Adivasi

(सभी फोटो: अनुराग मोदी)

मध्य प्रदेश: सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ आए आदिवासी बोले, सरकार के कागज़ों के मकड़जाल में नहीं फंसेंगे

बीते दिनों मध्य प्रदेश के बैतूल में नागरिकता क़ानून और एनआरसी के विरोध में इकठ्ठा हुए आदिवासियों ने कहा कि जिस जंगल में उनके पुरखों के अंश गड़े है, वे उस जगह पर अपने हक़ का इससे बड़ा और क्या सबूत दे सकते हैं.

Khunti: Tribals hold bows and arrows near a Patthalgarhi spot at Maoist-affected village Siladon under Khunti district of Jharkhand on Tuesday. The Patthalgarhi movement says that the “gram sabha” has more weight than either the Lok Sabha or the Vidhan Sabha in scheduled areas. PTI Photo (PTI5_1_2018_000146B)

झारखंड में हुई हालिया हत्याओं को पत्थलगड़ी आंदोलन से जोड़ना कितना सही है?

बीते जनवरी में राज्य में हुई सात लोगों की हत्या को पुलिस और सीआरपीएफ ने पत्थलगड़ी से जुड़ा बताया था, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यह एक नए पंथ सती पति से जुड़े लोगों द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ न लेने, आदिवासी परंपराओं को न मानने देने, कागज़ात जमा करने के विरोध में हुए मतभेदों का नतीजा है.

(फोटो: रॉयटर्स)

मध्य प्रदेश: 24 घंटे में शहडोल ज़िला अस्पताल में छह आदिवासी बच्चों की मौत, जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के वीरसिंहपुर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र में भी सोमवार को टीकाकरण के बाद एक माह से कम उम्र के दो नवजात बच्चों की मौत हुई है. शहडोल में सभी छह बच्चों की मौत 13 और 14 जनवरी की दरमियानी रात हुई. शिशुओं की आयु एक दिन से ढाई माह के बीच थी.

Guwahati: Protestor’s burn hoardings and other materials during their march against the Citizenship (Amendment) Bill, 2019, in Guwahati, Wednesday, Dec. 11, 2019. (PTI Photo)

सीएबी, एनआरसी की खींचतान के बीच व्यवस्था से प्रताड़ित लोगों की चिंता किसे है?

राज्य सरकारों से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि लोगों को बाहर जाकर रोजी क्यों तलाशनी पड़ती है? लोग अपने परिवार के साथ अपने इलाके में गरिमामय जीवन और शांति का माहौल चाहते हैं. राज्य सरकारें उनके राज्यों में रहने-जीने की सही व्यवस्था और अपराधमुक्त माहौल क्यों नहीं मुहैया करा पातीं?

Gondi School Chhattisgarh Photo Tameshwar (3)

छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा के ज़रिये गोंडी भाषा को सहेजने का प्रयास

आदिवासी बहुल इलाकों में वृहद रूप से बोली जाने वाली गोंडी भाषा का कोई लिखित साहित्य न होने के चलते यह अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दो स्कूलों में इस भाषा में प्राथमिक शिक्षा देकर इसे सहेजने की कोशिश की जा रही है.

रांची का नदी दीप टोले में बनी बांस की पुलिया. (सभी फोटो: मो. असगर खान)

झारखंड: रांची का एक आदिवासी टोला, जहां राज्य बनने के 19 साल बाद भी ‘विकास’ नहीं पहुंचा

झारखंड राज्य के निर्माण को 19 साल हो गए हैं. रांची नगर निगम के वार्ड 50 में आने वाले नदी दीपा टोला के लोग एक अदद पुल के निर्माण के लिए पिछले कई सालों से सरकार से गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं.

नवंबर 2018 में घोषणापत्र जारी करती मध्य प्रदेश कांग्रेस. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या कांग्रेस के लिए उसका ‘वचन-पत्र’ अब गले की हड्डी बन गया है?

एक ओर कमलनाथ सरकार विधानसभा चुनावों से पहले जारी किए अपने ‘वचन-पत्र’ को ही सरकार चलाने का रोडमैप और वचनों के पूरे होने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर उन वचनों से सरोकार रखने वाले वर्ग अब सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने लगे हैं.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

देश की अखंडता ब्रह्मचर्य-सी पवित्र है, इधर-उधर सोचने भर से भंग होने का ख़तरा रहता है

मैं प्रधानमंत्री के समर्थन में पत्र लिखने वाले 62 दिग्गजों का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा. ये अगर चाहते तो देश की छवि खराब करने वाले उन 49 लोगों की लिंचिंग भी कर सकते थे. मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, बजाय इसके चिट्ठी लिखकर उन्होंने देश के बाकी लट्ठधारी राष्ट्रवादियों के सामने बहुत बड़ा आदर्श पेश किया है.

बीते 17 जुलाई को जमीन विवाद में सोनभद्र के उम्भा गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी. (फोटो साभार: वीडियोग्रैब)

कब तक भूख और गोली से मारे जाएंगे आदिवासी?

