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​जन गण मन की बात, एपिसोड 305: मोहन भागवत का भाषण और अर्थव्यवस्था

जन गण मन की बात की 305वीं कड़ी में विनोद दुआ संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया भाषण, इसके राजनीतिक महत्व और देश की अर्थव्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं.

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एनपीए पर रघुराम राजन की रिपोर्ट रसूख़दारों पर सरकारी मेहरबानी का दस्तावेज़ है

अब यह देखा जाना बाक़ी है कि क्या मोदी सरकार इन बड़े कॉरपोरेट घरानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में सफल हो पाती है, जो आने वाले आम चुनावों में अज्ञात चुनावी बॉन्डों के सबसे बड़े ख़रीदार हो सकते हैं.

New Delhi: A file photo of liquor baron Vijay Mallya. MEA (Ministry of External Affairs) revoked Mallya's passport under S.10(3)(c) & (h) of Passports Act," foreign ministry spokesman Vikas Swarup tweeted on Sunday.   PTI Photo  (PTI4_24_2016_000134B) *** Local Caption ***

माल्या को ‘माल्या’ किसने बनाया?

विजय माल्या ने हर दल की मदद से खुद को राज्यसभा में पहुंचाकर भारत की संसदीय परंपरा को उपकृत किया. मैं माल्या के इस योगदान का सम्मान करता हूं. इस मामले में प्रो-माल्या हूं. क्या माल्या बहुत बड़े राजनीतिक विचारक थे? जिन-जिन लोगों ने उन्हें संसद में पहुंचाया वो सामने आकर बोले तों. वन सेंटेंस में!

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जनता एनपीए विवाद में उसी तरह उल्लू बन रही है जैसे हिंदू-मुस्लिम डिबेट में बनती है

अगर यह राजनीतिक विवाद किसी भी तरह से आर्थिक अपराध का है तो दस लाख करोड़ रुपये लेकर फरार अपराधियों के नाम लिए जाने चाहिए. किसके राज मे लोन दिया गया यह विवाद है, किसे लोन दिया गया इसका नाम ही नहीं है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and former prime minister Manmohan Singh during a release of the book titled "Moving On...Moving Forward: A Year in Office" published on experiences of M Venkaiah Naidu during his first year as Vice President of India and Chairman of Rajya Sabha, in New Delhi on Sunday, Sept 2, 2018. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI9_2_2018_000057B)

एनपीए को लेकर यूपीए और एनडीए की नीतियां और नीयत एक जैसी है

कुछ अमीर उद्योगपति और अमीर होते रहें, जनता हिंदू-मुस्लिम करती रहे, इसलिए कांग्रेस भी नहीं बताती है कि वह जब सत्ता में आएगी तो उसकी अलग आर्थिक नीति क्या होगी. भाजपा भी यह सब नहीं करती है जबकि वह सत्ता में है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi being received by the Governor of Reserve Bank of India, Shri Raghuram Rajan at the Financial Inclusion Conference of RBI, in Mumbai on April 02, 2015.

रघुराम राजन ने पीएमओ को दी थी एनपीए से जुड़े घोटालेबाज़ों की सूची, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई

संसद की प्राक्कलन समिति को भेजे पत्र में आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने उन तरीक़ों के बारे में बताया है जिनके ज़रिये बेईमान बिज़नेस घरानों को सरकार और बैंकिंग व्यवस्था से घोटाला करने की खुली छूट मिली.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 302: कृषि लोन की बंदरबांट और सवर्ण भारत बंद

जन गण मन की बात की 302वीं कड़ी में विनोद दुआ बैंकों द्वारा सस्ती दरों और आसान नियमों पर बड़ी कंपनियों को ‘कृषि’ लोन देने और एससी/एसटी एक्ट में हुए संशोधन के खिलाफ हुए भारत बंद पर चर्चा कर रहे हैं.

भारतीय रिज़र्व बैंक(फोटो: रायटर्स)

नोटबंदी के बाद से छोटे उद्योगों द्वारा बैंकों का लोन नहीं चुकाने का मार्जिन दोगुना हो गया

भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, मार्च 2017 तक लोन न चुकाने का मार्जिन 8,249 करोड़ था जो मार्च 2018 तक बढ़कर 16,111 करोड़ रुपये हो गया.

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नोटबंदी: न ख़ुदा ही मिला न विसाल ए सनम

सरकार का कहना था कि बंद किए गए नोटों में से लगभग 3 लाख करोड़ मूल्य के नोट बैंकों में वापस नहीं आएंगे और यह काले धन पर कड़ा प्रहार होगा, लेकिन रिज़र्व बैंक मुताबिक अब नोटबंदी के बाद जमा हुए नोटों का प्रतिशत 99 के पार पहुंच गया है. यानी या तो इन नोटों में कोई काला धन था ही नहीं या उसके होने के बावजूद सरकार उसे निकालने में विफल रही.

A man repairs gear parts used in automobiles inside a workshop at an industrial area in Mumbai, India. Small businesses have been struggling with the new tax. (Photo: Danish Siddiqui/Reuters)

लघु उद्योगों के निर्यात पर नोटबंदी से ज़्यादा जीएसटी की मार पड़ी: रिज़र्व बैंक रिपोर्ट

लघु एवं मझोले उद्यमों यानी एमएसएमई को देश की आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण इंजन माना जाता है और देश के कुल निर्यात में इसका 40 फीसदी योगदान है.

