Agriculture

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सूखा झेल रहे किसानों पर दोहरी मार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का 40 फीसदी दावा बकाया

द वायर एक्सक्लूसिव: आरटीआई के जरिए प्राप्त किए गए आंकड़ों के मुताबिक 12,867 करोड़ के कुल अनुमानित दावे में से अब तक 7,696 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया है. जबकि, खरीफ 2018 सीजन के लिए बीमा कंपनियों ने कुल 20,747 करोड़ रुपये का प्रीमियम इकट्ठा किया था.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

चुनाव के मौसम में ताजा हो उठा उत्तर प्रदेश की समूची गन्ना पट्टी के किसानों का दर्द

देश के चीनी के कटोरे के नाम से मशहूर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बागपत और कैराना इलाका चुनाव प्रचार के इस मौसम में पोस्टरों, झंडों, रैलियों से पटा पड़ा है. लेकिन इस चुनाव ने कई किसानों के घाव हरे कर दिए हैं.

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कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने कहा, देश बड़े रोज़गार संकट से गुजर रहा है

सैम पित्रोदा ने कहा कि हमनें नई नौकरियों का सृजन नहीं किया है बल्कि पहले से मौजूद रोजगारों को ही खत्म कर दिया है इसलिए आज एक प्रमुख चुनौती यह है कि नई नौकरियों का सृजन कैसे किया जाए.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi celebrating the Diwali with the jawans of  the Indian Army and BSF, in the Gurez Valley, near the Line of Control, in Jammu and Kashmir, on October 19, 2017.

किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे

ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ कृषि आय घटी है बल्कि इससे जुड़े काम करने वालों की मज़दूरी भी घटी है. प्रधानमंत्री मोदी कृषि आय और मज़दूरी घटने को जोशीले नारों से ढंकने की कोशिश में हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

आंकड़े बताते हैं कि खेती में आमदनी दोगुनी करने का नारा जुमला ही रहने वाला है

2015-16 से तीन साल तक 10.4 प्रतिशत की दर से प्रगति करने पर ही हम कृषि क्षेत्र में दोगुनी आमदनी के लक्ष्य को पा सकते थे. इस वक़्त यह 2.9 प्रतिशत है. मतलब साफ है लक्ष्य तो छोड़िए, लक्षण भी नज़र नहीं आ रहे हैं. अब भी अगर इसे हासिल करना होगा तो बाकी के चार साल में 15 प्रतिशत की विकास दर हासिल करनी होगी जो कि मौजूदा लक्षण के हिसाब से असंभव है.

अमर्त्य सेन. (फोटो: रॉयटर्स)

कांग्रेस रोज़गार देने में अच्छी नहीं थी, लेकिन मोदी सरकार में हालात और बदतर हो गए: अमर्त्य सेन

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को आरक्षण देना अव्यवस्थित सोच है. आरक्षण को असमानता के कारण लागू किया गया था और यह कभी भी आय का प्रश्न नहीं था.

A farmer shows wheat crop damaged by unseasonal rains in his wheat field at Sisola Khurd village in the northern Indian state of Uttar Pradesh, March 24, 2015. To match Insight INDIA-MODI/  Picture taken March 24, 2015. REUTERS/Anindito Mukherjee

फसल बीमा से प्राइवेट कंपनियों ने कमाए करीब 3000 करोड़, सरकारी कंपनियों को घाटा: रिपोर्ट

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2018 तक में फसल बीमा के तहत कार्यरत सरकारी कंपनियों को 4,085 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसमें से सबसे बड़ा घाटा एआईसी को हुआ है.

अमर्त्य सेन (फोटो: पीटीआई)

सामान्य वर्ग को आरक्षण एक अव्यवस्थित सोच, गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं: अमर्त्य सेन

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि भाजपा समाज को बांटने वाली नीतियों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है. उन्होंने नागरिकता बिल को भेदभावपूर्ण बताया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

कृषि क़र्ज़ माफ़ी उतनी ग़लत नीति नहीं है जितनी कि लोग सोचते हैं: अमर्त्य सेन

प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा कि मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि क़र्ज़ माफ़ी पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण नीति है.

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फसल बीमा योजनाओं में पारदर्शिता की कमी सहित कई समस्याएं हैं: संसदीय समिति

वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने कहा है कि किसानों को फसल बीमा योजनाओं की ओर आकर्षित करने के लिए इनमें पर्याप्त पूंजी आवंटन की ज़रूरत है.

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मोदी सरकार का यू-टर्न, नई रिपोर्ट में कहा- नोटबंदी का किसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा

कृषि मंत्रालय ने 20 नवंबर को संसदीय समिति को दी गई वह रिपोर्ट वापस ले ली, जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी के चलते किसान खाद और बीज नहीं खरीद सके थे. समिति को दी गई नई रिपोर्ट में मंत्रालय ने कहा है कि नोटबंदी का कृषि क्षेत्र पर अच्छा असर पड़ा.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: कंपनियों ने किसानों का 2800 करोड़ रुपये का क्लेम नहीं चुकाया

विशेष रिपोर्ट: बीमा कंपनियों को अक्टूबर 2018 तक 66,242 करोड़ रुपये का प्रीमियम मिल चुका है. एक तरफ कंपनियों को समय पर प्रीमियम मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों के क्लेम का भुगतान कई महीनों से लंबित पड़ा है.