सोनभद्र में किसी ने उन आदिवासियों की भुखमरी के हालात की तह में जाने की कोशिश तक नहीं की, यह सवाल नहीं पूछा कि मौत का ख़तरा होते हुए भी वे इस अनउपजाऊ क्षेत्र में ज़मीन से क्यों चिपके हुए थे?

Dhar MP Google Map

दलित युवक से प्रेम संबंध पर आदिवासी युवती से मारपीट, सात के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

घटना मध्य प्रदेश के धार ज़िले के आदिवासी बहुल बाग थाना क्षेत्र की है, जहां 21 वर्षीय आदिवासी युवती के दलित युवक के साथ संबंध से नाराज़ परिजनों द्वारा उसे लाठियों से पीटे जाने का वीडियो सामने आया था. पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ़्तार किया है.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल थाना क्षेत्र स्थित नेशनल मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे आदिवासी. (सभी फोटो: तामेश्वर सिन्हा)

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आदिवासी क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल क्षेत्र के तहत बैलाडीला की एक पहाड़ी को बचाने के लिए तकरीबन 20 हज़ार आदिवासी पिछले चार-पांच दिनों से प्रदर्शन कर रह हैं. सरकार ने इस पहाड़ी को लौह अयस्क के खनन के लिए अडाणी समूह को दे दिया है.

जीतराई हांसदा. (फोटो साभार: ट्विटर/@JharkhandJanad1)

झारखंड: बीफ़ खाने के अधिकार पर कथित पोस्ट लिखने वाले आदिवासी प्रोफेसर गिरफ़्तार

आदिवासी प्रोफेसर जीतराई हांसदा के वकील ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ जून, 2017 में मामला दर्ज किया गया था. वकील ने आशंका जताई कि यह गिरफ़्तारी जानबूझकर चुनावों के बाद की गई है. चुनाव से पहले गिरफ़्तारी करके भाजपा आदिवासियों को नाराज़ करके चुनावों में उनका वोट गंवाना नहीं चाहती थी.

JangalMahal Education West Bengal

क्यों पश्चिम बंगाल के जंगलमहल में राष्ट्रवाद से बड़ा चुनावी मुद्दा शिक्षा है

सड़क से संसद: तमाम सरकारों का मानना है कि नक्सलियों को सेना से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के झारग्राम के जंगलमहल ने इसे गलत साबित किया है. यहां शिक्षा सभी चुनावी मुद्दों पर भारी है.

Santhali Actress Politician Birbaha Hansada

बड़े दलों ने संथा​ली लोगों पर ध्यान नहीं दिया: संथाली सिनेमा की सुपरस्टार बीरबाहा हंसदा

सड़क से संसद: पश्चिम बंगाल के झारग्राम में संथाली सिनेमा की सुपरस्टार रहीं ​बीरबाहा हंसदा से बातचीत. बीरबाहा अब राजनीति में हैं. उनका कहना है कि बड़े राजनीतिक दल संथाली लोगों के अलावा दूसरे आदिवासी समूहों और उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया.

Jhargram Loksabha West Bengal

पश्चिम बंगाल: झारग्राम में आदिवासियों की आवाज़ संसद तक पहुंचाने की लड़ाई

सड़क से संसद: पश्चिम बंगाल की आदिवासी बहुल झारग्राम लोकसभा सीट पर बहुत सारे आदिवासी संगठन संसद में अपना प्रतिनिधि चाहते हैं, ताकि वे अपनी आवाज़ मज़बूती के साथ रख सकें.

Dongria Kondh tribe Niyamgiri Reuters

‘जब तक यहां से वेदांता रिफाइनरी नहीं हटती, नियमगिरी की लड़ाई जारी रहेगी’

ओडिशा के नियमगिरी क्षेत्र के लोग त्रिलोचनपुर गांव में बनी सीआरपीएफ छावनी और नियमगिरी सुरक्षा समिति के नेता लिंगराज आज़ाद की हालिया गिरफ़्तारी को वेदांता की वापसी से जोड़कर देख रहे हैं.

भीड़ के हमले में घायल पीटर केरकेट्टा. (फोटो साभार: ट्विटर)

झारखंड आदिवासी लिंचिंग के पीड़ितों ने कहा, हमें पीटने वाली भीड़ जय श्रीराम के नारे लगा रही थी

झारखंड के गुमला ज़िले में बीते 10 अप्रैल को गोहत्या के शक में भीड़ ने कुछ आदिवासियों पर हमला कर दिया था. इसमें एक आदिवासी की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे.

अपने बच्चों के साथ गोपी भील. (फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान के आदिवासी भील किसी भी दल की प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में रहने वाले आदिवासी भील समुदाय के लोग भूख, ग़रीबी, बीमारी का शिकार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

भीड़ के हमले में घायल पीटर केरकेट्टा. (फोटो साभार: ट्विटर)

झारखंडः गोहत्या के शक़ में भीड़ के हमले में घायल तीनों आदिवासियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज

झारखंड के गुमला ज़िले में गोहत्या के संदेह में भीड़ ने आदिवासियों पर हमला कर दिया था. इससे एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी और तीन लोग घायल हो गए थे.

Gumla Map

झारखंड: गोहत्या के शक़ में भीड़ ने की आदिवासियों की पिटाई, एक की मौत

घटना गुमला ज़िले के जुरमू गांव में हुई, जहां आदिवासी समुदाय के कुछ लोग एक मृत बैल का मांस निकाल रहे थे, जब पड़ोस के गांव के कुछ लोगों ने उन्हें देखा और गोहत्या के संदेह में उन पर हमला कर दिया. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन घायल अस्पताल में भर्ती हैं.

Indian Prime Minister Narendra Modi (C), chief of India's ruling Bharatiya Janata Party (BJP) Amit Shah (2-R), India's Home Minister Rajnath Singh (2-L) India's Foreign Minister Sushma Swaraj (L) and India's Finance Minister Arun Jaitley display copies of their party's election manifesto for the April/May general election, in New Delhi, India, April 8, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

भाजपा के संकल्प पत्र में आदिवासियों की अनदेखी

अपने संकल्प पत्र में भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासियों और परंपरागत वन निवासियों को लेकर जिस कदर बेरुखी दिखाई है उससे यह साबित हो रहा है कि पार्टी को देश के इन नागरिकों की कोई चिंता नहीं है.

पेन को लेकर नृत्य करते एक ही गोत्र के वंशज. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

अपने धर्म का बाज़ार नहीं चलाते आदिवासी

आदिवासी अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने धर्म का बाज़ार कभी नहीं चलाते. संगठित धर्मों और आदिवासियों की आस्था के बीच यह बड़ा फर्क है.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में आदिवासियों द्वारा निकाली गई रैली. (फोटो: अनुराग मोदी)

मध्य प्रदेश: आदिवासियों के लिए लोकसभा चुनाव में जंगल पर अधिकार प्रमुख मुद्दा है

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हाल ही में प्रदर्शन कर आदिवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा कि सुप्रीम कोर्ट में वन अधिकार क़ानून पर सुनवाई के दौरान उनकी सरकार मौन क्यों थी?

Narendra Modi Reuters featured

विपक्ष को मोदी के उग्र एजेंडा के जाल से बचना होगा

भाजपा ने आम चुनाव में राष्ट्रवाद और पाकिस्तान से ख़तरे को मुद्दा बनाने का मंच सजा दिया है. वो चाहती है कि विपक्ष उनके उग्रता के जाल में फंसे, क्योंकि विपक्षी दल उसकी उग्रता को मात नहीं दे सकते. विपक्ष को यह समझना होगा कि जनता में रोजगार, कृषि संकट, दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दों को लेकर काफी बेचैनी है और वे इनका हल चाहते हैं.

Adivasi Tribals Protest The Wire

‘जंगल और ज़मीन पर आदिवासियों का हक़ है, हमें यहां से कोई नहीं निकाल सकता’

वीडियो: जंगल से आदिवासियों को बेदख़ल करने के मुद्दे के ख़िलाफ़ नई दिल्ली में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने प्रदर्शन किया. उनकी मांग है कि वन अधिकार कानून-2006 को सख़्ती से लागू किया जाए. प्रदर्शनकारियों से संतोषी की बातचीत.

नियमगिरि के लखपदर गांव में लोदो सिकोका. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

पुलिस छावनी नहीं, पहाड़ों में स्कूल, अस्पताल चाहिए

सुप्रीम कोर्ट से खनन पर रोक के आदेश आने के बाद आज लोग ओडिशा में नियमगिरि के आसपास स्थापित पुलिस छावनियों को हटाने की मांग को लेकर संघर्षरत हैं.

कुचईपदर गांव की महिलाएं और तुलसी पूजन के लिए लाए गए पौधे. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

कैसे तबाह होती है एक समृद्ध जीवनशैली

कंपनी के ख़िलाफ़ संघर्ष हारने के बाद और प्लांट लगने के बाद कुछ लोगों को ऐसा लगने लगा कि उनका ईश्वर, उनके देवता कमजोर हैं. बाहर से आए लोगों का भगवान ज्यादा शक्तिशाली है. अगर वे उनके भगवान को पूजने लगे तो उनकी तरह ही मजबूत हो जाएंगे.

(फाइल फोटो)

क्यों सरकारी योजनाओं के बावजूद झारखंड की जनजातियों को खाने की किल्लत से दो-चार होना पड़ता है

झारखंड के लातेहार ज़िले के आदिम जनजाति परिवारों को अन्त्योदय अन्न योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

Odisha child birth case

ओडिशा: हॉस्टल में नाबालिग छात्रा द्वारा जन्म दिए गए शिशु की मौत, एनएचआरसी का सरकार को नोटिस

ओडिशा के कंधमाल ज़िले के एक सरकारी आदिवासी आवासीय विद्यालय में 14 साल की नाबालिग लड़की ने एक बच्चे को जन्म दिया था. इस मामले में प्रिंसिपल समेत तीन लोगों को निलंबित कर दिया गया है.