Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में आयोजित किसान महापंचायत में बड़ी संख्या में इकट्ठा किसान. (फोटो: पीटीआई)

यूपी: बागपत में किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं को दो लाख के बॉन्ड का नोटिस

रालोद पार्टी के पूर्व विधायक वीरपाल सिंह राठी ने कहा कि 31 जनवरी को बड़ौत तहसील में एक महापंचायत में शामिल होने से एक दिन पहले उन्हें और छह अन्य लोगों को नोटिस मिला था. महापंचायत में फैसला किया गया था कि क्षेत्र के लोग दिल्ली की सीमाओं पर जारी आंदोलन में शामिल होने के लिए गाजीपुर और सिंघू बॉर्डरों के लिए कूच करेंगे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

यूपीः किसानों को आंदोलन में जाने से रोकने के लिए प्रशासन ने भेजा नोटिस, हाईकोर्ट ने जवाब मांगा

दिल्ली में ट्रैक्टर परेड से पहले उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में कई किसानों को नोटिस जारी कर 50 हज़ार से लेकर 10 लाख तक का बॉन्ड भरने को कहा गया था. प्रशासन ने इस क़दम को सही ठहराते हुए कहा कि शांति बनाने के लिए ऐसा किया गया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

मंदिर में नमाज़: आरोपी को ज़मानत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- गिरफ़्तारी आख़िरी विकल्प

उत्तर प्रदेश में मथुरा के नंदमहल मंदिर में कथित तौर पर बिना अनुमति नमाज़ पढ़ने के लिए सामाजिक संगठन ख़ुदाई ख़िदमतगार के चार सदस्यों के ख़िलाफ़ दो नवंबर 2020 को केस दर्ज किया गया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोर्ट की हिदायत, धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश की आड़ में विवाहित युवक-युवती को परेशान न करे पुलिस

तीन साल पहले अंतर धार्मिक विवाह करने वाले युवक-युवती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश लागू किए जाने के बाद से अमेठी पुलिस उन्हें प्रताड़ित कर रही है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नोटिस का अनिवार्य प्रकाशन निजता के अधिकार का उल्लंघन: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी के लिए 30 दिन पहले नोटिस का अनिवार्य प्रकाशन कराना स्वतंत्रता और निजता के मूल अधिकार का उल्लंघन है. अब से नोटिस का प्रकाशन विवाह के इच्छुक पक्षों के लिए वैकल्पिक होगा.

इलाहाबाद हाईकोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

पुलिस के लिए किसी व्यक्ति की गिरफ़्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी स्वतंत्रता एक बहुमूल्य मौलिक अधिकार है और बहुत अपरिहार्य होने पर ही इसमें कटौती होनी चाहिए. तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ़्तारी मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

Married couple Bill Hacket, 53, (L) and Thom Uber hold hands in West Hollywood, California, after the U.S. Supreme Court ruled on California’s Proposition 8 and the federal Defense of Marriage Act, June 26, 2013. REUTERS/Lucy Nicholson

साथ रह रहे दो वयस्क व्यक्तियों के जीवन में कोई भी दख़ल नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को अंतरधार्मिक विवाह करने वाले युवक-युवती के संबंध में कहा कि इस अदालत ने कई बार यह व्यवस्था दी है कि जब दो बालिग व्यक्ति एक साथ रह रहे हों, तो किसी को भी उनके शांतिपूर्ण जीवन में दख़ल देने का अधिकार नहीं है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

धर्मांतरण के आरोप में केस दर्ज होने के एक महीने बाद यूपी सरकार ने कहा, नहीं मिले सबूत

इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान एक हलफ़नामा दाख़िल कर यूपी सरकार की ओर से अदालत को ये जानकारी दी गई. उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी क़ानून लागू होने के एक दिन बाद बीते साल 29 नवंबर को मुजफ़्फ़रनगर में दो मुस्लिम दिहाड़ी मज़दूरों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

वकील के ज़रिये प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार क़ानूनी प्रक्रिया का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी 1987 में एक शख़्स की हत्या के लिए उम्रक़ैद की सजा पाए व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह देखते हुए भी मामले की सुनवाई की कि व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कोई वकील नहीं कर रहा था और निचली अदालत के नज़रिये की पुष्टि कर दी. हाईकोर्ट ने सज़ा के ख़िलाफ़ उसकी अपील ख़ारिज कर दी थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

अंतरधार्मिक विवाह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, युवती को अपनी मर्ज़ी से जीने का अधिकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह करने वाले युवक-युवती को एक साथ रहने की मंज़ूरी देते हुए कहा कि महिला अपने पति के साथ रहना चाहती है. वह किसी भी तीसरे पक्ष के दख़ल के बिना अपनी इच्छा के अनुसार रहने के लिए स्वतंत्र है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

योगी पर ट्वीट के चलते दर्ज एफ़आईआर ख़ारिज, कोर्ट ने कहा- प्रतिरोध लोकतंत्र की विशेषता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिरोध के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत सुरक्षा प्रदान की गई है और सरकार के क़ानून व्यवस्था की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी क़ानून के तहत आरोपी की गिरफ़्तारी पर रोक लगाई

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर का मामला. मुस्लिम युवक के ख़िलाफ़ पहले से शादीशुदा महिला से शादी करने को लेकर धर्मांतरण विरोधी क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहा कि महिला वयस्क हैं और वह अपना भला-बुरा अच्छी तरह समझती हैं.

डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो साभार: फेसबुक/@drkafeelkhanofficial)

डॉ. कफ़ील की रिहाई के फ़ैसले में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- अच्छा फ़ैसला था

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा रासुका के तहत गिरफ़्तार किए गए डॉ. कफ़ील ख़ान की हिरासत रद्द कर उन्हें तत्काल रिहा किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसे सीजेआई एसए बोबड़े की अगुवाई वाली पीठ द्वारा ख़ारिज कर दिया गया.

New Delhi: Central Bureau of Investigation (CBI) logo at CBI HQ, in New Delhi, Thursday, June 20, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI6_20_2019_000058B)

राज्यों की सहमति के बिना सीबीआई का अधिकारक्षेत्र नहीं बढ़ा सकती केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में विपक्ष शासित आठ राज्य सरकारों द्वारा उनके राज्य में मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई ‘आम सहमति’ वापस ली गई है.

इलाहाबाद हाइकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

अदालत के आदेशों का अनुपालन पहली बार में नहीं कर रहे यूपी सरकार के अधिकारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लगता है कि अधिकारी पहली बार में आदेश का अनुपालन नहीं करने के आदी हो रहे हैं. यह बहुत खेदपूर्ण स्थिति है.