Abrogation of Article 370

नेशनल कॉन्फेंस अध्यक्ष फ़ारूक अब्दुल्ला. फोटो: पीटीआई

अनुच्छेद 370 की लड़ाई में पाक के समर्थन पर बोले फ़ारूक़ अब्दुल्ला: किसी के हाथों की कठपुतली नहीं

नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस तथा तीन अन्य दलों ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए मिलकर लड़ने का ऐलान करते हुए एक घोषणापत्र जारी किया था. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के इसे समर्थन देने की बात पर पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने यह टिप्पणी की है.

Srinagar: Policemen patrolling at Lal Chowk after restrictions were lifted, in Srinagar, Tuesday, Aug. 20, 2019. Barricades around the Clock Tower in Srinagar's city centre Lal Chowk were removed after 15 days, allowing the movement of people and traffic in the commercial hub, as restrictions eased in several localities while continuing in others. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI8_20_2019_000114B)

केंद्र द्वारा जम्मू कश्मीर के लिए नए नियम जारी, एंटी करप्शन ब्यूरो-पुलिस सीएम के दायरे से बाहर

केंद्र सरकार द्वारा जारी नए नियमों के ज़रिये केंद्रशासित जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र से कई विभाग वापस ले लिए गए हैं और इसके चलते महत्वपूर्ण मामलों में उप-राज्यपाल के ज़रिये केंद्र अप्रत्यक्ष रूप से अंतिम निर्णायक विभाग होगा.

नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस सहित जम्मू कश्मीर की मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की बैठक में शामिल नेता. (फोटो साभार: ट्विटर/@JKNC_)

जम्मू कश्मीर: मुख्यधारा के सभी दलों ने अनुच्छेद 370 के लिए लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई

जम्मू कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली, जम्मू कश्मीर के संविधान और राज्य की बहाली के लिए प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और राज्य का कोई भी विभाजन उनके लिए अस्वीकार्य है.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर: फारूक अब्दुल्ला ने की कश्मीरी पंडितों के पलायन की जांच कराने की मांग

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उनका मानना है कि कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अपूर्ण है और वे उन्हें ससम्मान वापस लाने की किसी भी प्रक्रिया का समर्थन करेंगे.

Ayodhya: A hoarding of PM Narendra Modi and other leaders put up beside a statue of Lord Hanuman, ahead of the foundation laying ceremony of Ram Temple, in Ayodhya, Thursday, July 30, 2020. (PTI Photo)(PTI30-07-2020 000044B)

क्या राम मंदिर की आड़ में अपनी विफलताएं छिपा रही है मोदी सरकार

यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए चुना गया यह समय एक छोटी रेखा के बगल में बड़ी रेखा खींचने की क़वायद है, ताकि नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की बढ़ती असफलताएं जैसे- कोविड कुप्रबंधन, बदहाल होती अर्थव्यवस्था और गलवान घाटी प्रसंग- इस परदे के पीछे चले जाएं.

Srinagar: Security personnel patrols a deserted street at Lal Chowk on the 33rd day of strike and restrictions imposed after the abrogration of Article of 370 and bifurcation of state, in Srinagar, Friday, Sept. 6, 2019. (PTI Photo) (PTI9_6_2019_000065B)

उर्दू वाला चश्मा: सलाम कश्मीर

ऑडियो: जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 और 35 ए के कई प्रावधानों के ख़त्म होने और राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म कर दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के फ़ैसले को एक साल पूरा हो रहा है. इस बारे में गुरमेहर कौर का नज़रिया.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

क्या हिरासत की अवधि ख़त्म होने से पहले रिहा होंगे जम्मू कश्मीर बार अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मियां अब्दुल क़यूम बीते अगस्त से पीएसए के तहत आगरा की एक जेल में हिरासत में हैं. उनकी हिरासत बरक़रार रखने के प्रशासन के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए क़यूम ने कहा कि इस हिरासत का समर्थन करने के लिए सरकार के पास कोई सबूत नहीं हैं.

(फोटो साभार: एनसीईआरटी)

कक्षा 12 की एनसीईआरटी राजनीतिक विज्ञान की किताब में जम्मू कश्मीर संबंधी पाठ में बदलाव

एनसीईआरटी की कक्षा 12 की राजनीतिक विज्ञान की किताब में जम्मू कश्मीर की अलगाववादी राजनीति से जुड़ी जानकारियों को हटा दिया है, जबकि चुनावी राजनीति और राज्य के विशेष दर्ज़े को ख़त्म किए जाने संबंधी पाठ को शामिल कर लिया गया है.

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता पर लगा पीएसए हटाया, रिहाई का आदेश

पिछले साल अगस्त में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने के बाद प्रशासन ने राज्य के मुख्यधारा के कई नेताओं समेत राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नज़रबंद कर दिया था या फिर हिरासत में ले लिया था. इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर भी शामिल थे.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली. (फोटो: रॉयटर्स)

विवादित हिस्से को किसी भी कीमत पर हासिल करके रहेंगे: नेपाल के प्रधानमंत्री

भारत और नेपाल दोनों लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं. हाल ही में जारी नए राजनीतिक मानचित्र में नेपाल ने इन हिस्सों को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया है.

2019 में सिवि सोसायटी संगठन द्वारा लिपूलेख हिस्से के साथ जारी नेपाल का मानचित्र.

नेपाल कैबिनेट ने भारत के साथ विवादित हिस्से को नए मानचित्र में शामिल करने की मंजूरी दी

नेपाल कैबिनेट के नए राजनीतिक मानत्रिच में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

लिपूलेख दर्रे से गुजरने वाली सड़क के उद्घाटन पर नेपाल ने जताई आपत्ति, भारत ने खारिज किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया था.

भारत के नए नक्शे में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख. (फोटो: पीआईबी)

पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के मौसम का हाल बताने के भारत के कदम को पाक ने अस्वीकार किया

सरकारी प्रसारणकर्ता दूरदर्शन तथा आकाशवाणी ने शुक्रवार से अपने प्राइम टाइम समाचार बुलेटिन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मीरपुर, मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्रों के मौसम का हाल बताना शुरू कर दिया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने के पाक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विरोध दर्ज कराया

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में गिलगित-बाल्टिस्तान में आम चुनाव कराने की इजाजत दे दी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को आपत्ति पत्र जारी कर आदेश के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

एसोसिएट प्रेस के फोटो पत्रकार डार यासिन, मुख्तार खान और चन्नी आनंद. (फोटो: pulitzer.org/)

तीन भारतीय फोटो पत्रकारों को मिला पुलित्ज़र पुरस्कार

अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के लिए काम करने वाले तीनों कश्मीरी फोटो पत्रकारों- यासीन डार, मुख़्तार ख़ान और चन्नी आनंद ने 2019 में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद की स्थितियों की तस्वीरें ली थीं.