Bhima Koregaon

एल्गार मामला: पिता के निधन के बाद पारिवारिक कार्यक्रम के लिए रोना विल्सन को अस्थायी ज़मानत मिली

एल्गार परिषद मामले में सबसे पहले गिरफ़्तार हुए रोना विल्सन के पिता का बीते अगस्त में निधन हो गया था. उनके निधन के तीस दिन पूरे होने पर चर्च में आयोजित मास में शामिल होने के लिए एनआईए अदालत ने विल्सन को 13 से 27 सितंबर तक अस्थायी ज़मानत दी है.

एल्गार परिषद मामले के आरोपी देश के ख़िलाफ़ जंग छेड़ना चाहते थे: एनआईए का मसौदा आरोप

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एल्गार परिषद और माओवादियों के बीच संबंधों से जुड़े मामले में एक विशेष अदालत में मसौदा आरोप पेश किया है. मामले में शुरुआती जांच करने वाली पुणे पुलिस ने अपने प्रस्तावित मसौदा आरोपों में कहा था कि हथियार ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या’ की साज़िश से जुड़े थे, जबकि एनआईए ने प्रधानमंत्री का उल्लेख नहीं किया है.

वकीलों की अपील- स्टेन स्वामी के परिजनों को उनके नाम से जुड़ा लांछन मिटाने का हक़

एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार दिवंगत कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के वकीलों ने जमशेदपुर जेसुइट प्रोविंस की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट को पत्र लिखकर कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 21 मृत व्यक्तियों पर भी समान रूप से लागू होता है. जिस तरह अपीलकर्ता को जीवित रहते हुए अपना नाम बेदाग़ करने का अधिकार होता, यही समान हक़ उसके क़रीबियों का भी है.

तलोजा जेल को हेनी बाबू के लिए समय पर इलाज सुनिश्चित करना चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट

एल्गार परिषद मामले में आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हेनी बाबू को आंख के संक्रमण का उपचार पूरा होने के बाद मुंबई के एक निजी अस्पताल से वापस तलोजा जेल भेजा जाएगा. अदालत ने निर्देश दिया कि उनके जेल में आने के बाद जब भी आवश्यक हो, उन्हें मेडिकल देखभाल दी जाए.

एल्गार परिषद: एनआईए ने 15 आरोपियों के ख़िलाफ़ मसौदा आरोप-पत्र प्रस्तुत किया

एनआईए ने ‘ड्राफ्ट’ आरोपों में आरोपियों के ख़िलाफ़ 17 आरोप तय किए गए हैं और उन पर यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का अनुरोध किया गया है. बचाव पक्ष के वकीलों ने सोमवार को अदालत से अनुरोध किया कि उनके ख़िलाफ़ आरोप तय करने से पहले आरोपियों द्वारा दाख़िल कई अर्ज़ियों पर सुनवाई की जाए और उनका निपटारा किया जाए.

स्टेन स्वामी: अदालत ने कहा, कितने वर्षों तक लोगों को बिना सुनवाई के जेल में रखा जा सकता है

भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में यूएपीए के तहत पिछले साल आठ अक्टूबर को गिरफ़्तार किए गए 84 वर्षीय आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का निधन ​पांच जुलाई को मेडिकल आधार पर ज़मानत का इंतज़ार करते हुए अस्पताल में हो गया था. मेडिकल आधार पर ज़मानत याचिका ख़ारिज किए जाने के विशेष अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ स्वामी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसकी अदालत उनके मरणोपरांत सुनवाई कर रही है.

पेगासस हमला: एल्गार परिषद मामले में पहले से बिछाया गया था स्पायवेयर निगरानी का जाल

द वायर और सहयोगी मीडिया संगठनों द्वारा हज़ारों ऐसे फोन नंबरों, जिनकी पेगासस स्पायवेयर द्वारा निगरानी की योजना बनाई गई थी, की समीक्षा के बाद सामने आया है कि इनमें कम से कम नौ नंबर उन आठ कार्यकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदों के हैं, जिन्हें जून 2018 और अक्टूबर 2020 के बीच एल्गार परिषद मामले में  कथित भूमिका के लिए गिरफ़्तार किया गया था.

