सेप्टिक टैंक

Patan Gujarat

गुजरात: सेप्टिक टैंक के तौर पर इस्तेमाल हो रहे कुएं में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत

गुजरात के पाटन ज़िले का मामला. कुएं में दुर्घटनावश परिवार के एक सदस्य के गिर जाने के बाद चार अन्य लोग उन्हें बचाने के लिए गए थे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, कोई देश अपने लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर में नहीं भेजता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की स्वतंत्रता को 70 साल से अधिक बीत चुके हैं लेकिन आज भी जातिगत भेदभाव बरक़रार है. हर महीने मैला ढोने के काम में लगे चार से पांच लोग की मौत हो रही है.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गाजियाबाद: सीवर लाइन बनाने के दौरान दम घुटने से पांच मजदूरों की मौत

ठेकेदार ने मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है.

प्रतीकात्मक फोटो पीटीआई

सीवर सफाईकर्मियों की मौतों से जुड़े मामलों में किसी को सज़ा नहीं हुई: सरकार

सामाजिक न्याय और अधिकारिता सचिव नीलम साहनी ने स्वीकार किया कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान सफाई कर्मचारियों की मौत का सिलसिला अभी भी जारी है और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के बावजूद इन सभी मामलों में 10 लाख रुपये के मुआवजे का भी भुगतान नहीं किया गया.

(फोटो: जाह्नवी सेन/द वायर)

मैला ढोने पर रोक के बावजूद कम से कम तीन गुना बढ़ गई मैला ढोने वालों की संख्या

साल 2018 में 18 राज्यों के 170 जिलों में सर्वे कराया गया था. इस दौरान कुल 86,528 लोगों ने खुद को मैला ढोने वाला बताते हुए रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन राज्य सरकारों ने सिर्फ 41,120 लोगों को ही मैला ढोने वाला माना है. बिहार, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और तेलंगाना ने दावा किया है कि उनके यहां मैला ढोने वाला एक भी व्यक्ति नहीं है.

प्रतीकात्मक फोटो पीटीआई

2019 के शुरुआती छह महीने में सीवर सफाई के दौरान 50 लोगों की मौतः रिपोर्ट

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़े सिर्फ आठ राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के हैं.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय तीन कर्मचारियों की मौत, दो की हालत गंभीर

मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ ज़िले का है. पिलखुवा थाना क्षेत्र के टैक्सटाइल सिटी में स्थित जीएस दास कैमिकल फैक्ट्री में शुक्रवार दोपहर सेप्टिक टैंक की सफाई करने के लिए एक कर्मचारी उतरा था, जबकि बाकी चार उसे बचाने के लिए टैंक में उतरे थे.

प्रतीकात्मक तवसीर (फोटो: रायटर्स)

सफाईकर्मियों की मौत पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- लोग मर रहे हैं, किसी को तो जेल जाना पड़ेगा

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड, नई दिल्ली नगर निगम और दिल्ली नगर निगम समेत 10 नगर निकायों को आदेश दिया है कि वे हलफनामा दायर कर बताएं कि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मैनुअल स्कैवेंजर्स को नौकरी पर रखते हैं या नहीं.

(फोटो: जाह्नवी सेन/द वायर)

मैला ढोने का काम कराने वालों को सजा देने के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं: केंद्र

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में बताया कि पिछले तीन सालों में 88 लोगों की सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौत हो गई. सबसे ज्यादा 18 मौतें दिल्ली में हुईं.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

हरियाणा में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से चार की मौत

आरोप है कि सफाईकर्मियों ने बिना सुरक्षा उपकरण के सेप्टिक टैंक में घुसने से मना कर दिया था, लेकिन उन पर दबाव डालकर टैंक साफ करने के लिए मजबूर किया गया.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुजरात: सेप्टिक टैंक में दम घुटने से चार सफाई कर्मचारियों समेत सात की मौत

यह घटना गुजरात के दाभोई तालुका की है. सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे सफाई कर्मचारियों को खोजने एक-एक कर लोग गए और सभी की अंदर दम घुटने से मौत हो गई.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्ली: सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मज़दूरों की मौत, तीन घायल

पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार दोपहर में रोहिणी के प्रेम नगर इलाके में हुई. पांच मज़दूर एक पुराने मकान के सेप्टिक टैंक में उतरने के बाद बेहोश हो गए. अस्पताल में इलाज के दौरान उनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुड़गांव: ऑटोमोबाइल कंपनी में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो लोगों की मौत

तीसरे व्यक्ति की हालत बहुत गंभीर है और उनका इलाज चल रहा है. अभी इस मामले में केस दर्ज किया जाना बाकी है.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्ली जल बोर्ड के सीवर की सफाई के दौरान एक व्यक्ति की मौत

पीड़ित की पहचान बिहार में कटिहार के निवासी डूमन राय के रूप में हुई है. जहांगीरपुरी इलाके में हुई घटना के संबंध में सुपरवाइज़र गिरफ़्तार.

(फोटो: जाह्नवी सेन/द वायर)

क्या सरकार मैला ढोने वालों की संख्या जानबूझकर कम बता रही है?

केंद्र के अधीन काम करने वाली संस्था नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने बताया कि 163 ज़िलों में कराए गए सर्वे में 20,000 लोगों की पहचान मैला ढोने वालों के तौर पर हुई है. हालांकि संस्था ने ये आंकड़ा नहीं बताया कि कितने लोगों ने दावा किया था कि वे मैला ढोने के काम में लगे हुए हैं.

