Anti CAA Protest

New Delhi: Protestors vandalize a car during a clash between a group of anti-Citizenship Amendment Act protestors and supporters of the new citizenship act, at Maujpur crossing, in northeast Delhi, Monday, Feb. 24, 2020. (PTI Photi) (PTI2_24_2020_000165B)

दिल्ली हिंसाः पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं के ‘नाम’ बताने वाले ने कहा कि उन्हें नहीं जानता

दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ जाफराबाद हिंसा के एक आरोपी शाहरुख ने अपने बयान में पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता देवांगना कलीता और नताशा नरवाल का नाम लिया था. शाहरुख ने कहा कि हिंसा में आंखों की रोशनी लगभग खो देने के कारण उसे नहीं पता कि पुलिस ने उससे जिस बयान पर दस्तख़त कराए, उसमें क्या लिखा था.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएए विरोधी प्रदर्शन के आरोपियों के पोस्टर बीते मार्च महीने में जगह-जगह लगाए गए थे. (फोटो: पीटीआई)

सीएए विरोधी प्रदर्शन: लखनऊ जिला प्रशासन ने कुर्की की प्रक्रिया शुरू की

सदर तहसीलदार ने बताया कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के मामले में लखनऊ के चार थानों में दर्ज मामलों के सिलसिले में 54 लोगों के ख़िलाफ़ वसूली का नोटिस जारी किया था. उनमें से हसनगंज इलाके में दो संपत्तियां मंगलवार को कुर्क कर ली गई.

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जामिया में पुलिस हिंसा: एनएचआरसी ने छात्रों को ही बताया दोषी

वीडियो: पुलिस द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया की लाइब्रेरी में घुसकर विद्यार्थियों पर कार्रवाई करने की ख़बर के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्ख़ियों में आने के सात महीने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जामिया के छात्रों के साथ कथित पुलिस बर्बरता पर अपनी रिपोर्ट जारी की है.

घटना के बाद जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मी लाइब्रेरी में बैठे छात्रों को लाठी से मारते दिख रहे थे. (साभार: ट्विटर/वीडियोग्रैब)

जामिया हिंसा: एनएचआरसी ने परिसर में पुलिसिया कार्रवाई के लिए छात्रों को ही ज़िम्मेदार ठहराया

15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर में दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों को बर्बरता से पीटने की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इससे पहले विद्यार्थियों का सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन एक ‘ग़ैर क़ानूनी जमावड़ा’ था, जिसने पुलिसिया कार्रवाई को दावत दी.

New Delhi: Security personnel patrol streets following clashes over the new citizenship law, near Maujpur metro station in northeast Delhi, Wednesday, Feb. 26, 2020. Communal violence over the amended citizenship law in northeast Delhi had claimed at least 20 lives till today. (PTI Photo)(PTI2_26_2020_000062B)

दिल्ली: पुलिस ने चार्जशीट में ताहिर हुसैन को ‘दंगों का मास्टरमाइंड’ कहा, वकील बोले- फंसाया गया है

फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने स्थानीय अदालत में हज़ार पन्नों से अधिक की चार्जशीट दायर की है. आप से निष्काषित हुए स्थानीय पार्षद ताहिर हुसैन के वकील का कहना है कि पुलिस उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ एक भी सबूत नहीं पेश कर पाई है और उन्हें साज़िशन फंसाया जा रहा है. हुसैन आरोपी नहीं पीड़ित हैं.

देवांगना कलीता. (फोटो साभार: ट्विटर)

पिंजरा तोड़ की देवांगना कलीता को दरियागंज मामले में मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- कोई साक्ष्य नहीं

पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता देवांगना कलीता और नताशा नरवाल को दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर गिरफ्तार किया गया था. चूंकि कलीता एक और मामले में गिरफ्तार हैं और उनसे पूछताछ चल रही है, इसलिए वे अभी जेल में बंद रहेंगी.

नताशा नरवाल. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

दिल्ली हिंसा: जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पहले से ही हिरासत में ली गईं पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ता और जेएनयू की शोध छात्रा नताशा नरवाल को दिल्ली दंगा मामले में गिरफ़्तार किया है. पुलिस का कहना है कि दंगे की साज़िश रचने में नताशा की भूमिका को लेकर उनके पास पुख़्ता सबूत हैं.

देवांगना कलीता और नताशा नरवाल.(फोटो साभार: ट्विटर)

कोर्ट ने पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं को जमानत दी, पुलिस ने एक अन्य मामले में कस्टडी मांग ली

दिल्ली कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी सिर्फ एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, किसी हिंसा में शामिल नहीं थे.

नताशा नरवाल और देवांगना कलीता. (फोटो साभार: ट्विटर)

सीएए: दिल्ली हिंसा मामले में पिंजरा तोड़ संगठन की दो कार्यकर्ता गिरफ़्तार

गिरफ़्तार की गईं दोनों कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कलीता जेएनयू की छात्राएं हैं. पिंजरा तोड़ संगठन की ओर से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने बीते कुछ महीनों में कई छात्रों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. हम इसकी पुरज़ोर निंदा करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेत. (फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना की आड़ में प्रतिरोध का दमन नहीं किया जाना चाहिए: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख

यूएन मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचलेट ने कहा कि इस महामारी से सामना करने के लिए राज्यों को अतिरिक्त शक्तियों की आवश्यकता है. हालांकि अगर कानून के शासन को बरकरार नहीं रखा जाता है तो ये महामारी एक मानवाधिकार आपदा में तब्दील हो जाएगी.

कलकत्ता हाईकोर्ट (फोटो साभार: Twitter/@LexisNexisIndia)

सीएए प्रदर्शन में शामिल हुए पोलैंड के छात्र को नहीं छोड़ना होगा देश, हाईकोर्ट ने रद्द किया आदेश

पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में साहित्य विभाग में मास्टर डिग्री के छात्र कामिल सिदेंजस्की पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून विरोधी रैली में हिस्सा लिया था. छात्र ने अदालत से केंद्र सरकार के आदेश को रोकने और केंद्र को अपना आदेश वापस लेने के लिए निर्देश देने की मांग की थी.

योगी आदित्यनाथ (फोटोः पीटीआई)

उत्तर प्रदेशः योगी आदित्यनाथ को आतंकी कहने पर वकील के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज

राजद्रोह के मामले में आरोपी बनाए गए कानपुर की जिला अदालत के वकील अब्दुल हन्नान को गिरफ्तार कर लिया गया है.

Mirzapur: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath addresses at a rally during the five-days Ganga Yatra under the 'Namami Ganga' campaign, in Mirzapur, Wednesday, Jan. 29, 2020. (PTI Photo)(PTI1_29_2020_000180B)

सीएए का विरोध करने वाले कोरोना वायरस की तरह ख़तरनाकः योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया मिलकर लड़ रही है. समाज को भी सीएए का विरोध कर रहे लोगों को पहचानना होगा और इनकी वास्तविकता को सबके सामने रखना होगा.

भारतीय सुप्रीम कोर्ट (फोटो: रायटर्स)

सीएए विरोध: 22 लोगों को जमानत देने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

पिछले साल 19 दिसंबर को सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और पुलिस पर हमले के आरोप में मैंगलोर पुलिस ने 22 लोगों को आरोपी बनाया था. बीते 17 फरवरी को कर्नाटक हाईकोर्ट ने ठोस सबूत नहीं होने की बात कहते हुए सभी 22 लोगों को जमानत दे दी थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

ब्रिटेन ने नागरिकता कानून के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त की

ब्रिटिश सिख लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने कहा कि दिल्ली की हिंसा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की दुखद यादों को ताजा कर दिया है, जब वह भारत में पढ़ रहे थे और उनकी साथी सांसद प्रीत कौर गिल ने भी 1984 दंगों का संदर्भ दिया.