हिंदुत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह (फोटो: रॉयटर्स)

देश में राजनीति के नई करवट लेने के संकेत मिल रहे हैं

सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और व्यापक स्तर पर संविधान की बुनियाद पर हमले को लेकर बनी समझ भारतीय राजनीति को एक महत्वपूर्ण बिंदु पर ले आए हैं. इस पृष्ठभूमि में क्षेत्रीय और उप-राष्ट्रीय अस्मिताओं की बढ़ती मुखरता नई राजनीति के लिए एक मज़बूत ज़मीन तैयार कर रही है. तमाम संसाधनों और हिंदू वोट बैंक के बावजूद मोदी और शाह इसे हल्के में नहीं ले सकते.

UNITED NATION : Imran Khan, Prime Minister of Pakistan, speaks to reporters during a news conference at United Nations headquarters Tuesday, Sept. 24, 2019. AP/PTI(AP9_25_2019_000010B)

नागरिकता विधेयक फासीवादी मोदी सरकार द्वारा प्रचारित संघ की ‘हिंदू राष्ट्र’ योजना का हिस्सा: इमरान ख़ान

भारतीय लोकसभा में पारित किए गए नागरिकता संशोधन विधेयक पर पाकिस्तान ने कहा है कि इसके पीछे बहुसंख्यक एजेंडा है. इस विधेयक ने आरएसएस-भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता को दुनिया के सामने ला दिया है.

Ayodhya: FILE - In this Oct. 29, 1990, file photo, Indian security officer guards the Babri Mosque in Ayodhya, closing off the disputed site claimed by Muslims and Hindus. India’s top court is expected to pronounce its verdict on Saturday, Nov. 9, 2019, in the decades-old land title dispute between Muslims and Hindus over plans to build a Hindu temple on a site in northern India. In 1992, Hindu hard-liners demolished a 16th century mosque in Ayodhya, sparking deadly religious riots in which about 2,000 people, most of them Muslims, were killed across India. AP/PTI(AP11_9_2019_000012B)

अयोध्या: आस्था का एक प्रतीक गिराकर उस पर दूसरा प्रतीक खड़ा करना शांति का रास्ता नहीं है

एक धर्म की आस्था की निशानी को जमींदोज़ कर उस पर दूसरे धर्म के आस्था का प्रतीक स्थापित करने से स्थायी शांति आएगी, ऐसा भ्रम पालना हानिकारक साबित होगा.

Ayodhya: Sadhus read newspaper fronted with headlines on Ayodhya case verdict, in Ayodhya, Sunday, Nov. 10, 2019. The Supreme Court in a historic verdict on Saturday, Nov. 9, 2019, backed the construction of a Ram temple by a trust at the disputed site in Ayodhya and ruled that an alternative five-acre plot must be found for a mosque in the Hindu holy town.  (PTI Photo/Nand Kumar)
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अयोध्या: यह किसी अध्याय का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है

अयोध्या के फैसले के बाद ‘शांति’ और मामले के आखिरकार ‘ख़त्म’ होने की बातों के बीच उन हज़ारों लोगों को भुला दिया गया है, जिनकी ज़िंदगी बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद बर्बाद हो गई.

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अयोध्या के फ़ैसले पर दोबारा विचार करे अदालत

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित ज़मीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा ख़ारिज करते हुए हिंदू पक्ष को ज़मीन देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से हिंदुस्तान की राजनीति और समाज में क्या बदलाव आएगा, इस पर चर्चा कर रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद.

Ayodhya: FILE - In this Oct. 29, 1990, file photo, Indian security officer guards the Babri Mosque in Ayodhya, closing off the disputed site claimed by Muslims and Hindus. India’s top court is expected to pronounce its verdict on Saturday, Nov. 9, 2019, in the decades-old land title dispute between Muslims and Hindus over plans to build a Hindu temple on a site in northern India. In 1992, Hindu hard-liners demolished a 16th century mosque in Ayodhya, sparking deadly religious riots in which about 2,000 people, most of them Muslims, were killed across India. AP/PTI(AP11_9_2019_000012B)

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला विचित्र तर्क पर आधारित है

यह सोचना मूर्खतापूर्ण है कि अयोध्या पर आया फ़ैसला सांप्रदायिक सद्भाव लाएगा. 1938 के म्यूनिख समझौते की तरह तुष्टीकरण सिर्फ आक्रांताओं की भूख को और बढ़ाने का काम करता है.