Sewer Death

सीवर सफाई के दौरान मौत: ज़्यादातर मामलों में न तो एफआईआर दर्ज और न ही मुआवज़ा मिला

मैला ढोने की प्रथा खत्म करने के लिए काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था राष्ट्रीय ग्रामीण अभियान द्वारा 11 राज्यों में कराए गए सर्वेक्षण से ये जानकारी सामने आई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई/शमीम क़ुरैशी)

स्वच्छता अभियान: सरकार को नहीं पता सीवर सफाई के दौरान कितनों की गई जान, कितनों को मिला मुआवज़ा

विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के पास यह जानकारी भी नहीं है कि देश में कुल कितने सफाईकर्मी हैं. 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1993 से लेकर अब तक सीवर में दम घुटने की वजह हुई मौतों और मृतकों के परिवारों की पहचान कर उन्हें 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया था.

दिल्ली के मोतीनगर में स्थित डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स (फोटो: संतोषी मरकाम/द वायर)

डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स: ‘उन्हें सीवर में जबरन उतारा गया, हादसे के बाद किसी ने ख़बर तक नहीं दी’

ग्राउंड रिपोर्ट: पश्चिम दिल्ली के मोती नगर इलाके में स्थित डीएलएफ कॉम्प्लेक्स में सीवेज टैंक साफ करते समय दम घुटने की वजह से पांच लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों के परिजनों का आरोप है कि हाउसकीपिंग के लिए रखे गए कर्मचारियों को टैंकों की सफाई के लिए मजबूर किया गया था.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

सेप्टिक टैंक में दम घुटने से छत्तीसगढ़ में पांच और दिल्ली में एक की मौत

छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले में हुए हादसे में मकान मालिक की पत्नी की भी मौत, वहीं दिल्ली में सीवर में गिरे 27 वर्षीय युवक की मौत. हाल ही में दिल्ली के मोती नगर स्थित डीएलएफ की कैपिटल ग्रीन्स सोसाइटी में भी सफाई के दौरान पांच लोगों की मौत हो गई थी.

(फोटो साभार: फेसबुक/Dlf Capital Greens Moti Nagar)

दिल्ली: डीएलएफ कॉम्प्लेक्स में सीवर साफ करते समय दम घुटने से पांच लोगों की मौत

नई दिल्ली के मोती नगर की घटना. प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मैनेजमेंट ने हाउसकीपिंग के लिए रखे गए कर्मचारियों को टैंकों की सफाई के लिए मजबूर किया गया था. कार्रवाई की मांग को लेकर मृतकों के परिजनों ने किया प्रदर्शन.

(फोटो साभार: ट्विटर/भाजपा)

मोदी सरकार ने चार साल में मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए एक रुपया भी जारी नहीं किया

विशेष रिपोर्ट: आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए कोई राशि जारी नहीं की गई है. इससे पहले आखिरी बार 2013-14 यानी यूपीए कार्यकाल में जारी 55 करोड़ रुपये में से 24 करोड़ रुपये अभी तक खर्च नहीं हुए हैं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

बिहार: सेप्टिक टैंक में दम घुटने से चार मजदूरों की मौत

सहरसा ज़िले की घटना. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने बताया कि श्रमिकों की मौत दम घुटने के कारण हुई है क्योंकि सेप्टिक टैंक कार्बन डाई ऑक्साईड गैस से भरा हुआ था.

Purnea

बिहार के पूर्णिया में सेप्टिक टैंक की मरम्मत के दौरान तीन मज़दूरों की मौत

दम घुटने से मौत होने की आशंका. तीनों मज़दूरों में से दो सगे भाई थे. स्थानीय लोगों ने करंट लगने से मौत होने का आरोप लगाया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रायटर्स)

2017 में सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 12 लोगों की मौत: दिल्ली सरकार

दिल्ली विधानसभा में शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मरने वाले कोई भी नगर निगम या सरकार के किसी अन्य नगर निकाय से संबद्ध नहीं था.

Episode 3 Plain

हम भी भारत, एपिसोड 03: स्वच्छ भारत अभियान और सफ़ाईकर्मियों की मौत

हम भी भारत की तीसरी कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी सीवर सफ़ाई के दौरान लगातार हो रहीं कर्मचारियों की मौतों पर वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह और हेजर्ड्स सेंटर के दुनू रॉय से चर्चा कर रही हैं.

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुड़गांव में फैक्ट्री टैंक से सहकर्मी को बचाने की कोशिश में तीन लोगों की मौत

घटना सेक्टर 37 औद्योगिक इलाके में जेएनजे इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में हुई. पुलिस ने कंपनी के अधिकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज की प्राथमिकी.

प्रतीकात्मक फोटो पीटीआई

नोएडा में सीवर की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत

नोएडा के सेक्टर-110 में सीवर की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई. घटना के बाद से नोएडा विकास प्राधिकरण का ठेकेदार फरार.

बेज़वाड़ा विल्सन. (फोटो साभार: Development Dialogue/Facebook)

सफाईकर्मियों की मौत के लिए सरकारों में इच्छाशक्ति की कमी ज़िम्मेदार है: बेज़वाड़ा विल्सन

सफाई कर्मचारी आंदोलन के अध्ययन के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में 1470 सीवर सफाईकर्मियों की जान गई. इस दौरान दिल्ली में 74 सफाईकर्मियों की मौत सीवर साफ करते समय हुई.

Manual Scavenging Reuters

दिल्ली में एक महीने के अंदर नाला सफाई के दौरान नौ कर्मचारियों की मौत

राजधानी के शाहदरा इलाके में एक शॉपिंग मॉल के बेसमेंट में नाला साफ करते समय दो भाइयों की शनिवार को हुई मौत.

septic tank reuters

दिल्ली में सीवर सफाई के दौरान फिर तीन कर्मचारियों की मौत

रविवार को दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में सफाई के दौरान तीनों कर्मचारी जहरीली गैस की चपेट में आ गए थे. 15 जुलाई को घिटोरनी इलाके में चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी.