हिंसा

Mahagun Demolition

‘महागुन सोसाइटी विवाद में हम शामिल नहीं थे फिर भी हमारी दुकानें तोड़ दी गईं’

नोएडा के सेक्टर 78 में महागुन सोसाइटी के सामने बनीं दुकानें और झोपड़ियां तोड़ दी गईं, जिसके बाद प्रभावित लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

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संघ किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करता: मनमोहन वैद्य

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा को संघ से जोड़ने के बजाए उस पर कार्रवाई किए जाने की बात कही है.

New Delhi : A view of Parliament House in New Delhi on Wednesday. PTI Photo by Atul Yadav (PTI12_19_2012_000056A)

गोरक्षा के नाम पर हत्याओं में संघ परिवार के लोग शामिल हैं: विपक्ष

गोरक्षा के नाम पर पीट-पीटकर कर हो रही हत्याओं के मुद्दे पर संसद में घिरी सरकार, विपक्ष ने किया ज़बरदस्त हमला, सरकार बोली- सहिष्णुता इस देश का डीएनए है.

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गोशालाओं में गायों की रोज़ाना मौत और गोभक्ति का पाखंड

भाजपा शासित राज्यों में गोशालाओं में बदइंतज़ामी के चलते लगातार गायों की मौत हो रही है, लेकिन वे गाय के प्रति अपना ‘प्रेम’ उजागर करने में नित नये क़दम बढ़ाते रहते हैं.

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महागुन सोसाइटी मामले को कैसे देखा जाना चाहिए?

महागुन सोसाइटी में हुई मज़दूर वर्ग की हिंसा तो नज़र आती है मगर इस सोसाइटी में रहने वाले संपन्न तबके द्वारा इन मज़दूरों पर की जा रही हिंसा किसी को दिखाई नहीं पड़ती.

New Delhi: NDA's presidential candidate  Ram Nath Kovind along with Prime Minister Narendra Modi and BJP chief Amit Shah, at NDA meeting in New Delhi on Sunday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI7_16_2017_000187B)

गोरक्षा के नाम पर क़ानून तोड़ने वालों पर सख़्त कार्रवाई करें राज्य: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने कहा, गोरक्षा को कुछ असामाजिक तत्वों ने अराजकता फैलाने का माध्यम बना लिया है. देश की छवि पर भी इसका असर पड़ रहा है.

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ममता बनर्जी से पूछा जाना चाहिए कि सांप्रदायिकता से निपटने का आपका बेंचमार्क क्या है?

ममता न तो अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोपों-अफवाहों पर लगाम कस पा रही हैं और न ही बहुसंख्यक उग्रता पर. आखिर सांप्रदायिकता को रोकने में बहुसंख्यक वोटों की सरकारों की तरह अल्पसंख्यक वोटों की सरकारें भी क्यों लाचार नज़र आती हैं?

Baduria: A burnt vehicle seen at a road after a communal riot  at Baduria in North 24 Pargana district of West Bengal on Wednesday. PTI Photo  (PTI7_5_2017_000228B)

अगर ये भीड़ दादरी में ही दफ़न कर दी जाती तो इसकी आंच बंगाल तक कभी नहीं आती

जिस पैगम्बर के व्यवहार ने उनपर रोज़ कूड़ा फेंकने वाली औरत को बदलने पर मजबूर कर दिया, उन्हीं के कुछ अनुयायी एक फेसबुक पोस्ट मात्र पर हिंसक हो जाते हैं.

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गांव वही था, लोग भी वही थे, मगर ईद वह नहीं थी

अपने हिंदू दोस्तों को ईद की दावत दी. सबने चिकन-मटन खाने से मना कर दिया. ये वही दोस्त थे जो इसके पहले सिर्फ़ इस शर्त पर आते थे कि चिकन-मटन खाने को मिलेगा.

Mahatma Gandhi/The Wire Hindi

मैं गाय को पूजता हूं लेकिन उसे बचाने के लिए मुसलमान को नहीं मारूंगा: गांधी

गांधी का कहना था, जब हमने ज़िद की तो गोकशी बढ़ी. गोरक्षा प्रचारिणी सभा का होना हमारे लिए बदनामी की बात है. जब गाय की रक्षा करना हम भूल गए तब ऐसी सभा की जरूरत पड़ी.

