हिंदुस्तान

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हिंदी साहित्य ने विभाजन को कैसे देखा

आज़ादी के 71 साल: जहां हिंदी लेखकों ने विभाजन पर बार-बार लिखा, हिंदी कवि इस पर तटस्थ बने रहे. कईयों ने आज़ादी मिलने के जश्न की कवितायें तो लिखीं, लेकिन देश बंटने के पीड़ादायी अनुभव पर उनकी चुप्पी बनी रही.

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय: जो धार्मिक पाठ ही नहीं है, उसको लेकर हंगामा है क्यों बरपा…

एएमयू को एक लड़की की गुस्ताख़ी पसंद नहीं आई, इसलिए एक ऐसा नारा जो इस्लामिक भी नहीं है उस पर हायतौबा मची है. ये देखना भी कम दिलचस्प नहीं है कि यूनिवर्सिटी किसी ज़िम्मेदार शैक्षणिक संस्थान की तरह व्यवहार करने की बजाय फ़तवे की किताब खोलकर बैठ गई है.

भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य. फोटो साभार: फेसबुक

महिलाएं बांझ रहें लेकिन ऐसे बच्चे न पैदा करें जिसमें संस्कार न हो: भाजपा विधायक

भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ महिलाएं इस तरह के नेताओं को जन्म देती हैं जो समाज में विकृति पैदा करते हैं.

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‘हुक्मरां हो गए कमीने लोग, ख़ाक में मिल गए नगीने लोग’

जनता के अधिकारों के लिए सत्ता से लोहा लेने वाले हबीब जालिब ने गांव-देहात को अपने पांव से बांध लिया था और उसी पांव के ज़ख़्म पर खड़े होकर सत्ता को आईना दिखाते रहे.

फोटो: ट्विटर/अनुष्का

विराट कोहली ने भारत में पैसा कमाया, शादी इटली में की, वे राष्ट्रभक्त नहीं हैं: भाजपा विधायक

विराट और अनुष्का के इटली में शादी करने पर भाजपा विधायक ने उठाया सवाल, बोले- भारत की भूमि का विराट के लिए कोई मान नहीं है.

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सरदार पटेल ने ‘हिंदू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था

मोदी अगर सरदार पटेल को अपना नेता मानते हैं तो फिर उन्हें पटेल की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता पर अमल करते हुए हिंदू राष्ट्र के लिए हथियार उठाने का आह्वान करने वाले सिरफिरे पर कार्रवाई करनी चाहिए.

मौलाना अरशद मदनी. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा और संघ नफ़रत की सियासत छोड़ें तो हम साथ देने को तैयार: जमीयत

मौलाना अरशद मदनी ने कहा, मुल्क की ख़राब सूरत-ए-हाल से निपटना हर हिंदुस्तानी का फ़र्ज़ है. अगर मुल्क़ में ख़ुदा ना ख़ास्ता बरबादी आई तो वह हिंदू या मुसलमान नहीं देखेगी.

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अयोध्या का फ़ैसला हिंदुओं के पक्ष में होगा, अगर नहीं होगा तो करवाया जाएगा: भाजपा नेता

मध्य प्रदेश के मंत्री ने कहा, अयोध्या जैसा आंदोलन दो बार और करना है. अभी तो अयोध्या मंदिर का हुआ. मथुरा एवं काशी के मंदिरों के लिए बाक़ी है.

(फोटो साभार: फ़ेसबुक)

मैंने आज़ादी के बाद जैसा हिंदुस्तान देखा था, उसी हिंदुस्तान में मरना चाहता हूं: मुनव्वर राना

जन्मदिन विशेष: इस सियासी उथल-पुथल में एक बुजुर्ग की हैसियत से मुझे ख़ौफ़ लगता है कि कहीं हिंदुस्तान में ज़बान, तहज़ीब और मज़हब के आधार पर कई हिंदुस्तान बन जाएं. यह बहुत अफ़सोसनाक होगा.

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‘एक फिल्म ने ऐसे बादशाह की छवि बिगाड़ दी जिसने मंगोलों से हिंदुस्तान की हिफ़ाज़त की थी’

‘इतिहास के ज्ञान के नाम पर जहालत इतनी है कि फिल्मों को ही इतिहास मान लिया जाता है. हमें यह समझना होगा कि फिल्म इतिहास नहीं है.’

(फोटो साभार:पत्रिका)

यूपी निकाय चुनाव: भाजपा नेता की मुस्लिमों को चेतावनी, भाजपा को वोट दें नहीं तो होगी परेशानी

बाराबंकी के इस भाजपा नेता के भाषण के समय योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान और रामापति शास्‍त्री भी मंच पर मौजूद थे.

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‘साहिर की शख़्सियत और उनकी शायरी एक-दूसरे में हूबहू उतर गए थे’

पुण्यतिथि विशेष: यह भी एक क़िस्म की विडंबना ही है कि जिस साहिर के कलाम गुनगुनाकर अनगिनत इश्क़ परवान चढ़े, उसकी अपनी ज़िंदगी में कोई इश्क़ मुकम्मल न हुआ.

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‘हिंदुस्तान की सरज़मीं बहुत देर तक नफ़रत बर्दाश्त नहीं कर सकती’

मशहूर शायर और यूपी विधान परिषद सदस्य वसीम बरेलवी ने कहा, हमारी विचारधारा एक है. इतनी भाषाओं, मज़हब, अलग-अलग संस्कृति के बावजूद हम एक थे, एक हैं और हमेशा एक रहेंगे.

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बटुकेश्वर दत्त: जिन्हें इस मृत्युपूजक देश ने भुला दिया क्योंकि वे आज़ादी के बाद भी ज़िंदा रहे

बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारी को आज़ादी के बाद ज़िंदगी की गाड़ी खींचने के लिए कभी एक सिगरेट कंपनी का एजेंट बनकर भटकना पड़ता है तो कभी डबलरोटी बनाने का काम करना पड़ता है.

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हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच 1947 में हुआ बंटवारा आज भी जारी है

निदा किरमानी मूल रूप से हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों से हैं. वे सोचती थीं कि क्यों कभी उन्हें इनमें से किसी एक को चुनना होगा? पर बीते दिनों उन्हें एक देश चुनने पर मजबूर होना पड़ा.

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विभाजन से जुड़ी फिल्मों से पाकिस्तान डरता क्यों है?

पाकिस्तान से विशेष: अगर बेग़म जान या पाकिस्तान के बाहर विभाजन पर बनी कोई फिल्म सरकार को इतना डरा देती है कि उसे बैन करने से पहले देखना तक ज़रूरी नहीं समझा जाता, तो यह दिखाता है कि ये मुल्क किस कदर असुरक्षा और डर में जी रहा है.