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गुजरात विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी. (फोटो: ट्विटर/@trajendrabjp)

भारत के अधिकतर नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राह्मण हैंः गुजरात विधानसभा स्पीकर

गुजरात विधानसभा के स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि भारत के संविधान का मसौदा बनाने वाले और उसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को सौंपने वाले बीएन राउ भी ब्राह्मण थे. इस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल भी मौजूद थे.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi paying respects to Dr. Babasaheb Ambedkar, at Chaitya Bhoomi, in Mumbai on October 11, 2015. 
The Governor of Maharashtra, Shri C. Vidyasagar Rao, the Chief Minister of Maharashtra, Shri Devendra Fadnavis and the Union Minister for Road Transport & Highways and Shipping, Shri Nitin Gadkari and other dignitaries are also seen.

मोदी ख़ुद को आंबेडकर का ‘शिष्य’ बताते हैं, लेकिन मनु पर दोनों के नज़रिये में फ़र्क़ दिखता है

पुस्तक अंश: मोदीनामा किताब का पांचवां अध्याय ‘मनु का सम्मोहन’ बताता है कि भारत के संविधान के ऐलान को डाॅ. आंबेडकर ने मनु के शासन की समाप्ति कहा था, बावजूद इसके मनु की वापसी हो रही है.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में एससी-एसटी आरक्षण पर कर्नाटक सरकार का फ़ैसला बरक़रार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार के 2018 के उस क़ानून को बरक़रार रखा जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति एवं वरिष्ठता क्रम में आरक्षण की व्यवस्था की गई है.

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आंबेडकर को जितना अस्वीकार वर्तमान राजनीति ने किया है, उतना किसी और ने नहीं किया

जब कोई फल पक जाता है, तब उसे तोड़ने के लिए सभी लपक पड़ते हैं. उसी तरह आज राजनीति में आंबेडकर चहेते हो गए हैं, लेकिन आंबेडकर दिखने में चाहे जितने आकर्षक हों, अपनाने में उतने ही कठिन हैं. वर्तमान राजनीतिक दल इस बात को जानते हैं इसीलिए वे 14 अप्रैल और 6 दिसंबर पर उनका नाम तो लेते हैं लेकिन उनकी वैचारिक तेजस्विता से डरते हैं.

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अयोध्या विवाद न दो धर्मों का है और न मंदिर-मस्जिद का

फैज़ाबाद से निकलने वाले हिन्दी दैनिक जनमोर्चा के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह की किताब ‘अयोध्या- रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद का सच’ बताती है कि अयोध्या विवाद में सारी पेचीदगियां राजनीति द्वारा अपनी स्वार्थ साधना के लिए इस मुद्दे के बेजा इस्तेमाल से पैदा हुई हैं.

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अगर मेरी किताबों में कोई तत्व नहीं है, तो इन्हें सालों से क्यों पढ़ाया जा रहा था: कांचा इलैया

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा एमए के पाठ्यक्रम से दलित लेखक और चिंतक कांचा इलैया शेपहर्ड की किताब हटाने के प्रस्ताव पर उनका कहना है कि विश्वविद्यालय अलग-अलग विचारों को पढ़ाने, उन पर चर्चा करने के लिए होते हैं, वहां सौ तरह के विचारों पर बात होनी चाहिए. विश्वविद्यालय कोई धार्मिक संस्थान नहीं हैं, जहां एक ही तरह के धार्मिक विचार पढ़ाए जाएं.

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राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की प्रतिमा एक बार फिर विवादों में क्यों है

मनु की प्रतिमा को हाईकोर्ट परिसर से हटाने की याचिकाएं वर्ष 1989 से लंबित हैं, जिन पर 2015 के बाद से सुनवाई नहीं हुई है. सोमवार को औरंगाबाद की दो महिलाओं के प्रतिमा पर कालिख पोतने के बाद मामला फिर गर्मा गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

पदोन्नति में आरक्षण: क्यों सुप्रीम कोर्ट को एम नागराज फ़ैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण देने संबंधित मामले की सुनवाई कर रही है.

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2014 में भाजपा की जीत के बाद से चुनावी राजनीति में ‘सांप्रदायिक आपातकाल’ की स्थिति है

2014 के पहले तक ‘राजनीतिक बहुमत’ और ‘सांप्रदायिक बहुमत’ के बीच की खाई औपचारिक रूप से बनी रही. ज़मीन पर जो भी हालात रहे हों लेकिन चुनाव एक भ्रम पैदा करने वाले एक मुखौटे के रूप में काम करते रहे. लेकिन केंद्र में भाजपा के आने के बाद यह मुखौटा भी उतर गया.

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रामस्वरूप वर्मा: अंधविश्वास-सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ तर्क व मानवतावाद की बात करने वाला नेता

जन्मदिन पर विशेष: लगभग पचास साल तक राजनीति में सक्रिय रहे रामस्वरूप वर्मा को राजनीति का ‘कबीर’ कहा जाता है. किसान परिवार मेें जन्मे वर्मा ने एक लेखक, समाज सुधारक और चिंतक के रूप में उत्तर भारत पर गहरा असर डाला.

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हिंदुत्ववादियों का मनुस्मृति से ‘मोह’ छूट नहीं रहा है

भारत द्वारा संविधान अपनाए हुए सत्तर साल बीत चुके हैं. डॉ. आंबेडकर के मुताबिक इसने ‘मनु के शासन की समाप्ति की थी.’ लेकिन हिंदुत्ववादियों के बीच आज भी उसका सम्मोहन बरक़रार है.

प्रकाश आंबेडकर (फोटो: फेसबुक)

प्रधानमंत्री मोदी की हत्या के कथित षड्यंत्र वाली चिट्ठी महज़ चुनावी स्टंट है: प्रकाश आंबेडकर

साक्षात्कार: यलगार परिषद के सुधीर धवले की गिरफ़्तारी के साथ दलित समाज के प्रति भाजपा और मीडिया के रवैये पर भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर से प्रशांत कनौजिया की बातचीत.

On 20 May 1951, Dr. Ambedkar addressed a conference on the occasion of Buddha Jayanti organised at Ambedkar Bhawan, Delhi. The Guest of Honour was the then Ambassador of France in India. Shankaranand Shastri is seen on the right in the photograph.

आंबेडकर के रेडिकल पक्ष से कौन डरता है?

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के रेडिकल पक्ष को नज़रअंदाज़ करने के पीछे की राजनीति बहुत पुरानी है. शासक जमातें उत्पीड़ित तबकों से आने वाले नेताओं को सीमित करके प्रस्तुत करती हैं.

Episode 45

मीडिया बोल, एपिसोड 45: आंबेडकर पर सियासत और मीडिया

मीडिया बोल की 45वीं कड़ी में उर्मिलेश आंबेडकर पर सियासत और मीडिया कवरेज पर जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार और वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा जोशी से चर्चा कर रहे हैं.

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जब चुनाव हार गए थे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर

जन्मदिन विशेष: भारत के जिस संविधान का भीमराव आंबेडकर को निर्माता कहा जाता है उसके लागू होने के बाद 1952 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव में वे बुरी तरह हार गए थे.