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आपातकाल के 42 सालों के बाद एक बार फिर भारत का लोकतंत्र ख़तरे में है

‘एक ऐसी सरकार जो ‘सबका विकास’ के वादे पर सत्ता में आई थी, अब समाज के सबसे कमज़ोर लोगों को सुरक्षा देने को लेकर अनिच्छुक नज़र आ रही है.’

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हमारे समाज को आजकल इतना गुस्सा क्यों आ रहा है?

तकनीक के अधकचरे इस्तेमाल ने दरअसल एक अधकचरी पढ़ी-लिखी हिंसा को भी जन्म दिया है. इस हिंसा का शिकार हर वैसा वर्ग और व्यक्ति हो रहा है, जो एक मदमाती सत्ता से सवाल पूछता है.

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ईद: देश के कई हिस्से में काली पट्टी बांधकर मनाया त्योहार, कश्मीर में हिंसक झड़प

हरियाणा के खंदावली गांव के किशोर जुनैद की ईद के दो दिन पहले चलती ट्रेन में पीटकर हत्या कर दी गई थी, जिसके विरोध में गांव वालों ने ईद नहीं मनाई.

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योगी सरकार दलितों के लिए बहुत बुरी साबित होने वाली है: चंद्रशेखर आज़ाद

चंद्रशेखर ने कहा, ‘पुलिस ने भीम आर्मी पर नक्सली होने, नक्सलियों से धन लेने, आतंकवादियों से संबंध होने का आरोप लगाया. मैं कहता हूं कि अगर ऐसा है तो वे सबूत दें’

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संघ के वरिष्ठ नेता ने कहा, जो लोग गोमांस खाते हैं उनका कोई मानवाधिकार नहीं होता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने जयपुर में आयोजित संघ के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में गाय, गोमांस और अन्य मुद्दों पर बयान दिए.

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क्या मोदी सरकार में एक मुसलमान के सामने ज़िंदा बचे रहना ही सबसे बड़ी चुनौती है?

नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले तीन साल के राज में ऐसा बहुत कुछ हुआ जिसने मुसलमानों में असुरक्षा और भय की तीव्र भावना पैदा करने का काम किया.

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लोग गाय माता की सेवा करते-करते ख़ुद भेड़िये बन गए हैं

वह कैसी सोच है जिसे पूरी दुनिया में केवल एक गाय ही रक्षा करने योग्य लगती है. सड़क के किनारे सोया थका-हारा मज़दूर नहीं, पुल के नीचे मिट्टी में पलते दुर्बल बच्चे नहीं, अस्पतालों के बाहर बैठे रोगी नहीं.

फाइल फोटो पीटीआई

क्या भाजपा को वाक़ई मुसलमानों की चिंता हैं?

मुसलमानों के एक तबके में भाजपा को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है, लेकिन भाजपा की तरफ़ से ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला है कि मुसलमानों के लिए कुछ किया हो.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 50: कुलभूषण जाधव और उमर फ़याज़ की हत्या

जन गण मन की बात की 50वीं कड़ी में विनोद दुआ कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फ़ैसले और कश्मीर में हुई लेफ़्टिनेंट उमर फ़याज़ की हत्या पर चर्चा कर रहे हैं.

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सभ्य समाज में मूल अधिकारों के लिए बंदूकों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए: गांधी

इतिहासकार सुधीर चंद्र ने अपनी किताब ‘गांधी: एक असंभव संभावना ‘में गांधी के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला है.

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पैलेट गन की जगह अन्य विकल्पोंं पर विचार करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह जम्मू कश्मीर में पथराव करने वाली भीड़ से निपटने के लिए पैलेट गनों की बजाय अन्य प्रभावी तरीकों का प्रयोग करे क्योंंकि यह ज़िंदगी और मौत का मामला है.

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‘भाजपा की जीत राष्ट्रवाद और मुस्लिम घृणा के पैरोकारों में नया जोश पैदा करेगी’

हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा ऐसे माहौल में समाज में सांप्रदायिक भय खड़ा करता है. हिंसा का भय 1984 के चुनाव में राजीव गांधी के रणनीतिकारों ने भी खड़ा किया था. तब राजीव गांधी ने भी जीत का कीर्तिमान बनाया था. यह कीर्तिमान अब मोदी-शाह ने बनाया है.