Allahabad

महंत नरेंद्र गिरि की मौत को आत्महत्या क़रार देने उत्तर प्रदेश पुलिस ने क्यों दिखाई जल्दबाज़ी?

वीडियो: इलाहाबाद में महंत नरेंद्र गिरि के निधन के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत काफी गर्म हो गई है. कोई इसे आत्महत्या बता रहा है तो कोई हत्या, लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि की मौत को आत्महत्या क्यों बताया? उन्होंने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई? वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का नज़रिया.

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच सीबीआई से कराएगी उत्तर प्रदेश सरकार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि बीते 20 सितंबर को इलाहाबाद स्थित अपने मठ के एक कमरे में मृत पाए गए थे. इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन लोगों- आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को गिरफ़्तार किया है. आनंद गिरि, महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य हैं, जबकि आद्या प्रसाद तिवारी बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी हैं. 

यूपी: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि मृत मिले, विभिन्न दलों ने मौत पर सवाल उठाए

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद स्थित बाघंबरी मठ में सोमवार शाम महंत नरेंद्र गिरि का शव पंखे से लटका हुआ मिला. पुलिस को मौके से सात पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें महंत ने अपने शिष्य आनंद गिरि के अलावा दो अन्य लोगों को अपनी मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि महंत ने आत्महत्या की या उनकी सुनियोजित हत्या हुई है, वहीं आम आदमी पार्टी ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.

इंदिरा गांधी को अयोग्य क़रार देने का निर्णय बहुत साहस भरा था: सीजेआई एनवी रमना

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि साल 1975 में वह जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा थे, जिन्होंने ऐसा आदेश पारित किया, जिसमें इंदिरा गांधी को अयोग्य क़रार दिया गया. इस निर्णय ने देश को हिलाकर रख दिया था.

Allahabad: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath takes a holy dip in the water of River Ganga at Sangam during the ongoing Kumbh Mela-2019, in Allahabad, Tuesday, Jan. 29, 2019. (PTI Photo)(PTI1_29_2019_000066B)

कैग ने 2019 के इलाहाबाद कुंभ मेला प्रबंधन में भारी वित्तीय अनियमितता सहित कई ख़ामियां गिनाईं

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने इलाहाबाद में 2019 कुंभ के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रबंधन में कई खामियां पाई हैं. इनमें ठोस कचरे के खराब निपटान से लेकर भीड़ प्रबंधन में खामी और मुहैया कराए धन के उपयोग में विसंगतियां शामिल हैं. कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि कुंभ मेले में प्रभावी भीड़ प्रबंधन के लिए राज्य सरकार द्वारा खरीदे गए 32.5 लाख रुपये के ड्रोन कैमरों का उपयोग नहीं किया गया और वे निष्क्रिय रहे.

उत्तर प्रदेशः इलाहाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे दफ़न शव बहकर ऊपर आए

इलाहाबाद में स्‍थानीय पत्रकारों के द्वारा 23 और 24 जून को शहर के विभिन्‍न घाटों पर मोबाइल से बनाए गए वीडियो और खींची गई तस्वीरों में नगर निगम की टीम को इन शवों को बाहर निकालते हुए देखा जा सकता है. मेयर ने बताया है कि इस तरह मिले शवों का अंतिम संस्कार करवाया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद में गंगा किनारे दफन शवों से चुनरी हटाने के मामले में जांच के आदेश

बीते 25 मई को विभिन्न न्यूज़ चैनलों एवं सोशल मीडिया पर प्रसारित ख़बरों तथा वीडियो क्लिप में यह दर्शाया गया है कि इलाहाबाद में गंगा किनारे दफन किए शवों के ऊपर लगाए गए चुनरी/कपड़े कुछ लोगों द्वारा हटाए जा रहे हैं, ताकि ऊंचाई से तस्वीर लेने पर ये दिखाई न पड़ें. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच दाह संस्कार का ख़र्च बढ़ जाने से परिजनों को शव गंगा किनारे दफ़न करना पड़ रहा है.

इलाहाबाद: कैमरे से बचने के लिए योगी सरकार ने गंगा किनारे दफ़न शवों पर लगी चुनरी हटवाई

बीते दिनों सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी कई खबरें, तस्वीरें एवं वीडियो प्रकाशित हुए हैं, जिसमें ये दिखाया गया है कि किस तरह कोरोना महामारी के बीच दाह संस्कार का ख़र्च बढ़ने के कारण परिजनों को मजबूर होकर शव को गंगा किनारे रेत में ही गाड़ना पड़ रहा है. इसकी वजह से केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार की ख़ूब किरकिरी हुई है. इससे बचने के लिए प्रशासन शवों से चुनरी हटवा रहा है.

लाल बहादुर वर्मा: जीवन प्रवाह में बहते एक इतिहासकार का जाना…

स्मृति शेष: लाल बहादुर वर्मा इतिहास की आंदोलनकारी और विचारधर्मी भूमिका के समर्थक थे. वे किताब से ज़्यादा इंसानों में विश्वास करते थे. केवल बैठे रहकर वे किसी बदलाव की उम्मीद नहीं करते थे, वे भारत के हर लड़ते हुए मनुष्य के साथ खड़े थे.

कोविड-19: उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में लॉकडाउन लगाने के हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक

कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पांच बड़े शहरों इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में 26 अप्रैल तक एक हफ़्ते के लिए लॉकडाउन लागू करने का निर्देश दिया था.

यूपी: हाईकोर्ट ने दिया पांच ज़िलों में लॉकडाउन का निर्देश, योगी सरकार का इनकार

इलाहबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार को प्रदेश के सर्वाधिक प्रभावित पांच शहरों- इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में 26 अप्रैल, 2021 तक के लिए लॉकडाउन लगाने का निर्देश दिया था. सरकार ने ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा है कि इस बारे में सख़्त कदम उठाए जा रहे हैं.

उत्तर प्रदेशः सरकारी अस्पताल के बाहर वृद्धा से मारपीट, आरोपी गार्ड गिरफ़्तार

घटना इलाहाबाद के स्वरूप रानी अस्पताल के बाहर की है, जहां अस्पताल के बाहर बैठी एक बुज़ुर्ग महिला के साथ वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड ने बेरहमी से मारपीट की. बताया गया है कि महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं.

उत्तर प्रदेश: शिक्षक भर्ती घोटाला संबंधित गिरफ़्तारियां करने वाले आईपीएस अधिकारी का तबादला

इलाहाबाद के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के नेतृत्व में राज्य में 69,000 सरकारी शिक्षकों की भर्ती में कथित घोटाले के संबंध में कई आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई थीं. ट्रांसफर के बाद अनिरुद्ध पंकज को अभी कहीं नियुक्ति नहीं दी गई है.

विदेशियों को शरण देने के आरोपी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को निलंबित किया गया

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को जिला प्रशासन की अनुमति के बिना ग़ैर-क़ानूनी रूप से विदेशियों को ठहरने की व्यवस्था करने समेत विभिन्न आरोपों में गिरफ़्तार किया गया है.

यूपी: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पर मरकज़ में शामिल होने की बात छिपाने का आरोप, मामला दर्ज

पुलिस के अनुसार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर मार्च के पहले सप्ताह में दिल्ली में हुए तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं में ड्यूटी भी दी. मामला सामने आने के बाद उन्हें परिवार समेत क्वारंटाइन में भेजा गया है.