फाइल फोटो: संदीप शंकर

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के भारत के भविष्य के लिए क्या मायने हैं?

शनिवार को शीर्ष अदालत ने उन लोगों के पक्ष में फ़ैसला दिया, जो सीधे तौर पर बाबरी मस्जिद गिराने के मुख्य आरोपियों से जुड़े हुए हैं. और यह देश के लिए ठीक नहीं है.

Narendra Modi Savarkar Facebook

सावरकर को भारत रत्न देना आज़ादी के नायकों का अपमान है

क्या ऐसा शख़्स, जिसने अंग्रेज़ सरकार के पास माफ़ीनामे भेजे, जिन्ना से पहले धर्म के आधार पर राष्ट्र बांटने की बात कही, भारत छोड़ो आंदोलन के समय ब्रिटिश सेना में हिंदू युवाओं की भर्ती का अभियान चलाया, भारतीयों के दमन में अंग्रेज़ों का साथ दिया और देश की आज़ादी के अगुआ महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश का सूत्रसंचालन किया, वह किसी भी मायने में भारत रत्न का हक़दार होना चाहिए?

नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों की काट के लिए गुजरात के ‘खाम’ को दोहराना होगा

गुजरात का विकास मॉडल एक भ्रम था. गुजरात दंगों के बाद मुस्लिम को अलग-थलग करने का जो प्रयोग शुरू हुआ, मोदी-शाह उसी के सहारे केंद्र में सत्ता में आए. आज यही गुजरात मॉडल सारे देश में अपनाया जा रहा है. 370 का मुद्दा उसी प्रयोग की अगली कड़ी है, जिसे मोदी शाह महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में भुनाने जा रहे हैं.

Nagpur: RSS Chief Mohan Bhagwat addresses after a book release during an event organised by Shree Narkesari Prakashan, in Nagpur, Monday, Oct 15, 2018. (PTI Photo) (PTI10_15_2018_000166B)

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का दावा- भारत एक हिंदू राष्ट्र और यह नहीं बदल सकता

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दावा किया कि संगठन में एक ही विचारधारा सतत रूप से चलती चली आई है कि जो भारत भूमि की भक्ति’ करता है, वही हिंदु है.

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती. (फोटो: पीटीआई)

सांसों की तरह अर्थव्यवस्था भी ऊपर-नीचे होती रहती हैः उमा भारती

देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने कहा कि जहां तक मंदी के दौर की बात है, ये सांसों के आरोह और अवरोह की तरह होता है. सांस नीचे-ऊपर होती है लेकिन शरीर पूरा चल रहा होता है.

Hyderabad: Congress MP Shashi Tharoor addresses a press conference at Gandhi Bhawan, in Hyderabad, Tuesday, Oct 2, 2018. (PTI Photo) (PTI10_2_2018_000215B)

कांग्रेस का कर्तव्य धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना है, सॉफ्ट हिंदुत्व से नहीं टलेगा संकट: थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि भाजपा की सफलता से भयभीत होने के बजाय कांग्रेस के लिए बेहतर होगा कि वह उन सिद्धांतों के लिए खड़ी हो, जिन पर उसने हमेशा ही विश्वास किया है.

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

असहिष्णुता और हिंसा की घटनाओं से राजनीतिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में असिहष्णुता, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, कुछ समूहों द्वारा पैदा की गई घृणा तथा भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने से जुड़ी हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

Srinagar Police Reuters

कश्मीर के भूगोल पर तो कब्ज़ा किया जा सकता है, पर कश्मीरियत का क्या होगा?

