हिंदी सिनेमा

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा. (फोटो: रॉयटर्स)

युवाओं को सपने देखने दें, उन्हें उनका हक़ दें: प्रियंका चोपड़ा

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि शिक्षित होना और सशक्त होना अलग-अलग बाते हैं. सशक्त व्यक्ति ग़लत मान्यताओं और परंपराओं के ख़िलाफ़ खड़ा होना जानता है.

अभिनेता राजेश शर्मा. (फोटो साभार: यूट्यूब)

हम हीरो नहीं हैं, हम फिल्म नहीं चुनते, फिल्में हमें चुनती हैं: राजेश शर्मा

खोसला का घोंसला, नो वन किल्ड जेसिका, लव शव ते चिकन खुराना और स्पेशल 26 जैसी फिल्मों में ख़ास भूमिका निभाने वाले अभिनेता राजेश शर्मा से बातचीत.

अभिनेत्री रिचा चड्ढा. (फोटो साभार: फेसबुक/रिचा चड्ढा)

सुरक्षा मिले तो यौन उत्पीड़न करने वालों का खुलासा ज़रूर करूंगी: रिचा चड्ढा

बॉलीवुड अभिनेत्री रिचा चड्ढा ने कहा, यौन उत्पीड़न करने वालों का नाम नहीं लिया जा सकता क्योंकि उसके बाद काम मिलने की गारंटी नहीं होती.

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ऐन इनसिग्निफिकेंट मैन: आम आदमी से दिल्ली के मुख्यमंत्री तक का सफ़र

वीडियो: आम आदमी पार्टी के विकास पर आधारित ऐन इनसिग्निफिकेंट मैन फिल्म की निर्देशक जोड़ी खुशबू रांका और विनय शुक्ला से अजय आशीर्वाद की बातचीत.

An Insignificant Man (1)

‘ऐन इनसिग्निफिकेंट मैन’ फिल्म नहीं, वक़्त के लम्हे में जमा सफ़र है

इस फिल्म के दो नायक हैं, अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव. दोनों एक-दूसरे से उतने ही अलग हैं जैसे कि भाप और बर्फ.

Allahabad University (2)

‘वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा से आने वाले भूल गए हैं कि मेहमानों का स्वागत कैसे करना चाहिए’

कैंपस की कहानियां: इस विशेष सीरीज़ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र अंकित पाठक अपना अनुभव साझा कर रहे हैं.

Arvind-Kejriwal-Yogendra-Yadav-PTI (2)

‘अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव हमारी वर्तमान राजनीति की दो ज़रूरतें हैं’

निर्देशक खुशबू रांका और विनय शुक्ला ने कहा, फिल्म ऐन इनसिग्निफिकेंट मैन भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से लेकर अरविंद केजरीवाल के एक राजनेता के तौर पर उभरने की कहानी है.

Kundan Shah UrbanAsian 1

‘जाने भी दो यारों’, ‘नुक्कड़’ और ‘वागले की दुनिया’ के निर्देशक कुंदन शाह का निधन

साल 2015 में बढ़ती असहिष्णुता और एफटीआईआई अध्यक्ष के रूप में गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के विरोध में राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने वाले 24 निर्देशकों में से कुंदन शाह भी एक थे.

Hrishikesh Mukherji

हृषिकेश मुखर्जी: जिसने सिनेमा के साथ दर्शकों की भी नब्ज़ पढ़ ली थी

हृषिकेश सिनेमा के रास्ते पर आम परिवारों की कहानी की उंगली थामे निकले थे. ये समझाने कि हंसी या आंसुओं को अमीर-गरीब के खांचे में नहीं बांटा जा सकता.