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A statue of Hindu Lord Ram is seen after Supreme Court's verdict on a disputed religious site, in Ayodhya, India, November 10, 2019. REUTERS/Danish Siddiqui

आयकर छूट के दायरे में आएगा राम मंदिर ट्रस्ट में दिया गया दान

एक नोटिफिकेशन में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ को आयकर अधिनियम के तहत ‘ऐतिहासिक महत्व और सार्वजनिक पूजा का महत्वपूर्ण स्थान’ के रूप में अधिसूचित किया और ट्रस्ट में दान करने वालों को 50 फीसदी की सीमा तक कटौती प्रदान की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

आईआरएस अधिकारियों का अमीरों पर कोरोना टैक्स का सुझाव, वित्त मंत्रालय ने ‘गैरजिम्मेदार कदम’ कहा

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कहा कि आयकर विभाग के उन 50 आईआरएस अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की जा रही है, जिन्होंने कोविड-19 से जुड़े राहत उपायों के लिए राजस्व जुटाने पर एक अवांछित रिपोर्ट तैयार की है और इसे बिना अनुमति के सार्वजनिक भी कर दिया.

सीबीडीटी चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी. (फोटो: ट्विटर)

सीबीडीटी अधिकारी ने चेयरमैन पर लगाया आरोप, कहा- विपक्षी नेता पर कार्रवाई कर सुनिश्चित किया पद

सीबीडीटी चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए महिला कर अधिकारी अल्का त्यागी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रधानमंत्री कार्यालय, सीवीसी और कैबिनेट सचिव को बीते जून में पत्र लिखा था. हालांकि, शिकायत के दो महीने बाद सरकार ने सीबीडीटी चेयरमैन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया जबकि अल्का त्यागी का नागपुर ट्रांसफर कर दिया.

(फोटो: रॉयटर्स)

भ्रष्टाचार के आरोप में कर विभाग के 22 अधिकारियों को सेवानिवृत्त किया गया

इससे पहले जून महीने में भारतीय राजस्व सेवा के 27 वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रष्टाचार और विभिन्न आरोपों में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दे दी गई थी. इनमें से 12 अधिकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से थे.

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नरेंद्र मोदी का ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान महज़ पाखंड है

मोदी का प्रचार करने वाले उन्हें ‘चौकीदार’ कहने वाले अभियान के सहारे उनकी छवि बदलना चाहते हैं. हालांकि उनकी भ्रष्टाचार-विरोधी साख की सच्चाई का पता उनके कार्यालय और सरकार द्वारा बड़े उद्योगपतियों के कथित आपराधिक भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई न करने से लगाया जा सकता है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा- आतंकवाद के चलते कंप्यूटरों की निगरानी ज़रूरी

केंद्र सरकार ने कहा कि यह ज़रूरी है कि कानूनी इंटरसेप्शन (निगरानी) के अनुरोध का मामला कार्यपालिका अधिकारियों द्वारा देखा जाना चाहिए ताकि फैसले लेने में गति और तत्परता बरकरार रखी जा सके.

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इंटेलीजेंस ब्यूरो का काम ही भारत के सत्ताधीशों की भारतीयों से हिफ़ाज़त करना रहा है

1887 में ब्रिटिश राज द्वारा बनाए गए इंटेलीजेंस ब्यूरो को भारतीय क़ानून के तहत कोई अधिकार प्राप्त नहीं है. इसे आधिकारिक रूप से ‘एक नागरिक संगठन बताया जाता है, जिसके पास पुलिस जैसी शक्तियां नहीं हैं.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने 10 एजेंसियों को निगरानी की इजाजत वाले फैसले पर मोदी सरकार को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई छह हफ्ते बाद की जाएगी. उसी समय इस याचिका पर विचार किया जाएगा कि क्या गृह मंत्रालय के इस आदेश पर रोक लगाया जा सकता है या नहीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

देश के सभी कंप्यूटर सरकार की निगरानी में, 10 एजेंसियां रखेंगी नज़र

बीते 20 दिसंबर को गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिल्ली पुलिस कमिश्नर, सीबीडीटी, डीआरआई, ईडी, रॉ, एनआई जैसी 10 एजेंसियों को देश में चलने वाले सभी कंप्यूटर की निगरानी करने का अधिकार दिया.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Indian Community, at Madison Square Garden, in New York on September 28, 2014.

प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि भारतीय पासपोर्ट का वजन बढ़ा है, तो अमीर नागरिकता क्यों छोड़ रहे हैं?

दुनिया भर में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर है, जिसके अरबपति नागरिकता छोड़ देते हैं. 2015 और 2017 के बीच 17,000 अति अमीर भारतीयों ने प्यारे भारत का त्याग कर दिया.

(फोटो: पीटीआई)

चार सालों में विभिन्न दलों को मिले 637.54 करोड़ के चंदे में से 488.94 करोड़ रुपये भाजपा के नाम

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्टोरल ट्रस्ट द्वारा दिए गए कुल चंदे में से 92.30 प्रतिशत यानी 588.44 करोड़ रुपये पांच राष्ट्रीय दलों की जेब में गए हैं. वहीं क्षेत्रीय दलों के खाते में सिर्फ 7.70 प्रतिशत या 49.09 करोड़ रुपये की राशि गई.

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क्या टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादक ने अपने हित के लिए पत्रकारिता को ताक पर रख दिया?

अगर संपादक मंत्री से कहकर किसी नियुक्ति में कोई बदलाव करवा सकते हैं, तो क्या इसके एवज में मंत्रियों को अख़बारों की संपादकीय नीति प्रभावित करने की क्षमता मिलती है?