हाथरस गैंगरेप

(फोटो: पीटीआई)

हाथरस गैंगरेप: पीड़िता की पहचान बताने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और फेसबुक-ट्विटर को नोटिस भेजा

हाथरस ज़िले में सितंबर 2020 में एक दलित युवती से बलात्कार कर बेरहमी से मारपीट की गई थी, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी. दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले मीडिया प्रकाशनों समेत कई के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस के डीएम का तबादला, पीड़ित परिवार ने कहा- उन्हें बर्ख़ास्त करने की मांग करते रहेंगे

हाथरस के ज़िलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार पिछले साल सितंबर महीने में एक दलित लड़की से कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के मामले में अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में आए थे. आरोप है कि लड़की की मौत के बाद प्रशासन ने परिवार की सहमति के बिना आधी रात में उसका अंतिम संस्कार कर दिया था.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दायर की, चारों आरोपियों पर गैंगरेप व हत्या के आरोप

उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले में 14 सितंबर को ठाकुर जाति के चार युवकों ने कथित तौर पर एक दलित युवती से बलात्कार कर बेरहमी से मारपीट की थी, जिसके बाद इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी. सीबीआई ने अभियुक्तों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत भी आरोप भी लगाए हैं.

केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन. (फोटो साभार: ट्विटर/@vssanakan)

हाथरस: गिरफ़्तार पत्रकार के मामले में अर्णब गोस्वामी का हवाला देने पर कोर्ट ने कहा- हर मामला अलग

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते पांच अक्टूबर को हाथरस जाने के रास्ते में केरल के एक पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट लेकर जाने को कहा था, जिस पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा था कि अर्णब गोस्वामी मामले को इसी अदालत में सुना गया था.

लखनऊ में पीयूसीएल के सदस्यों की प्रेस कॉन्फ्रेंस (फोटोः इस्मत आरा)

हाथरस का पीड़ित परिवार सुरक्षित नहीं, अफ़सरों पर चले मुक़दमा: नागरिक अधिकार संस्था

नागरिक अधिकार संस्था ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ ने उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और हत्‍या के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की है. संस्था का कहना है परिवार नज़रबंद जैसी स्थितियों में रह रहा है. सीबीआई को मामले में पुलिस की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट करेगा सीबीआई जांच की निगरानी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच पूरी हो जाने के बाद अदालत फ़ैसला करेगी कि मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया जाए या नहीं.

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उत्तर प्रदेश: ग़ाज़ियाबाद के गांव में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने क्यों बौद्ध धर्म अपनाया

वीडियो: उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के कथित बलात्कार और मौत के बाद प्रशासन के व्यवहार से आहत ग़ाज़ियाबाद के करहैड़ा गांव के वाल्मीकि समुदाय के 236 लोगों ने बीते 14 अक्टूबर को बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था.

गाजियाबाद के करहैड़ा गांव में बौद्ध धर्म की दीक्षा लेते बाल्मीकि समुदाय के लोग. (फोटो साभार: ट्विटर/@Raj_Ambedkar)

ग़ाज़ियाबादः वाल्मीकि समुदाय के 236 लोगों के धर्म परिवर्तन मामले में एफ़आईआर दर्ज

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के कथित बलात्कार और मौत के बाद प्रशासन के व्यवहार से आहत ग़ाज़ियाबाद के करहैड़ा गांव के दलित समुदाय के 236 लोगों ने बीते 14 अक्टूबर को हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था.

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हाथरस मामले में मीडिया को बयान देने वाले दो एएमयू डॉक्टरों का कार्यकाल बढ़ाया गया

हाल ही में एएमयू प्रशासन ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में अस्थायी चिकित्साधिकारी के तौर पर काम कर रहे डॉक्टर मोहम्मद अज़ीमुद्दीन मलिक और डॉक्टर उबैद इम्तियाज़ हक़ की सेवाएं समाप्त कर दी थी. इन्होंने हाथरस बलात्कार मामले में पुलिस के उलट बयान दिया था.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

गाज़ियाबाद: हाथरस मामले से आहत वाल्मीकि समुदाय के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया

गाज़ियाबाद के करहैड़ा गांव में बौद्ध धर्म अपनाने वाले एक शख़्स ने कहा कि उन्होंने पहले भी धर्म परिवर्तन पर विचार किया था लेकिन हाथरस की घटना ने उन्हें बुरी तरह हिला दिया. इन सभी 236 लोगों ने डॉ. बीआर आंबेडकर के परपौत्र राजरत्न आंबेडकर की मौजूदगी में बौद्ध धर्म अपनाया है.

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हाथरस पीड़िता के साथ रेप को लेकर यूपी पुलिस के उलट बयान देने वाले डॉक्टर को एएमयू ने निकाला

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के डॉ. अज़ीम मलिक ने यूपी पुलिस के दावों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए 11 दिन बाद सैंपल लिए जाने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इससे बलात्कार होने की पुष्टि नहीं हो सकती है. घटना के बाद युवती का इलाज इसी अस्पताल में हो रहा था.

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शोषण का पूर्वाभ्यास

वीडियो: निर्भया कांड जैसे वीभत्स हादसे के बाद इसका दोहराव न होने की दुआ सभी ने की थी, लेकिन अब हाथरस कांड हमारे सामने है. क्या ये महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा का अंत है? इस बारे में दामिनी यादव के विचार.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

दलितों ने जो अधिकार संघर्ष से हासिल किए थे, आज वो सब खोते जा रहे हैं

बहुत सारे अधिकार संविधान सभा की बहसों से निकले थे, जब भारतीय संविधान बना तो उसमें उन अधिकारों को लिख दिया गया और बहुत सारे अधिकार बाद में दलितों ने अपने संघर्षों-आंदोलनों से हासिल किए थे. हालांकि दलितों का बहुत सारा समय और संघर्ष इसी में चला गया कि राज्य ने उन अधिकारों को ठीक से लागू नहीं किया.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

हाथरस मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट को देखने दें, कोई समस्या हुई तो हम हैं: सुप्रीम कोर्ट

हाथरस मामले को उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की निगरानी इलाहाबाद हाईकोर्ट ही करेगा. मामले में कई अन्य वकील भी बहस करना चाहते थे, जिस पर पीठ ने कहा कि हमें पूरी दुनिया की मदद की ज़रूरत नहीं है.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस पीड़िता का शव आधी रात में जलाना मानवाधिकार का उल्लंघन था: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस के तत्कालीन एसपी के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने और डीएम को बख़्श देने पर सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने एक मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से युवती के साथ बलात्कार न होने का दावा करने वाले अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार को फटकार लगाते हुए बलात्कार की परिभाषा में हुए बदलावों की जानकारी मांगी.