सेंसर बोर्ड

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निहलानी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाए गए, प्रसून जोशी बने नए अध्यक्ष

पहलाज निहलानी 2015 में हुई अपनी नियुक्ति के समय से ही विभिन्न विवादास्पद कदमों और बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहे हैं.

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लिपस्टिक अंडर माय बुरक़ा बोल्ड है, मगर स्त्रीवादी नहीं

सिगरेट-शराब पीने और सेक्स को आज़ादी का प्रतीक मानने के पुराने, बार-बार आजमाए जा चुके नुस्खे के साथ यह फिल्म इस पितृसत्तात्मक समझ का ही प्रसार करती हैं कि औरतें झूठी और बेवफा होती हैं.

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‘ये तो पैंट-शर्ट पहने हैं, ये महिला थोड़ी न हैं!’ सेंसर बोर्ड सदस्य ने निर्माता पर की टिप्पणी

बाबूमोशाय बंदूकबाज़ की फिल्म निर्माता किरन श्रॉफ ने बताया कि सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने उनसे कहा कि ख़ुशनसीब हो जो कि तुम्हारी फिल्म बैन नहीं हुई.

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‘वॉचमैन’ से तुलना किए जाने पर भड़के पहलाज, आइफा को भेजा क़ानूनी नोटिस

आइफा समारोह में एक एक्ट के दौरान अभिनेता रितेश देशमुख और मनीष पॉल ने सेंसर बोर्ड प्रमुख पहलाज निहलानी का मज़ाक उड़ाया था.

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‘हमारा देश इतना महान है कि हैदर जैसी भारत-विरोधी फिल्म को भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिल जाता है’

साक्षात्कार: सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के रूप में पहलाज निहलानी का ढाई साल का कार्यकाल कई तरह के विवादों में रहा. उनसे बातचीत.

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ट्रेलर में ‘इंटरकोर्स’ सुनकर भड़के निहलानी, उठाएंगे कड़े कदम

इम्तियाज़ अली की आने वाली फिल्म जब हैरी मेट सेजल के डायलॉग प्रोमो में ‘इंटरकोर्स’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए सेंसर बोर्ड अध्यक्ष ने ट्रेलर टीवी पर दिखाए जाने पर क़ानूनी कदम उठाने की बात कही है.

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विभाजन से जुड़ी फिल्मों से पाकिस्तान डरता क्यों है?

पाकिस्तान से विशेष: अगर बेग़म जान या पाकिस्तान के बाहर विभाजन पर बनी कोई फिल्म सरकार को इतना डरा देती है कि उसे बैन करने से पहले देखना तक ज़रूरी नहीं समझा जाता, तो यह दिखाता है कि ये मुल्क किस कदर असुरक्षा और डर में जी रहा है.

Shunyota

नोटबंदी पर बनी बंगाली फिल्म ‘शून्योता’ पर सेंसर बोर्ड ने लगाई रोक

नोटबंदी पर बनी एक बंगाली फिल्म की रिलीज़ पर सीबीएफसी के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने रोक लगा दी है. इस फिल्म को मंज़ूरी देने के लिए सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को भेजा गया है.

CBFC

तेलुगु फिल्म को मंजूरी नहीं देने पर सेंसर बोर्ड के दफ्तर में तोड़फोड़

तेलुगु फिल्म ‘शरणम गच्छामी’ को मंजूरी नहीं देने पर सीबीएफसी के हैदराबाद स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई.

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फिल्म इंडस्ट्री ने धमकी और ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने की आदत बना ली है

आज ये फिल्मों और किताबों के बारे में है, कल ये पत्रकारिता या किसी और बारे में होगा. आज़ादी में हो रही इस दख़लअंदाज़ी के ख़िलाफ़ खड़ा होना अब ज़रूरी हो गया है.