फोटो: रॉयटर्स

नोटबंदी से किसानों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा: कृषि मंत्रालय

कृषि मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि नोटबंदी की वजह से किसानों को खाद और बीज खरीदने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा था.

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मोदी सरकार की फसल बीमा योजना से कंपनियों के प्रीमियम में 350 फीसदी की बढ़ोतरी

द वायर एक्सक्लूसिव: आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कंपनियों को पहले की बीमा योजनाओं के मुक़ाबले 36,848 करोड़ रुपये का ज़्यादा प्रीमियम मिला है जबकि कवर किए गए किसानों की संख्या में सिर्फ़ 0.42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

Hum Bhi Bharat

हम भी भारत, एपिसोड 50: मोदी सरकार से क्यों नाराज़ हैं किसान

हम भी भारत की 50वीं कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी हालिया किसान आंदोलन और कृषि संकट से जुड़े मुद्दों पर पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन और किसान शक्ति संघ के पुष्पेंद्र सिंह से चर्चा कर रही हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

आर्थिक मानकों पर देश के 10 करोड़ किसान परिवार बहुत ही असुरक्षित हैं

नाबार्ड के हालिया अध्ययन के मुताबिक भारत में 10.07 करोड़ किसानों में से 52.5 प्रतिशत क़र्ज़ में दबे हुए हैं. वर्ष 2017 में एक किसान परिवार की कुल मासिक आय 8,931 रुपये थी.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi at Kisan Kalyan Mela, in Sehore, Madhya Pradesh on February 18, 2016.
	The Chief Minister of Madhya Pradesh, Shri Shivraj Singh Chouhan, the Union Ministers and other dignitaries are also seen.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में ज़्यादातर किसानों को जानकारी नहीं: सर्वे

वेदर रिस्क मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूआरएमएस) कंपनी के एक सर्वे में यह बात सामने आई कि सिर्फ 28.7 प्रतिशत किसानों को ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी है.

श्यामसुंदर प्रसाद चौरसिया ने 4 कट्ठे में पान की खेती की थी. शीतलहर ने पान बर्बाद कर दिया. उन्हें अब तक मुआवज़ा नहीं मिला है. (फोटो: उमेश कुमार राय/द वायर)

बिहार के पान उगाने वाले किसानों को नीतीश सरकार से कोई उम्मीद क्यों नहीं है

ग्राउंड रिपोर्ट: इस साल जनवरी में मगही पान की खेती करने वाले किसानों की फसल सर्दी की वजह से बर्बाद हो गई. सरकार की ओर से मुआवज़े का आश्वासन मिलने के बाद भी इन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी है.

Jaipur: A farmer harvests wheat crop at a field in Chandlai village of Jaipur on Friday. PTI Photo(PTI3_23_2018_000200B)

न्यूनतम समर्थन मूल्य: मोदी सरकार का ऐतिहासिक दाम का दावा ऐतिहासिक झूठ है

वीडियो: मोदी सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए गए बदलाव और किसानों के मुद्दों पर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव से कबीर अग्रवाल की बातचीत.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 276: भीड़तंत्र और असल मुद्दों से भागती भाजपा

जन गण मन की बात की 276वीं कड़ी में विनोद दुआ लिंचिंग से निपटने के लिए क़ानून लाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और असल मुद्दों से भाजपा के कन्नी काटने पर चर्चा कर रहे हैं.

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अख़बारों की चिंता में किसान नहीं बल्कि उनके उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोग हैं

अमर्त्य सेन कह चुके हैं कि भारतीय मीडिया तेज़ी से अमीरों का पक्षधर होता जा रहा है, बीते महीने हुए किसान आंदोलन की हिंदी अख़बारों में कवरेज सेन के कथन की पुष्टि करती है. आंदोलन के दौरान अख़बारों की चिंता किसानों की समस्याएं, उनकी दयनीय हालत और हालत के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बजाय आंदोलन के चलते उत्पादों की बढ़ी कीमतें और इससे शहरों में हुई परेशानी रही.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

चीनी उद्योग को मिले 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज से किसानों को ​क्या कोई फायदा होगा?

इतिहास यही रहा है कि सरकारें जब भी चीनी उद्योग के लिए राहत पैकेज जारी करती हैं तो उसमें किसानों के हित गौण हो जाते हैं और लाभ मिलों को पहुंचता है.

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केदारनाथ अग्रवाल: खेतों को चाहने वाला क्या कोई और भी कवि है

केदारनाथ अग्रवाल का सौंदर्यबोध खेतों की धूल में गुंथकर बना है और इस तरह के सौंदर्यबोध के वह हिंदी के इकलौते कवि हैं.

