Aung San Suu Kyi

ICJ source twitter

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने म्यांमार को रोहिंग्या का जनसंहार रोकने का आदेश दिया

अदालत ने कहा कि उनका ये आदेश म्यांमार पर बाध्यकारी है और वे चार महीने में आईसीजे को रिपोर्ट देकर बताएं कि उन्होंने आदेश के अनुपालन के लिए क्या किया.

Rohingya refugees walk on a muddy path as others travel on a boat after crossing the Bangladesh-Myanmar border, in Teknaf, Bangladesh, September 6, 2017. REUTERS/Danish Siddiqui

म्यांमार: सरकार के पैनल ने रोहिंग्या जनसंहार से किया इनकार, मानवाधिकार समूहों ने की निंदा

अगस्त 2017 से शुरू हुए सैन्य अभियानों के चलते करीब 7,40,000 रोहिंग्या लोगों को सीमापार बांग्लादेश भागना पड़ा था. पिछले साल सितंबर महीने में संयुक्त राष्ट्र की एक टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि म्यांमार में करीब छह लाख रोहिंग्या मुसलमान नरसंहार के गंभीर ख़तरे का सामना कर रहे हैं.

Ahmed, a Rohingya refugee man cries as he holds his 40-day-old son, who died as a boat capsized in the shore of Shah Porir Dwip while crossing Bangladesh-Myanmar border, in Teknaf, Bangladesh. Reuters

म्यांमार में छह लाख रोहिंग्या ‘नरसंहार के गंभीर खतरे’ का सामना कर रहे हैं: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की फैक्ट फाइंडिंग मिशन ने एक रिपोर्ट में कहा कि म्यांमार लगातार नरसंहार की सोच को पनाह दे रहा है.

म्यांमार नेता आंग सान सू ची. (फोटो: रॉयटर्स)

रोहिंग्या संकट पर चुप्पी के चलते कनाडा ने आंग सान सू ची की मानद नागरिकता वापस ली

​नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित म्यांमार की नेता आंग सान सू ची को कनाडा की संसद ने 2007 में मानद नागरिकता दी थी.

म्यांमार नेता आंग सान सू ची. (फोटो: रॉयटर्स)

म्यांमार की नेता सू ची ने रॉयटर्स के पत्रकारों को जेल भेजने के अदालती फैसले का बचाव किया

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकारों को रखाइन में सैन्य कार्रवाई के दौरान हुए अत्याचारों की रिपोर्टिंग करते हुए देश के सरकारी गोपनीयता क़ानून तोड़ने के लिए पिछले सप्ताह सात-सात साल की जेल की सज़ा सुनाई गई.

Migrants, who were found at sea on a boat, collect rainwater during a heavy rain fall at a temporary refugee camp near Kanyin Chaung jetty, outside Maungdaw township, northern Rakhine state, Myanmar June 4, 2015. REUTERS/Soe Zeya Tun

क्या रोहिंग्याओं के लिए उम्मीद नाम का कोई कोना बचा हुआ है?

दुनिया ने रोहिंग्याओं के ख़िलाफ़ सहानुभूति में इतनी कंजूसी दिखाई है कि सहानुभूति की कोई भी अपील ईश्वर की आवाज़ की तरह सुनाई देती है.