असुरक्षा का भाव समाज के सैन्यकरण की स्वीकृति का अनिवार्य तत्व होता है. सांप्रदायिक राजनीति उसके भीतर भी असुरक्षा बोध खड़ा करती है जिसके पक्ष में वह दिखना चाहती है और उसके भीतर भी, जिसे वह शत्रु के रूप में चित्रित करती है. कश्मीर में असुरक्षा की भावना का इस्तेमाल कश्मीरी हिंदुओं और कश्मीरी मुसलमानों दोनों के ख़िलाफ़ होता आ रहा है.

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अगर यह हिंदू राष्ट्र नहीं है तो और क्या है?

उदारवादी बौद्धिक जमात के लिए भारत भले ही अब तक हिंदू राष्ट्र न बना हो, लेकिन गलियों में घूमनेवाले हिंदुत्ववादियों के लिए यह एक हिंदू राष्ट्र है. इसके लक्षण भले छिपे हुए हों, लेकिन इसके समर्थक और पीड़ित, दोनों ही बहुत ही स्पष्ट तरीके से इसका अनुभव कर सकते हैं.

कांवड़िये का पैर दबाते शामली एसपी अजय कुमार. (फोटो: वीडियो ग्रैब)

उत्तर प्रदेश: वीडियो में कांवड़िये के पैर दबाते नज़र आए शामली के एसपी

शामली पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि सुरक्षा के साथ-साथ सेवा भी.

Home minister Amit Shah outside parliament. Image: PTI

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले को लेकर किए अमित शाह के दावों में कितनी सच्चाई है?

गृहमंत्री अमित शाह का दावा है कि पिछली सरकार ने हिंदू धर्म को आतंकवाद से जोड़ने के लिए असली दोषियों को छोड़ दिया था, यदि ऐसा है तो एनआईए उन्हें पकड़ने की दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है?

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हिंदुत्व भारत में धर्म और इस्लाम के एक-दूसरे पर पड़े प्रभाव की अनदेखी करता है

ऐतिहासिक नज़रिये से देखें, तो इस्लाम और हिंदू धर्म का आमना-सामना दोनों के लिए फायदेमंद ही रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

न सॉफ्ट हिंदुत्व और न ही सॉफ्ट सेकुलरिज़्म कांग्रेस को उबार सकते हैं

आज कांग्रेस के सामने चुनौती पार्टी का कायाकल्प ऐसे दल के तौर पर करने की है, जो अपने पुराने वैभव और साम्राज्य के बिखर जाने की टीस से बाहर निकलकर यह कबूल करे कि अब उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है और बचाव की मुद्रा से बाहर निकलकर आक्रामक अंदाज़ में खेलना शुरू करे.

Varanasi: BJP workers celebrate party's lead in the Lok Sabha elections 2019, in Varanasi, Thursday, May 23, 2019. (PTI Photo) (PTI5_23_2019_000087B)

विपक्ष को विनम्रता से स्वीकारना चाहिए कि वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर विकल्प देने में असमर्थ रहे हैं

लोकसभा चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि तात्कालिक आर्थिक स्थितियां परिणामों को निर्धारित करनेवाला एकमात्र कारक नहीं होतीं, लोग अपने निर्णय उपलब्ध विकल्पों के आधार पर तय करते हैं.

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क्या हिंदुत्ववादियों का भारतीय मुसलमानों को लेकर फैलाया गया झूठ हक़ीक़त में बदल सकता है

2014 के बाद से बिना किसी प्रमाण के देश के मुसलमानों को हिंदू-विरोधी और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी बताया जा रहा है. लेकिन डर है कि अगले पांच सालों में उनमें से कुछ ऐसे चुनाव कर सकते हैं, जो उनके समुदाय के बारे में गढ़े गए झूठ को वास्तविकता में बदल देंगे.

BJP President Amit Shah and Indian Prime Minister Narendra Modi react after the election results in New Delhi, India, May 23, 2019. REUTERS/Adnan Abidi.

क्या 2019 की नरेंद्र मोदी सरकार 2014 की सरकार से अलग होगी?