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सरकार चीनी मिलों को दे सकती है 7,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज

सूत्रों के मुताबिक, खाद्य मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक बनाने का प्रस्ताव दिया है. चीनी स्टॉक को बनाए रखने की लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी.

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कैराना उपचुनाव हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए अच्छी मिसाल बनाने का मौका: जयंत चौधरी

कैराना उपचुनाव, मुज़फ़्फ़रनगर दंगों और किसान राजनीति पर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी से कबीर अग्रवाल की बातचीत.

Amritsar: Farmers plant paddy seedlings in a field in a village near Amritsar on Friday. PTI Photo   (PTI6_16_2017_000065B)

बिहार के बटाईदार किसानों की सुध क्यों नहीं ले रही सरकार

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में किसान आत्महत्या की घटनाएं कम होने का मतलब यह कतई नहीं कि यहां के किसान खेती कर मालामाल हो रहे हैं. कृषि संकट के मामले में बिहार की तस्वीर भी दूसरे राज्यों की तरह भयावह है.

A woman winnowing wheat at a wholesale grain market on the outskirts of Ahmedabad, Gujarat, May 7, 2013. Credit Amit Dave/Reuters

किसानों को लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा एक जुमले से ज़्यादा कुछ नहीं

बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की ओर से किए गए प्रावधानों पर कृषि विशेषज्ञों को संदेह है. उनके अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा काफ़ी नहीं, यह भी देखा जाना ज़रूरी है कि बहुत थोड़े किसानों की पहुंच एमएसपी तक है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

‘बजट में किसानों को गुमराह ही नहीं किया बल्कि धोखा भी दिया गया है’

वीडियो: इस साल के बजट में कृषि और किसानों को लेकर की गई घोषणाओं पर कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा से द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु की बातचीत.

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​जन गण मन की बात, एपिसोड 191: बजट में कृषि क्षेत्र और वीआईपी कल्चर

जन गण मन की बात की 191वीं कड़ी में विनोद दुआ बजट में कृषि क्षेत्र को लेकर हुई घोषणाओं और देश में वीआईपी संस्कृति के चलन पर चर्चा कर रहे हैं.

फोटो: रॉयटर्स

किसानों को फ़सलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा: मोदी सरकार

सीताराम येचुरी ने कहा, कृषि विकास दर 4.5 प्रतिशत से घटकर 2.1 प्रतिशत हुई, किसान आत्महत्याएं ख़तरनाक स्तर पर पहुंचीं, क़र्ज़माफ़ी सिर्फ़ बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स के लिए.

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु. (फोटो: द वायर)

मोदी के कार्यकाल को देखें तो यह आर्थिक मोर्चे पर नाकामी की कहानी है: यशवंत सिन्हा

विशेष साक्षात्कार: पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा से मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों, कृषि संकट और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु.

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गांधी के चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष तक भारत किसानों का क़ब्रगाह बन गया है

देश भर के किसान एकजुट होकर लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर पूरे देश में किसान आत्महत्याएं भी जारी हैं. महाराष्ट्र में क़र्ज़ माफ़ी के बाद 5 महीने में 1,020 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

दिल्ली के संसद मार्ग पर देश भर के 184 किसान संगठनों की ओर से दो दिवसीय किसान मुक्ति संसद लगाई गई. (फोटो: कृष्णकांत/द वायर)

‘अब एक भी किसान की कुर्की नहीं होने देंगे, हिम्मत है तो पहले अंबानी-अडानी-माल्या की कुर्की करो’

किसान संसद ने कहा, देश भर के 184 किसान संगठन बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य के एक भी बोरा अनाज बिकने नहीं देंगे.

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भाजपा नेता के हाथ काटने के बयान पर हज़ारों किसानों ने तानीं मुट्ठियां

किसान मुक्ति संसद में उठा सवाल, मोदी जी! आपने किसानों के साथ वादाख़िलाफ़ी क्यों की? हम सब उंगली उठाकर सवाल पूछेंगे, हम देखना चाहते हैं ​कि कितने हाथ काटोगे?’

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देश में पहली बार महिलाओं की संसद, किसानों ने कहा- अब मोदी के जुमले नहीं चलेंगे

देश भर के 184 किसान संगठनों की किसान मुक्ति संसद में कृषि क़र्ज़ से पूर्ण मुक्ति और कृषि उत्पाद के लाभकारी मूल्य को लेकर दो विधेयकों के मसौदे पारित.

RPT...New Delhi: Potato farmers from UP throwing the vegetable on the road at a protest for increase in the minimum support price during 'Kisan Mukti Sansad' at Jantar Mantar, in New Delhi on Wednesday. PTI Photo by Subhav Shukla  (PTI7_19_2017_000067B)

‘देश में भंडारण की व्यवस्था न होने से कृषि उत्पादन का 50 प्रतिशत तक बर्बाद हो जाता है’

देश में जल्दी ख़राब होने वाले कुल कृषि उत्पादों के 11 प्रतिशत का ही भंडारण हो पाता है, 440 अरब रुपये की क़ीमत के उत्पाद होते हैं बर्बाद.