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‘एंटी-नेशनल’ का तमगा बांटने वाले समूह को आरएसएस की मीडिया इकाई ने दिया पत्रकारिता सम्मान

आरएसएस से संबद्ध इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र ने सोशल मीडिया समूह ‘क्लीन द नेशन’ को सोशल मीडिया नारद पत्रकारिता अवॉर्ड से सम्मानित किया है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi celebrating the Diwali with the jawans of  the Indian Army and BSF, in the Gurez Valley, near the Line of Control, in Jammu and Kashmir, on October 19, 2017.

भाजपा को आतंकवाद और राष्ट्रवाद पर गाल बजाना बंद करना चाहिए

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में आफ्स्पा और राजद्रोह क़ानून में बदलाव की बात कही है, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि आफ्स्पा में सुधार से सेना का मनोबल गिरेगा. सोचने वाली बात है कि अगर सैनिकों के अधिकारों पर यह सीमा तय हो कि किसी भी नागरिक को सिर्फ शक़ के बिना पर मारने, गायब करने या किसी महिला के साथ यौन हिंसा की शिक़ायत होने पर उन्हें क़ानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा तो इसमें सेना का मनोबल कैसे गिरेगा?

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BJP senior leader LK Advani during BJP National Executive Meeting, in New Delhi, Saturday, Sept 8, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI9_8_2018_000103B)

मोदी की भाजपा पर लिखे आडवाणी के ब्लॉग में इंदिरा के ख़िलाफ़ लिखे उनके लेखों की झलक है

भाजपा के संस्थापक ने विरोधियों को एंटी-नेशनल कहने पर आपत्ति जताई है, जो मोदी-शाह की रणनीति और अभियान का प्रमुख तत्व रहा है. ऐसा ही कुछ लालकृष्ण आडवाणी ने 1970 के दशक के मध्य में आपातकाल के समय जेल में बंद होने के दौरान भी लिखा था.

Bulletin 5th april

द वायर बुलेटिन: लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, राजनीतिक रूप से असहमति जताने वाले लोग राष्ट्र विरोधी नहीं

टिकट पर भाजपा के अनिर्णय के बाद सुमित्रा महाजन द्वारा लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा समेत आज की बड़ी ख़बरें. दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट.

India's Prime Minister Narendra Modi visits the National Cemetery in Seoul, South Korea, February 22, 2019. REUTERS/Kim Hong-Ji

राष्ट्रवाद की आड़ लेकर सवालों को दबाया जा रहा है

मीडिया का एक बड़ा तबका, जिसका धर्म सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछना होना चाहिए, घुटने टेक चुका है और देश के कुछ सबसे शक्तिशाली लोगों ने चुप्पी ओढ़ ली है, लेकिन आम लोग ऐसा नहीं करने वाले हैं. उनकी आवाज़ ऊंचे तख़्तों पर बैठे लोगों को सुनाई नहीं देती, लेकिन जब वक़्त आता है वे अपना फ़ैसला सुनाते हैं.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अमित शाह ने कहा, बालाकोट में 250 आतंकी मारे गए, कांग्रेस ने पूछा- संख्या किसने बताई

कांग्रेस ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को यह बताना चाहिए कि बालाकोट में वायुसेना की कार्रवाई में मारे गए आतंकवादियों की संख्या उन्हें किसने बताई. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री देश को सच बताएं.

Pokhran: Fire Power Demonstration (FPD) of Indian Air Force (IAF) fighter plane during the 'VAYU SHAKTI-2019' at Pokhran, Rajasthan, Saturday, Feb 16, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI2_16_2019_000150B)

प्रधानमंत्री का सेना को एक ख़तरनाक नाटकीय मुहिम में उतारना बेहद अपमानजनक है

बालाकोट एयर स्ट्राइक, कश्मीर और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे मौजूदा तनाव पर अरुंधति रॉय का नज़रिया.

India Pakistan Flag Reuters

संपादकीय: भारत-पाकिस्तान को अब आपसी तनाव कम करने पर ज़ोर देना चाहिए

पाकिस्तान का दायित्व है कि वो अपनी ज़मीन पर पनप रहे आतंकी समूहों के ख़िलाफ़ कदम उठाए. प्रधानमंत्री इमरान खान को यह समझना होगा कि उनके ऐसा न करने की स्थिति में बातचीत के प्रस्ताव से कुछ हासिल नहीं होगा.

Kolkata: West Bengal chief minister and Trinamool Congress chief Mamata Banerjee addresses the party's extended Core Committee meeting in Kolkata, Monday, Feb 25, 2019. (PTI Photo/Swapan Mahapatra) (PTI2_25_2019_000127B)

बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक के संबंध में जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बालाकोट में हवाई हमलों के बाद हमें बताया गया कि 300 मौतें हुईं, लेकिन मैंने कई ऐसी ख़बरें पढ़ीं जिनमें कहा गया कि कोई इंसान नहीं मारा गया.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi speaks during the National Youth Parliament Festival, 2019 Awards function, in New Delhi, Wednesday, Feb 27, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI2_27_2019_000026B)

क्या हमारी सेना का इस्तेमाल एक राजनीतिक दल के हितों के लिए किया जा रहा है?

भारतीय प्रधानमंत्री ने ‘पायलट प्रोजेक्ट’ वाला बयान देकर साबित किया कि घृणा से गढ़े गए स्वभाव की तुच्छता किसी भी क्षण की गंभीरता और किसी पद की गरिमा से बाधित नहीं होती.

Mumbai: Students wave the Indian tricolor flag while celebrating the 71st Independence Day in Mumbai on Tuesday. PTI Photo by Santosh Hirlekar(PTI8_15_2017_000183B)

भारत जैसे देश में सिर्फ़ संविधान की सीमाओं में रहकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं

आज़ादी के इतिहास को देखने पर यह पता चलता है कि तत्कालीन नेताओं ने आज़ादी को प्राप्त करने हेतु अपने-अपने मार्गों पर चलने का कार्य किया परंतु एक मार्ग पर चलने वाले ने दूसरे मार्ग पर चलने वाले नेताओं को कभी भी राष्ट्रद्रोही नहीं कहा.

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आज़ादी के सत्तर साल बाद भी एक बीमार देश राष्ट्रवाद की ऊर्जा की तलाश में भटक रहा है

कश्मीर, आतंकवादी, वामपंथी, जेएनयू और जेएनयू टाइप, राष्ट्रवाद, दुर्गा, सब कुछ घालमेल हो जाता है. देश जैसे एक विक्षिप्तता में बड़बड़ा रहा है. सन्निपात से उसे होश में लाना नामुमकिन हो रहा है.

New Delhi: Union Minister for Defence Nirmala Sitharaman waits to receive her Tajikistan counterpart Lieutenant General Sherali Mirzo at South Block in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Manvender Vashist (PTI2_8_2018_000113B)

निर्मला जी को कोई याद दिलाए कि वे जेएनयू की नहीं, देश की रक्षा मंत्री हैं

अगर रक्षा मंत्री को विश्वविद्यालयों में इतनी ही दिलचस्पी है तो जियो इंस्टिट्यूट पर ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दें. बहुत सी यूनिवर्सिटी में शिक्षक नहीं हैं. जो अस्थायी शिक्षक हैं उनका वेतन बहुत कम हैं. इन सब पर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करें.

Demonstrators from the Jat community sit on top of a truck as they block the Delhi-Haryana national highway during a protest at Sampla village in Haryana, India, February 22, 2016. REUTERS/Adnan Abidi

अब पराया लगता है यह देश

हम देश के एक छोटे से क़स्बे में पले-बढ़े लेकिन उस दौर में लोगों का दिलो-दिमाग राजनीति ने इतना छोटा नहीं था, जबकि देश का विभाजन हुए बहुत अरसा भी नहीं बीता था. नफ़रत की ऐसी आग नहीं लगी हुई थी, जैसी आज लगी है.

Anti national

जो आज दूसरों को ‘एंटी नेशनल’ बता रहे हैं, कभी वे भी ‘देशद्रोही’ हुआ करते थे

एंटी-नेशनल, भारत विरोधी जैसे शब्द आपातकाल के सत्ताधारियों की शब्दावली का हिस्सा थे. आज कोई और सत्ता में है और अपने आलोचकों को देश का दुश्मन बताते हुए इसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है.

Student Protest Reuters

सरकार चाहती है देश का युवा समझे कि प्रतिरोध करना राष्ट्रद्रोह और ग़ैर-लोकतांत्रिक है

हमारी राष्ट्रीय राजनीति और भाजपा कांग्रेस विरोधी आंदोलन यानी प्रतिरोध का ही नतीजा हैं, लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं करता. ख़ुद भाजपा भी नहीं. वे चाहते हैं कि हम इमरजेंसी के बारे में जानें लेकिन उतना, जितने से उन्हें नुकसान न पहुंचे.

Photographers and video cameramen gather outside the special court in Mumbai May 18, 2007. The court on Friday commenced sentencing against the 100 people found guilty of involvement in the 1993 bombings in Mumbai which killed 257 people. REUTERS/Punit Paranjpe  (INDIA)

ये चुप्पी मीडिया नहीं, ‘पपी मीडिया’ है, जो सरकार के फेंके गए टुकड़ों पर पल रहा है

हिंदू-मुसलमान का एक्शन, ‘हिंदू खतरे में है’ का नाच, जेएनयू पर डायलॉग, संसद का सास-बहू, लव जिहाद का धोखा… पूरा देश समाचारों में एकता कपूर के सीरियल देख रहा है, वहीं भुखमरी, किसान आत्महत्या, बलात्कार, बेरोज़गारी, निर्माण और उत्पादकता का विनाश, महिला और दलित उत्पीड़न के बारे में नज़र आती है तो केवल… चुप्पी.

रिज़र्व बैंक इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन. (फोटो: रॉयटर्स)

विश्वविद्यालयों में किसी को भी ‘राष्ट्र विरोधी’ बताकर चुप नहीं कराया जाना चाहिए: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि समाज के तौर पर ऐसे सुरक्षित स्थानों का निर्माण करना होगा, जहां बहस और चर्चाएं होती हैं, लोग अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग कर रहे हों, बोलने के लिए किसी लाइसेंस की ज़रूरत न हो.

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सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप में ज़ी हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज

अररिया उपचुनाव के बाद वायरल हुए कथित ‘देश विरोधी’ वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि के बिना उस पर सांप्रदायिकता भड़काने वाला कार्यक्रम करने के आरोप में एक पूर्व नौकरशाह ने ज़ी समूह के एक चैनल के ख़िलाफ़ न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी में शिकायत दर्ज करवाई है.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

फोटो: रॉयटर्स

क्या संघ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के ख़िलाफ़ था?

भारत छोड़ो आंदोलन के बाद ब्रिटिश सरकार ने खुशी व्यक्त करते हुए लिखा कि संघ ने पूरी ईमानदारी से ख़ुद को क़ानून के दायरे में रखा, ख़ासतौर पर अगस्त, 1942 में भड़की अशांति में वो शामिल नहीं हुआ.