क्या नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार जल्द ही उन्हें हासिल जनादेश की ग़लत व्याख्या करने और उसको अपनी सारी कारस्तानियों पर जनता की मुहर मान लेने की ग़लती करने लगेगी?

(फोटो: पीटीआई)

जय श्रीराम का नारा राम की महिमा का उद्घोष नहीं, दबंगई का ऐलान है

लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि उनका राम अभियान धार्मिक नहीं था. वह राम के नाम की आड़ में एक मुसलमान घृणा से युक्त राजनीतिक हिंदू के निर्माण का अभियान था. जय श्रीराम इसी गिरोह का एक राजनीतिक नारा है. इस नारे का राम से और राम के प्रति श्रद्धा से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं. आप जब जय श्रीराम सुनें तो मान लें कि आपको जय आरएसएस कहने की और सुनने की आदत डाली जा रही है.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर और दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

प्रज्ञा ठाकुर के माध्यम से भाजपा किसकी आकांक्षा का प्रतिनिधित्व कर रही है

क्या वाकई देश का हिंदू अब इस अवस्था को प्राप्त कर चुका है जहां उसके इंसानी और नागरिक बोध का प्रतिनिधित्व प्रज्ञा ठाकुर जैसों के रूप में होगा?

India's Prime Minister Narendra Modi reacts as he speaks to members of the Australian-Indian community during a reception at the Allphones Arena located at Sydney Olympic Park in western Sydney in this November 17, 2014 file photograph. Since Modi came to power in May, ties between Israel and India have been in overdrive, with the two signing a series of defence and technology deals that have underscored their burgeoning commercial and political relationship. To match INDIA-ISRAEL/TIES REUTERS/Rick Stevens/Files (AUSTRALIA - Tags: POLITICS BUSINESS)

वन-मैन शो वाली सरकार चलाने वाले मोदी के लिए मुश्किल होगी गठबंधन की राह

अगर भाजपा पिछली बार जीती गई 282 सीटों से कम सीटें पाती है, तो पार्टी को सहयोगियों की ज़रूरत होगी. समीकरण जैसे भी बनें, यह निश्चित है कि अगली सरकार गठबंधन की या खिचड़ी सरकार होगी, जिसे मोदी बिल्कुल पसंद नहीं करते.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

इस चुनाव में मुसलमानों के लिए क्या है?

आज भारतीय राजनीति एक ऐसे दौर में है जब कोई भी राजनीतिक पार्टी मुस्लिम समुदाय की बात नहीं करना चाहती. वे राजनीतिक रूप से अछूत बना दिए गए हैं. अब उनका इस्तेमाल बहुसंख्यक आबादी को वोट बैंक में तब्दील करने के लिए किया जा रहा है.

रामदास अठावले. (फोटो साभार: ट्विटर)

मालेगांव धमाके में एटीएस के पास प्रज्ञा के ख़िलाफ़ सबूत थे, टिकट दिया जाना गलत: रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि लोगों को बचाने के लिए आतंकियों से लड़ते हुए करकरे शहीद हो गए थे. मैं करकरे को लेकर साध्वी के बयान से सहमत नहीं हूं. हम इसकी आलोचना करते हैं. यह फैसला करना अदालत का काम है कि क्या सही है और क्या गलत. अगर हमारी पार्टी की बात होती तो हम उन्हें नहीं खड़ा करते.

Congress President Rahul Gandhi with senior party leaders Sonia Gandhi and Manmohan Singh release party's manifesto for Lok Sabha polls 2019 in New Delhi on 2 April 2019. (Photo | PTI)

कांग्रेस का घोषणा-पत्र: चाय पर चर्चा से भली आय पर चर्चा

कांग्रेस का घोषणा-पत्र कम से कम इस अर्थ में बहुत सार्थक है कि तात्कालिक रूप से ही सही, देश के राजनीतिक विमर्श की दशा व दिशा बदलने के संकेत मिल रहे हैं.

Ayodhya: Congress General Secretary and Uttar Pradesh - East incharge Priyanka Gandhi Vadra greets her supporters during a roadshow on the last day of her 3-day campaign ahead of Lok Sabha elections, in Ayodhya, Friday, March 29, 2019. (PTI Photo/Nand Kumar) (PTI3_29_2019_000138B)

प्रियंका गांधी के अयोध्या जाने से भाजपा क्यों बौखलाई हुई है

बीते दिनों अयोध्या स्थित हुनमानगढ़ी मंदिर में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के जाने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कई नेताओं ने सवाल उठाया है.

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उर्दू वाला चश्मा: भारत की आत्मा को बचाने की लड़ाई

उर्दू वाला चश्मा की इस कड़ी में नूपुर शर्मा ज़िया उस सलाम की किताब के ज़रिए बहुसंख्यक (हिंदुत्व) की भीड़ द्वारा मुस्लिमों की पीट-पीटकर हो रही हत्या की घटनाओं पर चर्चा कर रही हैं.

साहित्यकार नयनतारा सहगल (फाइल फोटो: Wikimedia Commons)

हमें आज़ादी और फासीवाद के बीच चुनाव करने की जरूरत है: नयनतारा सहगल

लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा कि आज हम एक ऐसी स्थिति में हैं जो कि संवैधानिक तौर पर एक लोकतंत्र है लेकिन उसमें तानाशाही के सभी गुण मौजूद हैं.

Narendra Modi Reuters featured

आम चुनावों में पहली बार कश्मीर मुद्दे का पूरी तरह राजनीतिकरण होगा

पुलवामा हमले के बाद हालात ऐसे हैं कि भाजपा इसका राजनीतिक लाभ लेने के लोभ से बच ही नहीं सकती. नरेंद्र मोदी के लिए इससे बेहतर और क्या होगा कि नौकरियों की कमी और कृषि संकट से ध्यान हटाकर चुनावी बहस इस बात पर ले आएं कि देश की रक्षा के लिए सर्वाधिक योग्य कौन है?

कांग्रेस नेता हरीश रावत. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस सत्ता में आएगी तभी राम मंदिर बनेगा: हरीश रावत

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि भाजपा बेईमान लोगों की पार्टी है जिन्हें न तो नीतियों की परवाह है और न ही मर्यादा की, वे मर्यादा पुरुषोत्तम राम के भक्त कैसे हो सकते हैं.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi being felicitated by Bharatiya Janata Party leaders L K Advani, Party President Amit Shah, Rajnath Singh and Sushma Swaraj during BJP Parliamentary Party meeting, in New Delhi on Tuesday, July 31, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI7_31_2018_000025B)

2019 का चुनाव सिर्फ कांग्रेस ही नहीं संघ और भाजपा के बचे-खुचे नेताओं का भी अस्तित्व तय करेगा

संघ के लिए केंद्र में सत्ता मंज़िल की सीढ़ी है, अपने आप में मंज़िल नहीं. उसने भाजपा को दो से अस्सी सीट पर पहुंचाने वाले, राम मंदिर मुद्दे के पुरोधा लालकृष्ण आडवाणी को किनारे कर मोदी के लिए हामी भरने में कोई देरी नहीं की. वो कभी ऐसे किसी भी नेता को मंज़ूर नहीं करेगा जो उसकी विचारधारा और ताक़त से ज़्यादा कद्दावर दिखने लगे.

साहित्यकार नयनतारा सहगल (फाइल फोटो: Wikimedia Commons)

मराठी साहित्य सभा: आयोजकों ने साहित्यकार नयनतारा सहगल को कार्यक्रम में आने से मना किया

यवतमाल में 11 जनवरी से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन अंग्रेज़ी की प्रख्यात लेखिका नयनतारा सहगल को करना था. रविवार को आयोजकों ने ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देते हुए उनका आमंत्रण वापस ले लिया.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

सप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाली

अगला आदेश तीन जजों की एक उपयुक्त पीठ द्वारा पारित किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की समयबद्ध सुनवाई की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी.