सूचना का अधिकार कानून

(फोटो: रॉयटर्स)

राजनीतिक दलों को आरटीआई के तहत लाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर

भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर करते हुए निर्देश देने की मांग की है कि सभी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां चार सप्ताह के भीतर जन सूचना अधिकारी, सक्षम प्राधिकरण नियुक्त करें और आरटीआई कानून, 2005 के तहत सूचनाओं का खुलासा करें.

बिहार में मार दिए गए आरटीआई कार्यकर्ता ​शशिधर मिश्रा, रामकुमार ठाकुर और वाल्मीकि यादव (बाएं से दाएं).

बिहार में क्यों निशाने पर हैं आरटीआई कार्यकर्ता?

विशेष रिपोर्ट: एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 से लेकर अब तक देशभर में 79 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है, जिसमें क़रीब 20 फीसदी की हत्याएं केवल बिहार में हुई हैं. साल 2018 में बिहार में पांच आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले सामने आए हैं.

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु. (फोटो: धीरज मिश्रा/द वायर)

‘श्रीकृष्णा कमेटी द्वारा सुझाया गया संशोधन आरटीआई क़ानून को बर्बाद कर देगा’

विशेष साक्षात्कार: डेटा सुरक्षा बिल, सूचना के अधिकार और निजता के अधिकार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. मदाभूषनम श्रीधर आचार्युलु से धीरज मिश्रा की बातचीत.

New Delhi

नई दिल्ली में आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या

नवल किशोर आरटीआई कार्यकर्ता होने के साथ चांदनी चौक इलाके में लाल किले के सामने कपड़े की दुकान लगाया करते थे. नवल के आरटीआई लगाने की वजह से कई लोगों की दुकानें सील हो गई थीं.

Jamui

बिहार: दो आरटीआई कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या, जदयू के प्रखंड अध्यक्ष गिरफ़्तार

बिहार के जमुई ज़िले में मारे गए आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या का कारण पंचायत विकास से जुड़ी योजनाओं में लूट खसोट को उजागर करना बताया जा रहा है.

अरुणा रॉय (फोटो साभार: फेसबुक/Azim Premji University)

ह्विसिल ब्लोअर क़ानून में आरटीआई कार्यकर्ताओं के संरक्षण की आवश्यकता: अरुणा रॉय

सूचना का अधिकार क़ानून के लिए चले आंदोलन का नेतृत्व करने वालीं अरुणा रॉय ने कहा कि अब तक 70 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ता भ्रष्टाचार का खुलासा करने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने के बदले में मारे गए हैं.

JKB EP 224

जन गण मन की बात, एपिसोड 224: सूचना का अधिकार

जन गण मन की बात की 224वीं कड़ी में विनोद दुआ सूचना के अधिकार अधिनियम के सफ़र पर प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय से चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: पीटीआई

प्रधानमंत्री मोदी के आधार कार्ड और मतदाता पहचान-पत्र का ब्यौरा नहीं दिया जा सकता: सूचना आयोग

सूचना का अधिकार कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत निजी सूचना से जुड़ी ऐसी जानकारियां नहीं देने की छूट है जिनका व्यापक जनहित से कोई संबंध नहीं है या जिससे किसी व्यक्ति की निजता में अवांछित दखल होता हो.