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कैसे हुआ था रिज़र्व बैंक का बंटवारा

आज़ादी के 71 साल: 1947 में देश के विभाजन के बाद रिज़र्व बैंक ने कुछ समय तक पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक की भी ज़िम्मेदारी उठाई थी, जिसने आगे जाकर कई मुश्किलें खड़ी कर दीं.

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मोदी सरकार में एस. गुरुमूर्ति होने के मायने

हाल ही में रिज़र्व बैंक के बोर्ड में शामिल हुए स्वामीनाथन गुरुमूर्ति की नरेंद्र मोदी के नोटबंदी जैसे आर्थिक नीति संबंधी फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

A bird flies past the logo of Punjab National Bank installed on the facade of its office in Mumbai, India February 21, 2018. REUTERS/Danish Siddiqui

पंजाब नेशनल बैंक: जानबूझकर क़र्ज़ न चुकाने वाले बड़े क़र्जदारों का बकाया 15,490 करोड़ रुपये पहुंचा

ये वो लोग हैं जिन पर बैंक का 25 लाख रुपये या उससे अधिक का क़र्ज़ बकाया है और क्षमता होने के बावजूद उन्होंने इसे नहीं चुकाया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

आने वाले साल बैंकों के लिए मुश्किल भरे होंगे: स्टेट बैंक

2017-18 में 21 में से 19 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कुल 85,370 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ. सबसे ज़्यादा घाटा घोटाले की मार झेल रहे पंजाब नेशनल बैंक को करीब 12,283 करोड़ रुपये का हुआ.

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मोदी द्वारा ज़ोर-शोर से शुरू की गईं विभिन्न योजनाओं की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है?

मोदी सरकार द्वारा बीते चार सालों में बदलाव के बड़े दावों के साथ शुरू की गईं विभिन्न योजनाएं कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर पाने में नाकाम रही हैं.

Reserve Bank Reuters

रिज़र्व बैंक ने एलओयू जारी करने पर लगाई रोक

राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि साल 2017 में पीएनबी ने नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों के लिए लगभग 54 अरब रुपये के 150 फ़र्ज़ी एलओयू जारी किए.

​​(फोटो: पीटीआई)

बैंक क़र्ज़ की हेराफेरी के मामले मे ‘न्यू इंडिया’ में कुछ नहीं बदला

चाहे हीरा-व्यापार का मामला हो या बुनियादी ढांचे की कुछ बड़ी परियोजनाएं, काम करने का तरीका एक ही रहता है- परियोजना की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और बैंकों व करदाताओं का ज़्यादा से ज़्यादा पैसा ऐंठना.

A bird flies past the logo of Punjab National Bank installed on the facade of its office in Mumbai, India February 21, 2018. REUTERS/Danish Siddiqui

आर्थिक सुधारों के बाद से उद्योग घरानों ने ही बैंकों को लूटा है

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आर्थिक संकट में उद्योगपतियों ने ही डाला है और कमाल की बात यह है कि निजीकरण के तहत इन बैंकों को एक तरह से उनके ही क़ब्ज़े में देने की बातें हो रही हैं.

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सब कुछ बदलने का वादा करके आए मोदी ने भ्रष्ट आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया

आज जब दुनिया में नाना प्रकार के खोट उजागर होने के बाद भूमंडलीकरण की ख़राब ​नीतियों पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हमारे यहां उन्हीं को गले लगाए रखकर सौ-सौ जूते खाने और तमाशा देखने पर ज़ोर है.

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प्रधानमंत्री जी, आम लोगों की मेहनत की कमाई से कॉरपोरेट लूट की भरपाई कब तक होती रहेगी?

पिछली सरकारों में व्यवस्था को अपने फ़ायदे के लिए तोड़ने-मरोड़ने वाले पूंजीपति मोदी सरकार में भी फल-फूल रहे हैं.

एसबीआई (फोटो: रायटर्स)

अगले तीन सालों में भौतिक रूप से अप्रासंगिक हो जाएंगे बैंक: अमिताभ कांत

नीति आयोग के सीईओ ने यह भी कहा कि आने वाले 3 सालों में देश में एक अरब से ज्यादा स्मार्टफोन उपभोक्ता होंगे, जिससे डाटा के जरिये वित्तीय भागीदारी बढ़ेगी.

Indian Currency Reuters

रिज़र्व बैंक संभवत: 2,000 रुपये का नोट जारी करने से रोक रहा है: एसबीआई रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक 2,000 रुपये के नोट से लेन-देन में कठिनाई को देखते हुए लगता है कि रिजर्व बैंक ने या तो इस नोट की छपाई रोक दी है या कम कर दी है.

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नफा कॉरपोरेट का, नुकसान करदाताओं का

केंद्र सरकार के 1.35 लाख करोड़ मूल्य के सरकारी बॉन्डों के रूप में बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देने के फैसले का मतलब है कि करदाताओं के पैसों से बैंकों और बकायेदार कॉरपोरेट समूहों को उबारा जा रहा है.

YV Reddy Reuters

गठबंधन सरकारों ने पूर्ण बहुमत वाली सरकारों से बेहतर आर्थिक वृद्धि दी: पूर्व आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने कहाकि वर्ष 2008 का वित्त आर्थिक संकट अभी तक टला नहीं है.

फोटो: पीआईबी

‘नए भारत’ के नए वादे पर आर्थिक संकट का काला बादल

2019 के चुनावों से 18 महीने पहले, भारत की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई दिखाई दे रही है, लेकिन नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार 2022 तक पूरे किए जाने वाले नामुमकिन वादों की झड़ी लगाने का सिलसिला जारी है.