदत्त फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा सूरज थे, जो बहुत कम वक़्त के लिए अपनी रौशनी लुटाकर बुझ गया पर सिल्वर स्क्रीन को कुछ यूं छू कर गया कि सब सुनहरा हो गया.

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हिंदुस्तानी सिनेमा में महिला स्वर

सिनेमा निर्माण के इतने दशकों के बाद भी हिंदुस्तानी सिनेमा में महिला निर्देशकों की संख्या को उंगलियों पर गिना जा सकता है. सिनेमाई दुनिया में भी घोर लैंगिक असमानता है.

Tubelight1

जो जंग की बात करे उसे बंदूक देकर मोर्चे पर भेज दो, जंग ख़त्म हो जाएगी: सलमान

युद्ध पर आधारित अपनी आने वाली फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ की प्रेस वार्ता के दौरान सलमान ने कहा जंग में कोई अपना बेटा खोता है तो कोई अपना पिता.

Vinod Khanna

विनोद खन्ना: मुहब्बत अदावत वफ़ा बेरुखी, किराये के घर थे बदलते रहे

विनोद खन्ना के हिस्से में ज़्यादातर इल्ज़ाम ही आए पर जो ज़िंदगी उन्होंने गुज़ारी, फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच उसे चुन पाना बेहद मुश्किल होता है.

Dangal Movie 1

अक्षय को राष्ट्रीय पुरस्कार देने वाले जूरी अध्यक्ष बोले, दंगल सामाजिक मुद्दे पर बात नहीं करती

जूरी अध्यक्ष प्रियदर्शन ने कहा कि जब रमेश सिप्पी ने अमिताभ बच्चन को पुरस्कार दिया था तब किसी ने सवाल नहीं उठाया तो आज मुझ पर सवाल क्यों?

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पद्म भूषण के लिए पीछे पड़ने वाले गडकरी के बयान ने मुझे दुख पहुंचाया: आशा पारेख

बीते ज़माने की मशहूर अभिनेत्री आशा पारेख ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान कि पद्मभूषण पुरस्कार पाने के लिए मैं उनके पीछे पड़ी थी, काफी दुखद था.

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फिल्मकारों के प्रति सरकार का रवैया विनाशकारी है: अदूर गोपालकृष्णन

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता ने कहा, मैंने उन सरकारी अधिकारियों के चेहरे पर आनंद देखा है जो जानते हैं कि वे हमारे रचनात्मक कार्यों को बर्बाद कर रहे हैं.

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फिल्म इंडस्ट्री ने धमकी और ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने की आदत बना ली है

आज ये फिल्मों और किताबों के बारे में है, कल ये पत्रकारिता या किसी और बारे में होगा. आज़ादी में हो रही इस दख़लअंदाज़ी के ख़िलाफ़ खड़ा होना अब ज़रूरी हो गया है.

merrut

क्या आपको पता है कि मेरठ में एक फिल्म इंडस्ट्री भी है?

राजधानी दिल्ली से लगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की अपनी फिल्म इंडस्ट्री है जिसे यहां के लोगों ने ‘मॉलीवुड’ नाम दिया हुआ है.

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भोजपुरी फिल्म फेस्टिवल : अपने ही जाल में उलझा भोजपुरी सिनेमा

बदलते दौर के भौतिक चमक-दमक को तो भोजपुरी सिनेमा खूब दिखाता है, पर सामाजिक -सांस्कृतिक मूल्यों की जड़ता से नहीं भिड़ता. वह एक बड़े विभ्रम का शिकार है.