Banking

Amritsar: A closed branch of the State Bank of India (SBI) during the bank employees' two-day nationwide strike for wage revision, in Amritsar on Wednesday, May 30, 2018. (PTI Photo) (PTI5_30_2018_000134B)

निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक संगठनों का विरोध प्रदर्शन, मार्च में संसद के घेराव की योजना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में अपने बजट भाषण के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी. अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ का कहना है कि बैंक संगठन अगले 15 दिनों के दौरान देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे.

कॉरपोरेट घरानों को बैंकिंग लाइसेंस की सिफ़ारिश पर राजन और आचार्य ने आरबीआई की आलोचना की

आरबीआई द्वारा गठित एक आंतरिक कार्य समूह ने पिछले सप्ताह सिफ़ारिश की थी कि कॉरपोरेट घरानों को बैंक शुरू करने का लाइसेंस दिया जा सकता है. रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ने कहा है कि भारत में बड़ी कंपनियों के पिछले कुछ साल में क़र्ज़ लौटाने को लेकर चूक देखते हुए हमें बैंकों में कॉरपोरेट क्षेत्र को स्वामित्व देने की अनुमति को लेकर संदेह है.

क्या मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत बनाने की बजाय क़र्ज़ निर्भर भारत बनाना चाहती है?

कोरोना महामारी के संकट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था क़र्ज़ के दलदल में फंस चुकी थी. अब इस संकट के बाद नए क़र्ज़ बांटने से इसका बुरा हाल होना तय है.

बजट में पारदर्शिता को लेकर कई बड़े राज्य फिसड्डी, असम पहले नंबर पर, मणिपुर सबसे नीचे: रिपोर्ट

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों की तुलना में केंद्र का बजट ज़्यादा पारदर्शी होता है. हालांकि केंद्र स्तर पर भी अभी भी कई ज़रूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता है.

Nagaon: A farmer ploughs his field using bullocks at Bamuni village, in Nagaon, Tuesday, July 02, 2019. (PTI Photo) (PTI7_2_2019_000076B)

देश में पिछले 10 साल में माफ़ हुआ 4.7 लाख करोड़ रुपये का कृषि क़र्ज़

हालांकि किसानों की ये क़र्ज़ माफ़ी वास्तविकता के बजाय काग़ज़ों पर ही अधिक हुई हैं. इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक क़र्ज़ माफ़ नहीं किए जा सके हैं. सबसे ख़राब प्रदर्शन मध्य प्रदेश का रहा है. मध्य प्रदेश में महज़ 10 प्रतिशत क़र्ज़ माफ़ किए गए हैं.

बड़ी मंदी की ओर बढ़ रहा भारत, आईसीयू में जा रही अर्थव्यवस्था: पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार

नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहते हुए अरविंद सुब्रमण्यन ने दिसंबर 2014 में दोहरे बैलंस शीट की समस्या उठाई थी, जिसमें निजी उद्योगपतियों द्वारा लिए गए कर्ज बैंकों के एनपीए बन रहे थे. सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से दोहरे बैलेंस शीट के संकट से जूझ रही है.

सभी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन होना अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि भारत आर्थिक मंदी के घेरे में है. आर्थिक सुस्ती को दूर करने की शुरुआत के लिए यह जरूरी है कि मोदी सरकार सबसे पहले समस्या को स्वीकार करे.

बहुसंख्यकवाद और अधिनायकवाद भारत को अंधेरे रास्ते पर ले जा रहा है: रघुराम राजन

अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में एक लेक्चर के दौरान पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि बिना सोच-विचार के नोटबंदी लाने और बुरी तरह से जीएसटी लागू करने की वजह से भारत इस समय आर्थिक सुस्ती की दौर से गुजर रहा है.

कैसे हुआ था रिज़र्व बैंक का बंटवारा

आज़ादी के 72 साल: 1947 में देश के विभाजन के बाद रिज़र्व बैंक ने कुछ समय तक पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक की भी ज़िम्मेदारी उठाई थी, जिसने आगे जाकर कई मुश्किलें खड़ी कर दीं.

बजट 2019 में महत्वाकांक्षाओं की कमी साफ दिखती है

जो लोग इस बजट से भाजपा के चुनावी वादों को पूरा करने के किसी रोडमैप की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें इस बजट में एक भी बड़ा विचार या कोई बड़ी पहल दिखाई नहीं दी. रोजगार सृजन और कृषि को फायदेमंद बनाने जैसे मसले पर चुप्पी हैरत में डालने वाली है.

बजट में दीर्घकालिक विकास के लिए रणनीति नहीं दिखाई देती

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट काफी अच्छी-अच्छी बातें करता है, लेकिन जब एक बड़ी तस्वीर बनाने की कोशिश करते हैं, तो इसमें काफी दरारें दिखाई देती हैं.

द वायर बुलेटिन: रघुराम राजन ने कहा, बिना रोजगार सृजन के सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर संदेह के घेरे में

मोदी के खिलाफ़ 111 किसान, भाजपा द्वारा उनकी मांगों को घोषणापत्र में शामिल करने के वादे समेत आज की बड़ी ख़बरें. दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट.

बिना रोजगार सृजन के सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर संदेह के घेरे में है: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर उपजे संदेह को दूर करने के लिए एक निष्पक्ष समूह की नियुक्ति पर जोर दिया है.

किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे

ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ कृषि आय घटी है बल्कि इससे जुड़े काम करने वालों की मज़दूरी भी घटी है. प्रधानमंत्री मोदी कृषि आय और मज़दूरी घटने को जोशीले नारों से ढंकने की कोशिश में हैं.