फादर, उन्हें माफ़ कर देना…

फादर स्टेन स्वामी की हिरासत, ख़ारिज होती ज़मानत, बुनियादी ज़रूरतों के लिए अदालत में अर्ज़ियां लगाना और अंत में अपनों से दूर एक अनजान शहर में उनका गुज़र जाना यह एहसास दिलाता है कि उनके ख़िलाफ़ कोई आरोप तय किए बिना और उन पर कोई मुक़दमा चलाए बगैर उन्हें सज़ा-ए-मौत मुक़र्रर कर दी गई.

स्टेन स्वामी की मौत भारत में मानवाधिकार रिकॉर्ड पर हमेशा एक ‘धब्बा’ रहेगी: यूएन विशेषज्ञ

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में यूएपीए के तहत पिछले साल गिरफ़्तार किए गए आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की बीते पांच जुलाई को मुंबई के एक अस्पताल में मौत हो गई थी. संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत मैरी लॉलर ने कहा कि आरोपी के तौर पर हिरासत में उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया गया.

भारद्वाज के आरोप पर एनआईए: सेशन जज संज्ञान ले सकते हैं, क्योंकि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का है

बीते छह जुलाई को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी कार्यकर्ता एवं वकील सुधा भारद्वाज ने अपने वकील के ज़रिये बॉम्बे उच्च न्यायालय को बताया था कि 2018 में उनकी गिरफ़्तारी के बाद जिस न्यायाधीश (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) ने उन्हें हिरासत में भेज दिया था, उन्होंने एक विशेष न्यायाधीश होने का ‘दिखावा’ किया था और उनके द्वारा जारी किए गए आदेश के कारण उन्हें और अन्य आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा.

स्टेन स्वामी की अमानवीय मौत का ज़िम्मेदार कौन?

वीडियो: भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में पिछले साल आठ अक्टूबर को गिरफ़्तार किए गए 84 वर्षीय आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का निधन ​पांच जुलाई को मेडिकल आधार पर ज़मानत का इंतज़ार करते हुए अस्पताल में हो गया. उनके प्रियजनों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मौत के लिए पूरी तरह से लापरवाह जेल, उदासीन अदालतें और दुर्भावनापूर्ण जांच एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं.

भीमा-कोरेगांव मामले के आरोपियों ने स्टेन स्वामी की ‘संस्थागत हत्या’ के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल की

एल्गार परिषद- भीमा कोरेगांव मामले के 10 आरोपियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एनआईए और तलोजा जेल के पूर्व अधीक्षक ने स्टेन स्वामी को प्रताड़ित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा चाहे वह जेल में भयावह बर्ताव हो, अस्पताल से उन्हें जेल में लाने की जल्दबाज़ी हो या पानी पीने के लिए सिपर जैसी छोटी सी चीज़ों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो, जिसकी स्वामी को अपने स्वास्थ्य के कारण ज़रूरत होती थी.

संयुक्त राष्ट्र की आलोचना के बाद सरकार ने कहा- स्टेन स्वामी पर क़ानून के अनुसार कार्रवाई हुई थी

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ की मानवाधिकार संस्था द्वारा आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की मौत पर भारत सरकार की आलोचना करने के बाद विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि देश मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने क़ानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें गिरफ़्तार करने के बाद हिरासत में लिया था.

पुणे के न्यायाधीश ने विशेष जज होने का ‘दिखावा’ कर ज़मानत देने से मना किया था: सुधा भारद्वाज

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज का कहना है कि एक न्यायाधीश विशेष जज होने का ‘दिखावा’ किया था और उनके द्वारा जारी आदेश के कारण उन्हें और अन्य आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा. बॉम्बे हाईकोर्ट ने उक्त न्यायाधीश की नियुक्ति, पद आदि पर मूल रिकॉर्ड पीठ के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है.

एल्गार परिषद मामले के आरोपियों के परिजनों ने कहा- स्टेन स्वामी की मौत संस्थागत हत्या है

भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में पिछले साल आठ अक्टूबर को गिरफ़्तार किए गए 84 वर्षीय आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का निधन ​बीते सोमवार को मेडिकल आधार पर ज़मानत का इंतज़ार करते हुए अस्पताल में हो गया. आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के प्रियजनों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मौत के लिए पूरी तरह से लापरवाह जेल, उदासीन अदालतें और दुर्भावनापूर्ण जांच एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं.