सुभाष चंद्र बोस

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

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क्यों कुछ लोग मानते हैं कि अयोध्या में रहने वाले गुमनामी बाबा ही सुभाष चंद्र बोस थे

असाधारण जीवन की तरह असाधारण मृत्यु ने नेताजी के इर्द-गिर्द रहस्यों का जाल-सा बुन दिया है. दुखद यह है कि जांच आयोगों के भंवरजाल में नेताजी किसी जासूसी कथा के नायक बन गए हैं.

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‘सेंसर बोर्ड कॉरपोरेट की फिल्म तुरंत पास करता है पर छोटे बजट की फिल्मों पर अंकुश लगाता है’

‘राजनीति की तरह ही फिल्म जगत में भी कुछ परिवारों का कब्ज़ा है. दादाजी फिल्म बनाते थे, उनके बेटे बनाते थे. हम जैसे बाहर से आए हुए लोगों को दिक्कत होती है.’